18 साल के संघर्ष के बाद बने बायपास के उद्घाटन में गोपाल पाटिल का नाम नहीं आने से नाराजगी, नागरिक सम्मान समारोह में जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना।
उरण। करीब 18 साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद उरण बायपास सड़क का उद्घाटन हुआ, लेकिन इसके साथ ही सड़क का श्रेय लेने को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। इस मुद्दे पर उरण की नगराध्यक्ष भावना घाणेकर ने भाजपा विधायक महेश बालदी और उनके समर्थकों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे के बच्चे को गोद में लेने से वह अपना नहीं हो जाता। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव में जनता ऐसे लोगों को बायपास कर देगी।
उद्घाटन कार्यक्रम में गोपाल पाटिल का नाम नहीं आने पर नाराजगी
सिडको के अधिकार क्षेत्र में आने वाली उरण बायपास सड़क का हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन किया था। करीब 53 करोड़ रुपये की लागत वाली इस सड़क की परिकल्पना और निर्माण के लिए लगातार 18 साल तक उरण उत्कर्ष समिति के अध्यक्ष गोपाल पाटिल ने प्रयास किए थे।
हालांकि, उद्घाटन कार्यक्रम में गोपाल पाटिल का नाम तक नहीं लिया गया। इस पर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी फैल गई। आरोप है कि भाजपा विधायक महेश बालदी ने सड़क का श्रेय लेने की कोशिश की। इसके विरोध में रविवार, 31 तारीख की शाम उरण बायपास सड़क पर ही गोपाल पाटिल का सार्वजनिक नागरिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
विकास कार्यों में विरोध पर नगराध्यक्ष ने उठाए सवाल
उरण सामाजिक संस्था, आधार सावली फाउंडेशन, उरण उत्कर्ष समिति, युवा सामाजिक संस्था और उरण तालुका चेस एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में नगराध्यक्ष भावना घाणेकर ने नगर परिषद के कामकाज पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले आठ महीनों में हुई नगर परिषद की सामान्य सभाओं में विपक्षी सदस्यों ने विकास कार्यों का लगातार विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे जनप्रतिनिधियों को लोगों की समस्याओं की समझ नहीं है। नागरिकों को अपनी समस्याओं और संकटों से निपटने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
गोपाल पाटिल के 18 साल के संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने अभिनेता देव आनंद के गीत की पंक्तियां भी सुनाईं।
बायपास का 400 मीटर हिस्सा अब भी अधूरा
उरण पंचायत समिति के सभापति महेश म्हात्रे ने गोपाल पाटिल के सामाजिक और राजनीतिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़क का श्रेय लेने के लिए लगाए गए पोस्टर और बैनर दो दिन में उतर गए, लेकिन बायपास के लिए गोपाल पाटिल का संघर्ष लोगों को हमेशा याद रहेगा।
उन्होंने बताया कि नगर परिषद की सीमा में आने वाला बायपास का करीब 400 मीटर हिस्सा 13 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण अधूरा है। इस हिस्से का काम पूरा कराने के लिए भी संघर्ष करना होगा। उन्होंने इस प्रयास में गोपाल पाटिल के साथ शामिल होने की इच्छा जताई।
18 साल के संघर्ष में नागरिकों और पत्रकारों का भी योगदान
सम्मान समारोह में उरण सामाजिक संस्था के अध्यक्ष सुधाकर पाटिल, उरण तालुका चेस एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप पाटिल, उरण बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट विजय पाटिल और कामगार नेता भूषण पाटिल ने भी सड़क का श्रेय लेने की कोशिश करने वालों की आलोचना की।
वक्ताओं ने खोपटा खाड़ी पुल के संपर्क मार्ग पर मिट्टी भराव के लिए किए गए श्रमदान, करल रेलवे फाटक बंद करने के विरोध में हुए रेल रोको आंदोलन और करल फ्लाईओवर के लिए किए गए कानूनी संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गोपाल पाटिल ने क्षेत्र के हित में लंबे समय तक कई प्रयास किए हैं।
गोपाल पाटिल बोले- संघर्ष जारी रहेगा
सम्मान के जवाब में गोपाल पाटिल ने कहा कि उन्होंने यह कार्यक्रम इसलिए स्वीकार किया, ताकि उनके काम को पर्दे के पीछे न धकेला जाए और दूसरे के प्रयासों का श्रेय लेने वालों पर रोक लग सके।
उन्होंने बताया कि बायपास के लिए किए गए प्रयासों में तत्कालीन पालकमंत्री सुनील तटकरे, सिडको अध्यक्ष प्रमोद हिंदुराव, नकुल पाटिल और सिडको के प्रबंध निदेशक का भी मार्गदर्शन व सहयोग मिला। उन्होंने 18 साल के संघर्ष में स्थानीय नागरिकों और पत्रकारों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।
गोपाल पाटिल ने नगर परिषद की सीमा में आने वाले 400 मीटर के अधूरे हिस्से के लिए भी संघर्ष करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अपने आक्रामक स्वभाव में बदलाव नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि गायक के बजाय समाजसेवक कहलाना उन्हें अधिक पसंद है।
कार्यक्रम में आधार सावली फाउंडेशन की अध्यक्ष रेश्मा म्हात्रे, उरण उत्कर्ष समिति के दीपक गावंड, युवा सामाजिक संस्था के अध्यक्ष हर्षल ठाकुर, कोमसाप के अध्यक्ष एल.बी. पाटिल, शेकाप तालुका सचिव रवींद्र घरत, संतोष पवार, शिक्षक नेता दा. चां. कडू, अखिल भारतीय जनवादी महिला संघ की हेमलता पाटिल सहित गोपाल पाटिल के समर्थक और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।
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