कहा कि केवल हाईकोर्ट की निगरानी यां सीबीआई जांच से ही मामले की सच्चाई सामने आ सकती है
(पंजाब में शिक्षा क्षेत्र की बर्बादी में आम आदमी पार्टी सरकार की भूमिका दर्शाने वाले आंकड़े प्रस्तुत कर आप पार्टी की शिक्षा ‘‘ क्रांति’’ को उजागर किया)
यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अकाली दल के वरिष्ठ नेता सरदार परमबंस सिंह रोमाणा ने पत्रकारों को रिकवरी मेमो और एफआईआर का विवरण जारी करते हुए कहा,‘‘ इसका मतलब है कि आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान और मनीष सिसोदिया सहित उसके वरिष्ठ नेता एक झूठी कहानी गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं कि यह धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें स्कैनर पेन का इस्तेमाल करके पेपर को केंद्र से बाहर भेजा गया था और कोई पेपर लीक नही हुआ था। उन्होने कहा कि जब कोई स्कैनर पेन बरामद नही हुआ, तो इसका मतलब है कि पेपर लीक पहले से ही हो चुका था।’’
सरदार रोमाणा ने मामले को जोरदार ढ़ंग से पेश करते हुए कहा,‘‘ मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि अगर कुछ छात्रों के ब्लूटूथ उपकरणों के साथ पकड़े जाने का मुददा मीडिया में नही आया होता तो आम आदमी पार्टी सरकार इस मामले में केस दर्ज नही करती।’’ उन्होने कहा कि इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 19 जुलाई को सुबह 11 बजे छात्रों को ब्लूटूथ रिसीवर डिवाइस और मिनीएचर हेड फोन के साथ पकड़े जाने के बावजूद फरीदकोट पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में 15 घंटे लगा दिए थे। उन्होने आगे कहा,‘‘ विभिन्न केंद्र प्रमुखों की स्पष्ट शिकायतों के बावजूद इतनी देरी से एफआईआर दर्ज होने से संकेत मिलता है कि सरकार ने मामले को दबाने की पूरी कोशिश की।’’
अकाली नेता ने जोर देकर कहा कि मामला जितना दिखाई दे रहा है उससे कहीं अधिक पेचीदा है और केवल हाईकोर्ट की निगरानी वाली जांच यां सीबीआई जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है। उन्होने कहा,‘‘ एक ऐसे केंद्र का मामला है जिसमें एक प्रिंसिपल ने अपने सभी रिश्तेदारों को परीक्षा डयूटी पर तैनात किया और यहां तक कि अन्य शिक्षकों के बजाय डीआईईटी के छात्रों को भी डयूटी पर लगाया। इससे साफ पता चलता है कि एक संगठित माफिया ने पेपर लीक किया था और यह सुनिश्चित करने की भी व्यवस्था की थी कि जिन छात्रों से उन्होने करोड़ों रूपये वसूले थे उन्हें प्रभावित होन वाले निरीक्षक , ब्लूटूथ रिसीवर और हेडफोन प्रदान किए थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी प्रश्नों को सही उत्तर दिया जा सके।’’
सरदार रोमाणा ने कहा कि हरजोत बैंस को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए और कहा,‘‘ आपके केंद्र और पंजाब के लिए दो अलग-अलग मापदंड नही होने चाहिए।’’ उन्होने हरजोत बैंस को यह दावा करते हुए अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि फार्मेसी का पेपर उनके विभाग के अधीन नही है। उन्होने कहा,‘‘ बैंस को पता होना चाहिए कि परीक्षा उनके स्कूलों में आयोजित की गई और सरकारी स्कूल के कर्मचारियों ने इसकी निगरानी की थी इसीलिए बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह दोनों को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।’’
आम आदमी पार्टी के कार्यकाल के दौरान शिक्षा क्षेत्र में आई गिरावट के बारे में बोलते हुए अकाली नेता ने कहा,‘‘ इस पाखंडी पार्टी ने इस क्षेत्र में क्रांति लाने की बात की थी। यह वास्तव में राज्य में अकाली दल की सरकार का कार्यकाल पूरा होने के ठीक बाद 2018 की तुलना में सरकारी स्कूलों में कक्षा 10वीं में 2.25 लाख छात्रों की संख्या में गिरावट आई है।’’ उन्होने कहा कि इसी तरह कक्षा 12वीं में 2018 की तुलना में ड्राॅप आउट दर उतनी ही हैरान करने वाली है, जो 2018 की तुलना में 1.20 लाख छात्रों तक पहुंच गई है। उन्होने कहा,‘‘ इसके अलावा पिछले चार सालों के दौरान 1762 सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया गया और एकल शिक्षकों वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर 2400 हो गई है। ये ऐसे सवाल हैं जिनका हरजोत बैंस और आम आदमी पार्टी को आरोप-प्रत्यारोप , झूठ और धोखो का सहारा लेने के बजाय जवाब देने चाहिए।’’
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