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कैबिनेट में हरियाणा प्रगतिशील MSME एवं निर्यात संवर्धन नीति–2026 पास

हरियाणा के 60 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में एमएसएमई एवं निर्यात क्षेत्र के लिए 60 परिवर्तनकारी पहलें

उद्यमिताविनिर्माणनिर्यात एवं रोजगार को गति प्रदान करने हेतु एक ऐतिहासिक नीति

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 28 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा आत्मनिर्भर भारतमेक इन इंडिया एवं विकसित भारत–2047 की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं  से प्रेरित होकर हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व एवं माननीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के मार्गदर्शन में आज हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति–2026 का अनावरण किया। यह नीति सूक्ष्मलघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमईके लिए राज्य का अब तक का सर्वाधिक महत्वाकांक्षी नीतिगत ढांचा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निरंतर इस बात पर बल दिया है कि एमएसएमई क्षेत्र भारत के विनिर्माण एवं औद्योगिक विकास की रीढ़ है तथा जब एमएसएमई आगे बढ़ते हैंतभी भारत भी प्रगति करता है।  इसी दृष्टिकोण से प्रेरित होकर हरियाणा ने एमएसएमई क्षेत्र को अपनी विकास रणनीति के केंद्र में स्थान दिया है तथा इसे निवेशनवाचाररोजगार सृजन एवं निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार माना है।

हरियाणा अपनी विकास यात्रा के 60 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस अवसर पर राज्य सरकार ने प्रदेश के 14 लाख से अधिक एमएसएमई के पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 60 परिवर्तनकारी पहलों [1] को समर्पित किया है। इस नीति के माध्यम से अगले पाँच वर्षों में विनिर्माण क्षेत्र में ₹55,000 करोड़ से अधिक के निवेश को आकर्षित करनेपाँच लाख से अधिक नए रोजगार सृजित करने तथा हरियाणा के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके माध्यम से हरियाणा को विनिर्माणउद्यमिता एवं वैश्विक व्यापार के लिए भारत के सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी राज्यों में स्थापित करने का उद्देश्य है।

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हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति–2026 राज्य सरकार के संकल्प पत्र में किए गए वादों को धरातल पर उतारनेराज्य बजट 2026–27 में की गई प्रमुख घोषणाओं को क्रियान्वित करनेहरियाणा विज़न–2047 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने तथा भारत सरकार के रेज़िंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP) कार्यक्रम के साथ समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

नीति की 60 परिवर्तनकारी पहलें छह प्रमुख रणनीतिक स्तंभोंवित्तअवसंरचनाप्रौद्योगिकीनिर्यातसतत विकास तथा कौशल विकासपर आधारित हैं। यह व्यापक ढांचा एमएसएमई को उनकी स्थापना से लेकर विस्तार तक प्रत्येक चरण में समग्र सहयोग प्रदान करेगा। यह नीति हरियाणा के सभी क्षेत्रों के उद्यमों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है तथा पारंपरिक एवं उच्चविकास क्षमता वाले प्रमुख क्षेत्रों के लिए लक्षित सहायता प्रदान करती है। इनमें ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्सइलेक्ट्रिक वाहनएयरोस्पेस एवं रक्षासामान्य इंजीनियरिंगधातु उत्पाद एवं इस्पात निर्माणविद्युत उपकरणइलेक्ट्रॉनिक्स एवं वैज्ञानिक उपकरणऔषधि एवं चिकित्सा उपकरणरबर एवं प्लास्टिक (खिलौने एवं खेल सामग्री सहित), फुटवियर एवं चमड़ा उत्पादनवीकरणीय ऊर्जापरिपत्र अर्थव्यवस्था एवं हरित उद्योगवस्त्र एवं परिधानतथा कृषि आधारितखाद्य प्रसंस्करण एवं संबद्ध उद्योग शामिल हैं। हरियाणा की सुदृढ़ कृषिआधारित अर्थव्यवस्था तथा राज्य के आर्थिक विकास में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुएराज्य सरकार ने एमएसएमई नीति के पूरक के रूप में हरियाणा कृषिव्यवसाय एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति–2026 भी अधिसूचित की है।

