पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजना के लिए करीब 370 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। वन विभाग ने कंपनी से कहा है कि परियोजना क्षेत्र में अधिक से अधिक पेड़ों को बचाने और उनका दूसरी जगह प्रत्यारोपण करने की कोशिश की जाए।
राहुल गुप्ता
रायगढ़, 6 नवंबर। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के करजत इलाके में प्रस्तावित पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजना के लिए 32 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में अलीबाग वन विभाग ने परियोजना संचालित करने वाली गुजरात की कंपनी टोरेंट पावर को अधिक से अधिक पेड़ों को बचाने और उन्हें दूसरी जगह प्रत्यारोपित करने का निर्देश दिया है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी को मौखिक रूप से कहा गया है कि जहां संभव हो वहां पेड़ों को काटने के बजाय उनका प्रत्यारोपण किया जाए। जलभराव वाले क्षेत्र में मौजूद पेड़ों को भी बचाने की कोशिश करने को कहा गया है। इस संबंध में औपचारिक पत्र जारी किया जाना बाकी है।
370 हेक्टेयर जमीन पर प्रस्तावित परियोजना
टोरेंट पावर की पंप्ड स्टोरेज परियोजना के लिए करजत के सैदोंगर, कोटवाल खलाटी और पाली क्षेत्रों में करीब 370 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता बताई गई है। इस परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की आशंका के कारण स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।
परियोजना से जुड़े क्षेत्र में पेड़ों की संख्या और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में वन विभाग ने कंपनी को पेड़ों को बचाने के विकल्प तलाशने को कहा है।
कटाई के बजाय प्रत्यारोपण पर जोर
अलीबाग वन विभाग के उप वन संरक्षक उमेश बावडे के मुताबिक, टोरेंट प्रबंधन को अधिक से अधिक पेड़ों का प्रत्यारोपण करने और जलमग्न होने वाले क्षेत्र के पेड़ों को भी बचाने के लिए कहा गया है। विभाग की ओर से इस संबंध में औपचारिक संवाद किया जाएगा।
अब परियोजना के लिए आवश्यक भूमि, पेड़ों की कटाई और प्रत्यारोपण की संभावनाओं पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। वन विभाग के निर्देश के बाद कंपनी को पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के उपायों पर काम करना होगा।
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