मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने के लिए कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये की डील की बातचीत वाले ऑडियो की जांच में सहयोग को तैयार हुए जरांगे।
राहुल गुप्ता
छत्रपति संभाजीनगर, 6 नवंबर। मराठा आरक्षण आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने 500 करोड़ रुपये की कथित डील से जुड़े ऑडियो की मूल रिकॉर्डिंग विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने पर सहमति जताई है। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से ऑडियो उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति और उसके परिवार की सुरक्षा की लिखित गारंटी मांगी है।
जरांगे का कहना है कि वह न केवल मूल ऑडियो रिकॉर्डिंग, बल्कि उसके स्रोत और यह रिकॉर्डिंग उन तक कैसे पहुंची, इसकी पूरी जानकारी भी जांच अधिकारियों को देने के लिए तैयार हैं। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति की पहचान उजागर करने से पहले सरकार को उसकी और उसके परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी होगी।
सुरक्षा की लिखित गारंटी की मांग
पत्रकारों से बातचीत में जरांगे ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को लिखित आश्वासन देना चाहिए कि ऑडियो देने वाले व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों की जान को कोई खतरा नहीं होगा। सरकार को उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह कथित 500 करोड़ रुपये के लेन-देन के पीछे की सच्चाई सामने लाना चाहते हैं। निष्पक्ष जांच के जरिए इस पूरे मामले के मुख्य साजिशकर्ता का खुलासा होना चाहिए।
एसआईटी ने मांगी मूल रिकॉर्डिंग और डिजिटल डेटा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने औपचारिक रूप से जरांगे से संपर्क किया है। जांच दल ने उन्हें पत्र सौंपकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनाई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग, उसका मूल डिजिटल डेटा और इससे जुड़े अन्य सबूत मांगे हैं।
एसआईटी का नेतृत्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शैलेश बालकवडे कर रहे हैं, जो मुंबई पुलिस में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) हैं। जांच दल को आरोपों की पड़ताल करने के साथ ऑडियो की प्रामाणिकता और उसके मूल स्रोत का पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।
जरांगे ने कहा कि उन्हें जांच अधिकारियों को रिकॉर्डिंग सौंपने में कोई आपत्ति नहीं है और वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि ऑडियो उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही उसकी पहचान और अन्य जानकारी साझा करेंगे।
शिंदे के सांसद का नाम आने से गरमाया था विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ था, जब मनोज जरांगे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथित टेलीफोन बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनाई थी। इसमें दावा किया गया था कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से जरांगे तक 500 करोड़ रुपये पहुंचाने की डील हुई थी।
इस रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे।
जरांगे ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या किसी ने उनके नाम पर पैसे इकट्ठा किए हैं और क्या यह रकम उनके लिए बताई जा रही थी। उन्होंने यह भी सवाल किया था कि क्या उन्हें इस कथित लेन-देन में से एक रुपया भी मिला है। साथ ही, उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान करने की मांग की थी।
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