स्पीकर को विधानसभा की गरिमा की रक्षा करनी चाहिए थी, मुख्यमंत्री ने आरोपों का जवाब देने की बजाय भागना पसंद किया, जिससे साबित होता है वह दोषी हैं
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 1 मई। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज भगवंत मान से मुख्यमंत्री पद से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की और कहा कि शराब पीकर विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल होकर उन्होंने सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है।
यहां जारी एक बयान में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष ने कहा कि पंजाबी यह देखकर हैरान हैं कि मुख्यमंत्री ने इस तरह से पवित्र सदन और उन्हें दिए गए अधिकार का अपमान किया है।
पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए सरदार सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह बहुत चिंता की बात है कि स्पीकर कुलतार सिंह संधवान ने मामले पर उचित कार्रवाई करके सदन के सम्मान और गरिमा को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, हालांकि वह मुख्यमंत्री का मेडिकल टेस्ट भी करा सकते थे।
उन्होंने कहा कि सच तो यह है कि जब उन पर आरोप लगे कि उन्होंने बहुत ज़्यादा शराब पी रखी है, तो उन्होंने आरोपों का जवाब देने के बजाय मौके से चले जाना पसंद किया। सरदार बादल ने इस बात को भी गंभीरता से लिया कि मुख्यमंत्री ने बहुत अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे उनके पद की गरिमा और सम्मान गिरा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पहली बार नहीं है जब किसी मुख्यमंत्री ने इस तरह का व्यवहार किया हो। इससे पहले, उन्हें फ्रैंकफर्ट में प्लेन से इसलिए उतार दिया गया था क्योंकि उन्होंने बहुत ज़्यादा शराब पी रखी थी, उस समय उन्होंने दुनिया भर में मुख्यमंत्री के पद की इज्जत गिराई थी।
भगवंत मान को पूरी तरह से शराबी बताते हुए शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने नशे की हालत में तख्त श्री दमदमा साहिब में माथा टेका था। उन्होंने कहा कि इससे पहले मान नशे की हालत में बरगाड़ी मोर्चे में शामिल हुए थे, जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पाठ हुआ था।
उन्होंने कहा कि सब जानते हैं कि भगवंत मान लोकसभा के सदस्य थे, तो उस समय उनके साथी लोकसभा सदस्यों ने स्पीकर को लिखकर भगवंत मान से अपनी सीट बदलने की रिक्वेस्ट की थी क्योंकि उनसे हमेशा शराब की बदबू आती है।
सरदार बादल ने पंजाबियों को यह भी याद दिलाया कि भगवंत मान ने सबके सामने अपनी मां की कसम खाई थी कि वह फिर कभी शराब नहीं पिएंगे। लेकिन उन्होंने न सिर्फ अपनी मां को धोखा दिया बल्कि उन सभी पंजाबियों को भी धोखा दिया जिन्होंने उन्हें जनादेश दिया था।
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