शुरुआती भारी गिरावट के बाद फ्लैट बंद हुए Sensex और निफ़्टी !
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 14 जुलाई, 2026 : US और Iran के बीच Strait of Hormuz में बढ़ते सैन्य टकराव और तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट (panic selling) फैल गई, जिससे सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा टूट गया। हालांकि, बाद में IT और अन्य सेक्टर्स में हुई रिकवरी (recovery) की बदौलत बाजार निचले स्तरों से वापस संभलने में कामयाब रहा और अंत में बिल्कुल सपाट (flat level) बंद हुआ।
कैसा रहा बाजार का क्लोजिंग स्टेटस ? (Closing Bell Figures)
कारोबारी सत्र के अंत में दोनों मुख्य सूचकांक मामूली बदलाव के साथ बंद हुए:
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BSE Sensex: शुरुआती गिरावट से उबरते हुए सेंसेक्स महज 47.04 अंक (0.06%) की बढ़त के साथ 77,616.40 के स्तर पर बंद हुआ।
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NSE Nifty 50: निफ्टी भी केवल 4.10 अंक (0.02%) की मामूली बढ़त लेकर 24,211.00 पर थमा।
क्यों मची थी बाजार में अफरा-तफरी ? (Key Triggers)
पश्चिम एशिया (West Asia) में अचानक भड़के विवाद ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है:
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Strait of Hormuz में सैन्य टकराव : अमेरिका द्वारा ईरानी सैन्य ठिकानों पर की गई एयरस्ट्राइक और ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद इस समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ गया है।
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कच्चे तेल में भारी उछाल (Crude Oil Surge) : Strait of Hormuz वैश्विक तेल सप्लाई का मुख्य रूट है. इस विवाद के कारण Brent Crude की कीमतें तेजी से बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं. तेल महंगा होने से भारत का व्यापार घाटा (trade deficit) बढ़ने का डर रहता है।
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डॉलर की मजबूती और कमजोर रुपया : जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने डॉलर को सुरक्षित मानकर निवेश किया, जिससे भारतीय रुपया लगातार कमजोर हुआ है।
किसने बाजार को संभाला और कौन डूबा? (Gainers & Losers)
शुरुआती गिरावट के बाद भारतीय आईटी (IT) कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने बाजार को सहारा दिया।
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टॉप गेनर्स (Top Gainers): TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज), Wipro, और Bajaj Auto के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
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टॉप लूजर्स (Top Losers): सरकारी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर्स, ऑयल एंड गैस और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा बिकवाली का दबाव रहा।
मार्केट एक्सपर्ट्स की राय (Expert View): बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव कम नहीं होता, तब तक भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव (volatility) जारी रहेगा. निवेशकों को इस समय आक्रामक ट्रेडिंग से बचकर केवल अच्छी और मजबूत कंपनियों (quality stocks) में ‘Buy on Dips’ यानी गिरावट पर खरीदारी करने की रणनीति अपनानी चाहिए।
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