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बच्चों का समग्र विकास अभिभावकों व शिक्षकों के संयुक्त प्रयासों से संभव : प्रो. घोष

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राज्यपाल ने राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल नूंह-2 व पीएमश्री राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, फिरोजपुर नमक का दौरा कर विभिन्न व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण

दोनों स्कूलों में विद्यार्थियों की विभिन्न सुविधाओं के लिए 10-10 लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की

न्यूज़म ब्यूरो

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नूंह / चंडीगढ़, 1 मई। हरियाणा के राज्यपाल प्रो असीम कुमार घोष ने आज जिला नूंह शहर के राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल नूंह-2 व गांव फिरोजपुर नमक स्थित पीएमश्री राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दौरा किया। राज्यपाल ने इन स्कूलों में शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई, बिजली सहित सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने इन स्कूलों की प्राइमरी विंग के क्लासरूम में जाकर बच्चों से सीधा संवाद किया।  राज्यपाल ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने तथा जीवन में अच्छा नागरिक बनने के लिए भी विशेष रूप से प्रेरित किया।

राज्यपाल प्रो असीम कुमार घोष ने स्कूल की विजिट करने के बाद कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों का समग्र विकास तभी संभव है, जब अभिभावक और शिक्षक मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में खेल, स्वास्थ्य, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

राज्यपाल ने कहा कि स्कूलों में बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिसमें स्वच्छ पानी, शौचालय और खेल सामग्री प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि इन सुविधाओं के विकास के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है और इस दिशा में विशेष बजट भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अवसर पर राज्यपाल ने दोनों स्कूलों में विद्यार्थियों की विभिन्न सुविधाओं के लिए 10-10 लाख रुपए की राशि देने की भी घोषणा की।

प्रो असीम कुमार घोष ने कार्यक्रम में अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को पर्याप्त समय दें और उनकी पढ़ाई के साथ-साथ उनके व्यवहार और रुचियों पर भी ध्यान दें। बच्चों को डांटे नहीं, उन्हें जो भी सिखाया जाए, वह प्यार व दुलार के साथ सिखाया जाए। प्यार-दुलार के साथ बच्चे जल्दी सीखते भी हैं और उनके व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे अपनी समस्याएं साझा नहीं कर पाते, इसलिए अभिभावकों को उनके साथ संवाद बनाए रखना चाहिए। अभिभावक बच्चों को अपना मित्र बनाएं।

प्रो घोष ने शिक्षकों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि बच्चों के मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत भी होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना विकसित करें। राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को सही दिशा देने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल होना बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि संयुक्त प्रयासों से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाया जा सकता है और वे देश के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।

इस मौके पर उनके साथ उनकी धर्मपत्नी मित्रा घोष, वक्फ बोर्ड के प्रशासक जाकिर हुसैन, राज्यपाल हरियाणा के सचिव विजय कुमार भाविकट्टी  सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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