एमएसएमई के समक्ष प्रारंभिक पूंजी निवेश की बाधा को दूर करने के उद्देश्य सेइस नीति के अंतर्गत नवप्रारंभ हरियाणा उद्यम विकास मिशन के माध्यम से हरियाणा आत्मनिर्भर टेक्सटाइल नीति के तहत सफलतापूर्वक लागू पूंजी निवेश सब्सिडी मॉडल का विस्तार किया गया है। पहली बारराज्य में चिन्हित प्राथमिकता प्राप्त (थ्रस्टक्षेत्रों के एमएसएमई एवं निर्यातकों को राज्यव्यापी समर्पित कार्यक्रम के अंतर्गत पूंजी निवेश सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्तनीति में वित्तीय प्रोत्साहनों का एक व्यापक पैकेज भी शामिल किया गया हैजिसमें ब्याज अनुदानस्टाम्प शुल्क की प्रतिपूर्तिरोजगार सृजन हेतु प्रोत्साहनबीमा सहायता तथा परीक्षणस्वचालन (ऑटोमेशन), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसएआईएवं अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडीको बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। एमएसएमई के लिए वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा मेंइस नीति में संस्थागत ऋण तक सुगम पहुँच सुनिश्चित करने तथा बिना जमानत (कोलेटरलफ्रीऋण उपलब्ध कराने को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य वेंचर कैपिटल फंड तथा क्षेत्रविशिष्ट क्रेडिट गारंटी फंड की स्थापना का भी प्रस्ताव किया गया है।

एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए विश्वस्तरीय अवसंरचना को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुएइस नीति में साझा औद्योगिक अवसंरचना के विकास के माध्यम से कारोबार करने की लागत को कम करने पर विशेष बल दिया गया है। हरियाणा क्लस्टर प्लग एंड प्ले योजना तथा हरियाणा एमएसई कॉमन फैसिलिटी सेंटर योजना की उल्लेखनीय सफलता के आधार परइन पहलों का व्यापक विस्तार किया गया हैताकि एमएसएमई को उच्च गुणवत्ता वाली साझा अवसंरचनाउन्नत मशीनरीपरीक्षण एवं डिजाइन सुविधाओं तथा अन्य साझा सेवाओं तक किफायती लागत पर पहुंच उपलब्ध हो सके। क्लस्टर आधारित विकास एवं संसाधनों के साझा उपयोग को बढ़ावा देकर यह नीति उत्पादकता में वृद्धिगुणवत्ता में सुधार तथा पूंजीगत एवं परिचालन लागत में कमी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती हैजिससे एमएसएमई अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

हरियाणा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात शक्ति के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से यह नीति देश के सर्वाधिक व्यापक एमएसएमई निर्यात संवर्धन ढांचों में से एक प्रस्तुत करती है। यह स्वीकार करते हुए कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केवल वित्तीय प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं हैंनीति में निर्यात के लिए तैयार उद्यमों का विकास करने हेतु एक समग्र (एंडटूएंडदृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके अंतर्गत उद्यमों की क्षमता का सुदृढ़ीकरणबाजार संबंधी जानकारी (मार्केट इंटेलिजेंसको सशक्त बनानाअंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच का विस्तार करना तथा वैश्विक व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना शामिल है। प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री प्रथम निर्यातक प्रोत्साहन योजना के माध्यम से विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ हीसभी श्रेणियों के निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणननिर्यात ऋणनिर्यात बीमामालभाड़ा सहायताकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। इन पहलों का उद्देश्य निर्यात करने वाले एमएसएमई की संख्या में वृद्धि करनानिर्यात बाजारों एवं उत्पादों में विविधता लाना तथा हरियाणा के उद्यमों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (ग्लोबल वैल्यू चेन्ससे और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना है।

