संजय राउत की पुस्तक के विमोचन समारोह में उद्धव ने भाजपा से बातचीत बंद होने की बात दोहराई, वहीं राज ठाकरे ने राउत के पत्रकारिता के सफर के कई किस्से सुनाए।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 1 नवंबर। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी के साथ अपने संबंधों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के बाद भाजपा के साथ उनकी बातचीत बंद हो गई थी और इसके बाद दोबारा शुरू नहीं हुई। उद्धव का यह बयान फडणवीस की उस टिप्पणी के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उद्धव ठाकरे का फोन आने पर वह हमेशा सकारात्मक जवाब देते थे।
उद्धव ठाकरे शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक संजय राउत की पुस्तक ‘बोध कीर्तन’ के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। फडणवीस की टिप्पणी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, ”कुछ लोगों के फोन आने बंद हो गए और फिर वे हमेशा के लिए बंद हो गए।”
फडणवीस ने क्या कहा था?
दो दिन पहले एक अन्य पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि जब भी उद्धव ठाकरे ने उन्हें फोन किया, उन्होंने हमेशा सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि वर्ष 2019 के बाद उद्धव ने उन्हें फोन नहीं किया और वह इंतजार करते रह गए।
दरअसल, 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर अविभाजित शिवसेना और भाजपा के बीच मतभेद पैदा हो गए थे। इसके बाद शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। वर्ष 2022 में शिवसेना में विभाजन और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के भाजपा के साथ जाने के बाद दोनों पक्षों के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए।
राज ठाकरे ने सुनाए संजय राउत के पुराने किस्से
कार्यक्रम में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने संजय राउत के पत्रकारिता के सफर और उनके साथ चार दशक से अधिक पुराने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राउत जब ‘लोकप्रभा’ में काम करते थे, तब शिवसेना की आलोचना में लेख लिखा करते थे। इससे बालासाहेब ठाकरे उनसे नाराज रहते थे।
राज ठाकरे ने बताया कि उन्होंने ही बालासाहेब से राउत का इंटरव्यू देने का आग्रह किया था। शुरुआत में बालासाहेब इसके लिए तैयार नहीं थे, लेकिन बाद में मुलाकात हुई। इंटरव्यू के दौरान राउत ने कई तीखे सवाल पूछे। बालासाहेब ने उन्हें नाराजगी में खरी-खोटी भी सुनाई। इंटरव्यू प्रकाशित हुआ तो उसमें बालासाहेब की कही बातें भी जस की तस शामिल थीं। राज ठाकरे के मुताबिक, राउत की इसी बेबाकी से बालासाहेब प्रभावित हुए थे।
उन्होंने बताया कि बाद में बालासाहेब ने संजय राउत को उद्धव ठाकरे से मिलवाने के लिए कहा। इस मुलाकात के बाद राउत का ‘सामना’ से जुड़ने का रास्ता बना और आगे चलकर वह उसके कार्यकारी संपादक बने।
राज ठाकरे ने किताब की कविता पर भी कसा तंज
राज ठाकरे ने पुस्तक में शामिल एक कविता का जिक्र करते हुए उस पर अपने अंदाज में कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कविता पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे कोई वर्ष 2014 के नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार का हिस्सा सुन रहा हो। इसके बाद उन्होंने कविता की कुछ पंक्तियां पढ़कर सुनाईं और दर्शकों से पुस्तक को पढ़ने की अपील की।
संजय राउत ने जेल और मोदी के भाषण का किया जिक्र
संजय राउत ने विमोचन समारोह में अपनी पुस्तक से जुड़े दो प्रसंगों पर बात की। उन्होंने बताया कि जेल में रहते हुए उन्होंने एक ऐसी कोठरी देखी थी, जो उन्हें बेहतर लगी। जब उन्होंने जेलर से वहां शिफ्ट करने को कहा, तो बताया गया कि वह कोठरी विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे आर्थिक अपराध के आरोपियों के लिए रखी गई है। राउत ने इस प्रसंग के जरिए जेलों में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर किए जाने वाले दावों पर सवाल उठाया।
पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के भाषण का भी उल्लेख है। राउत ने कहा कि उन्हें उस भाषण का एक हिस्सा अच्छा लगा था। उन्होंने इसे बिना टेलीप्रॉम्प्टर दिया गया प्रभावशाली भाषण बताया। राउत ने स्पष्ट किया कि किसी भाषण की प्रशंसा करने का अर्थ यह नहीं है कि मोदी उनके व्यक्तिगत शत्रु हैं या वह उनकी स्तुति कर रहे हैं।
उद्धव ने कहा- रोज के संघर्ष में पढ़ने का समय नहीं मिल रहा
उद्धव ठाकरे ने संजय राउत के साथ अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ‘सामना’ में खबरों या शीर्षकों में गलती होने पर बालासाहेब ठाकरे अक्सर नाराज होते थे। ऐसे समय में उन्हें राउत से बात करनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि पहले बालासाहेब का गुस्सा संजय राउत पर निकलता था और बाद में उन्हें भी सुनना पड़ता था।
उद्धव ने मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों की सोचने और पढ़ने की क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि कहीं बिजली परियोजना के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं, कहीं कोई अन्य परियोजना आ रही है, तो कहीं किसी घटना के विरोध में आंदोलन करना पड़ता है। उन्होंने करजत में प्रस्तावित परियोजना और कोल्हापुर-सिंधुदुर्ग सीमा पर अडानी समूह की 21 हजार मेगावॉट की परियोजना का भी उल्लेख किया।
उद्धव के मुताबिक, लगातार विरोध और आंदोलनों में उलझे रहने के कारण लोगों को पढ़ने और सोचने का समय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि रोज नए मुद्दे सामने आने से लोगों की सोचने की क्षमता पर असर पड़ रहा है।
समारोह में वरिष्ठ पत्रकार अमरीश मिश्रा और बालासाहेब ठाकरे के साथ अपने संबंधों का जिक्र करते हुए उद्धव ने कहा कि कुछ लोगों से वर्ष 2019 के बाद बातचीत बंद हो गई, लेकिन कुछ पुराने लोगों के साथ संवाद फिर शुरू हुआ है। उन्होंने दोहराया कि जिन लोगों से बातचीत 2019 में बंद हुई थी, वह आज तक बंद है।
इस कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और संजय राउत सहित कई राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियां मौजूद थीं।
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