एसआईआर पर झूठ फैलाकर संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग को बदनाम कर रही कांग्रेस : मनसुख मांडविया
राहुल गांधी बताएं, चुनाव जीतने पर ईवीएम और चुनाव आयोग सही, लेकिन हारने पर वोट चोरी का आरोप क्यों ?
पानीपत स्थित भाजपा कार्यालय श्याम कमल में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने की पत्रकार वार्ता
एसआईआर मतदाता सूची के शुद्धिकरण की संवैधानिक प्रक्रिया, कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलता छिपाने के लिए फैला रही भ्रम : मांडविया
13 करोड़ वोट चोरी का दावा भ्रामक, इनमें 6.3 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट, 2.8 करोड़ मृत और 1 करोड़ डुप्लीकेट मतदाता
चुनाव आयोग को बदनाम कर जनता को गुमराह करना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ : केंद्रीय मंत्री
न्यूज़म ब्यूरो
पानीपत, 6 नवंबर। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार स्वीकार करने के बजाय कभी ईवीएम तो कभी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाकर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि एसआईआर मतदाता सूची के शुद्धिकरण की एक नियमित और संवैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन कांग्रेस इसे लेकर देशभर में झूठ और भ्रम फैलाने में जुटी हुई है।
पानीपत स्थित भाजपा कार्यालय श्याम कमल में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ विषय पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और मतदाता सूची को शुद्ध एवं अद्यतन रखना उसका अधिकार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। वर्ष 1952 से मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चलती आ रही है। देश में रोजगार, व्यवसाय और विवाह सहित विभिन्न कारणों से लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना सामान्य बात है। कई मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हो जाते हैं, जबकि कुछ मतदाताओं की मृत्यु हो जाती है। ऐसे में मतदाता सूची का नियमित शुद्धिकरण आवश्यक है।
कांग्रेस के 13 करोड़ वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि लगभग 6.3 करोड़ यानी 48.1 प्रतिशत मतदाता स्थायी रूप से अपना निवास स्थान बदल चुके थे, करीब 2.8 करोड़ यानी 21.4 प्रतिशत मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी और लगभग 1 करोड़ यानी 7.6 प्रतिशत नाम डुप्लीकेट थे। इसके अतिरिक्त करीब 3 करोड़ यानी 22.9 प्रतिशत मतदाता अनुपस्थित थे अथवा निर्धारित प्रक्रिया के दौरान उनसे संपर्क नहीं हो पाया था। उन्होंने कहा कि ऐसे नामों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई को वोट चोरी बताना जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
मांडविया ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या विदेशी घुसपैठियों को भारत की मतदाता सूची में शामिल होने और देश के जनप्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार मिलना चाहिए? यदि किसी संदिग्ध विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज है तो उसकी नागरिकता और पात्रता की जांच के लिए नोटिस देना क्या गलत है? उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में केवल भारतीय नागरिकों को ही कानून के अनुसार मतदान का अधिकार है। मतदाता सूची में किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम बनाए रखने की वकालत करना देशहित में नहीं हो सकता।
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की निगरानी में जिला निर्वाचन अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के माध्यम से होता है। बीएलओ किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा होता है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि एसआईआर की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई है तो कांग्रेस शासित राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी ने इस संबंध में कोई शिकायत क्यों नहीं की? क्या किसी बीएलओ या सरकारी कर्मचारी ने दबाव में गलत तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायत की है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों और प्रमाणों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति का आधार अब चुनावी हार का ठीकरा कभी ईवीएम तो कभी चुनाव आयोग पर फोड़ना बन गया है। जब कांग्रेस कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में चुनाव जीतती है तो उसे ईवीएम और चुनाव आयोग पर कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन चुनाव हारते ही वोट चोरी का राग अलापना शुरू कर देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी बताएं कि चुनाव जीतने पर ईवीएम और चुनाव आयोग सही कैसे हो जाते हैं और हारने पर उन्हीं पर वोट चोरी के आरोप क्यों लगाए जाते हैं?
मांडविया ने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश को स्वीकार करना चाहिए, न कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित करना चाहिए। कांग्रेस को समझना होगा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। चुनाव आयोग को कमजोर करने और जनता के मन में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने का प्रयास देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मानना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम होने चाहिए। एसआईआर का उद्देश्य किसी का मतदान का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को पारदर्शी, शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है। कांग्रेस को झूठे आरोपों और भ्रम की राजनीति छोड़कर जनता के बीच जाना चाहिए तथा अपने काम और नीतियों के आधार पर जनसमर्थन हासिल करना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने दो टूक कहा कि चुनाव में हार का सामना करने के बाद संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। देश की जनता अब भ्रम और झूठ की राजनीति नहीं, बल्कि विकास, सुशासन और जवाबदेही चाहती है।
इस अवसर पर विधायक प्रमोद विज, भाजपा जिलाध्यक्ष दुष्यंत भट्ट, नगर निगम मेयर कोमल सैनी, पूर्व मेयर अवनीत कौर, सांसद प्रतिनिधि गजेन्द्र सलूजा, अनीता चावला, भावना जैन, संजय त्यागी, जिला महामंत्री सुमित जागलान, सुनील कंसल, ओमदत आर्य, तरुण पसरीजा, रमेश सैन अहरिया, शुभम, राहुल राणा सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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