चंडीगढ़/24जून: शिरोमणी अकाली दल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैणी से मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ-साथ उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने अपील की जिन्होने श्री अकाल तख्त साहिब को ठेस पहुंचाने के मकसद से नकली फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की थी।
यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अकाली दल के वरिष्ठ नेता स. परमबंस सिंह रोमाणा ने कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि लैबोरेटरी से संबंधित केवल दो व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जालसाजी और धोखाधड़ी की है। उन्होने कहा,‘‘ क्योंकि संबंधित दोनों लैबोरेटरीज वीडियो की गहन जांच करने के लिए पर्याप्त तैयार नही हैं, इसीलिए रिपोर्ट को दो अधिकारियों- एस.पी जसनदीप सिंह और लुधियाना के कमिशनर आॅफ पुलिस स्वप्न शर्मा द्वारा संपादित और अंतिम रूप दिया गया इसीलिए इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए।’’
इस मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए सरदार रोमाणा ने कहा कि यह सिख समुदाय की भावनाओं से जुड़ा है। उन्होने कहा,‘‘ यह पता लगाया जाना चाहिए कि किसने रिपोर्ट तैयार करवाई और आरोपियों को इसे हासिल करने के लिए पैसे किसने दिए।’’ स. रोमाणा ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए पंजाब पुलिस के दोनों अधिकारियों और उनके स्टाफ के सभी फोन, लैपटाप, हार्ड डिस्क और अन्य तकनीकी उपकरणों को जब्त करने की मांग की है। उन्होने कहा,‘‘ अधिकारियों के काॅल रिकाॅर्ड की भी जांच की जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि इस मामले में उन्हे निर्देश किसने दिए।’’
यह कहते हुए यह संगठित अपराध का एक उपयुक्त मामला (एफआईआर में बीएनएस की धाराओं के अनुसार), अकाली नेता ने कहा,‘‘ यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आम आदमी पार्टी सरकार ने मुख्यमंत्री को क्लीन चिट देने के लिए फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट हासिल करने के लिए सरकारी मशीनरी के साथ-साथ सार्वजनिक पैसे का भी इस्तेमाल करने की अनुमति दी। ’’उन्होने कहा कि जसप्रीत सिंह जस्सी ने पुरी कार्यप्रणाली का पर्दाफाश कर दिया है, जिनसे पुलिस अधिकारियों ने दो फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए संपर्क किया था। उन्होन कहा कि जस्सी ने एक बयान दिया है जिसमें उन्होने बताया कि कैसे उन पर इस गैरकानूनी काम के लिए दबाव डाला गया और कैसे उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होने इस निर्देश का पालन नही किया तो उनके परिवार को मार डालने सहित गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।
इस मामले की विस्तार से जानकारी देते हुए सरदार रोमाणा ने कहा,‘‘ एसीपी (क्राइम-1) गुड़गांव द्वारा उचित जांच के बाद ही केस दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि मामला दर्ज होने से पहले आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता था।’’ उन्होने कहा कि पुलिस रिकाॅर्ड में यह दर्ज है कि जिन दो लैबोरेटरीज से फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाई गई वे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नही थी और उनके पास जटिल चेहरे की पहचान करने वाले परीक्षण की विशेषज्ञता नही थी। उन्होने यह भी खुलासा किया कि पुलिस अधिकारियों ने जसप्रीत जस्सी को एक संपादित वीडियो दिया और उन्हें मुख्यमंत्री को क्लीन चिट देने के लिए रिपोर्ट देने को कहा,जबकि वह जानते थे लैब संपादित वीडियो पर वहां परीक्षण करने में आधुनिक रूप से तैयार नही थी।
सरदार रोमाणा ने वित्तमंत्री हरपाल चीमा से कहा कि वह बताएं कि इस मामले में उनका क्या कहना है? उन्होने कहा कि हरपाल चीमा ने फर्जी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमत्री का जमकर बचाव किया है और मामले की जांच कराने के लिए स्पेशल डीजीपी गौरव यादव से मामले की जांच करवाने के लिए शिकायत देने की नौटंकी भी की अब उन्होने चुप्पी क्यों साध ली है उन्होने कहा ,‘‘ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भी चुप्प हो गए हैं जिससे संकेत मिलता है कि वह इस मामले में बचाव नही करना चाहते क्योंकि बचाव करना संभव ही नही है।‘‘
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