इन वित्तीय प्रोत्साहनों के पूरक के रूप मेंनीति हरियाणा के एमएसएमई को वैश्विक बाजारों से जोड़ने हेतु एक सुदृढ़ संस्थागत तंत्र की स्थापना का प्रावधान करती है। हरियाणा निर्यात केंद्र एक वनस्टॉप एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर के रूप में कार्य करेगाजो निर्यात प्रलेखननियामकीय अनुपालनगुणवत्ता प्रमाणनलॉजिस्टिक्सबाजार संबंधी जानकारी तथा खरीदारों से संपर्क स्थापित करने सहित सभी आवश्यक सेवाओं के लिए समग्र सहायता प्रदान करेगा।

नीति के प्रमुख घटक उड़ान द्वार प्लेटफॉर्म को एमएसएमई के वैश्विक विकास के लिए एक वर्चुअल केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह मंच निर्यात के लिए खरीदारों एवं विक्रेताओं के मध्य संपर्क (एक्सपोर्ट मैचमेकिंग), अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ संयुक्त उपक्रमप्रौद्योगिकी साझेदारी तथा निवेशकों के साथ सहभागिता को सुगम बनाएगा। इसके अतिरिक्तरिवर्स बायरसेलर मीटराज्य सरकार के नेतृत्व में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रोड शोडिजिटल एमएसएमई पवेलियन तथा विक्रेता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक खरीदारोंएंकर उद्योगों तथा मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएमके साथ प्रत्यक्ष संपर्क को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे हरियाणा के एमएसएमई के लिए दीर्घकालिक बाजार अवसर उपलब्ध होंगे तथा वे घरेलू एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में और अधिक प्रभावी रूप से एकीकृत हो सकेंगे।

वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सतत विकास (सस्टेनेबिलिटीकी भूमिका निरंतर महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए यह नीति ऊर्जा दक्षतास्वच्छ उत्पादननवीकरणीय ऊर्जापरिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमीकी अवधारणा तथा पर्यावरणीय अनुपालन को बढ़ावा देकर हरियाणा के एमएसएमई के हरित परिवर्तन को गति प्रदान करती है। इसके अंतर्गत एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) तथा जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्रणालियों को अपनाने के लिए भी लक्षित सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्तसमर्पित हरित निवेश कोष (ग्रीन इन्वेस्टमेंट फंड) की स्थापना के माध्यम से सतत विनिर्माण एवं हरित नवाचार में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगाजिससे एमएसएमई वैश्विक स्तर पर विकसित हो रहे सतत विकास मानकों का अनुपालन करने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सक्षम होंगे।

नई नीति में समावेशी औद्योगिक विकास को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत महिला उद्यमियोंअनुसूचित जाति के उद्यमियोंदिव्यांगजनट्रांसजेंडर उद्यमियोंभूतपूर्व सैनिकोंअग्निवीरों तथा प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमियों के लिए लक्षित सहायता का प्रावधान किया गया है। क्लस्टर आधारित विकासउद्यमिता संवर्धनकौशल विकास तथा रोजगारसृजन आधारित प्रोत्साहनों के माध्यम से राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेशभर में एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना तथा यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक विकास का लाभ प्रत्येक क्षेत्र और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।

एमएसएमई क्षेत्र को समर्पित 60 परिवर्तनकारी पहलों के साथ हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति–2026 राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए एमएसएमई सुधारों के सबसे व्यापक कार्यक्रमों में से एक है। ये सभी पहलें सामूहिक रूप से निवेश को गति प्रदान करेंगीउद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ बनाएंगीगुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर सृजित करेंगीनिर्यात को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगी तथा सतत औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करेंगी। इसके माध्यम से विकसित भारत–2047 के विज़न के अनुरूप हरियाणा विनिर्माणनवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में भारत के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

 

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