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एकात्म मानववाद आज के विश्व के लिए मार्गदर्शक : राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया

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“एकात्म मानववाद” पर लोक भवन में विषयक बौद्धिक संगोष्ठी आयोजित की गई
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि “एकात्म मानववाद” केवल एक विचारधारा नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवन-पद्धति है जो आधुनिक विश्व की जटिल चुनौतियों का समग्र समाधान प्रस्तुत करती है। वे रविवार को पंजाब लोक भवन स्थित गुरु नानक देव भवन में आयोजित ‘एकात्म मानववाद (Integral Humanism)’ विषयक बौद्धिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने महान विचारक दीनदयाल उपाध्याय का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने 1960 के दशक में इस दर्शन को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया, जो भारतीय संस्कृति, वेदों, उपनिषदों और गीता की मूल भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद मनुष्य को केवल आर्थिक या सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वित रूप में देखता है।
कटारिया ने कहा कि यह दर्शन व्यक्ति (व्यष्टि), समाज (समष्टि), प्रकृति (सृष्टि) और परम सत्ता (परमेष्ठी) के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश देता है। उन्होंने जोर दिया कि व्यक्ति और समाज के बीच कोई संघर्ष नहीं, बल्कि परस्पर सहयोग और पूरकता का संबंध होना चाहिए।
पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज विश्व ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिसका प्रमुख कारण प्रकृति के प्रति शोषण की प्रवृत्ति है। उन्होंने “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” का उल्लेख करते हुए प्रकृति के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
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राज्यपाल ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “सरबत दा भला” और “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत” जैसे संदेश एकात्म मानववाद के मूल सिद्धांतों को ही प्रतिध्वनित करते हैं।
राज्यपाल ने “अंत्योदय” की अवधारणा को एकात्म मानववाद का प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही वास्तविक प्रगति का मापदंड है। उन्होंने कहा कि जब तक अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन नहीं मिलता, तब तक विकास अधूरा है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष ने एकात्म मानववाद की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. रेनू विग, उप कुलपति, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़; डॉ. धरिंदर तयाल, लेखक एवं सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक; तथा ललित शर्मा उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त, इस अवसर पर अन्य प्रमुख उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सरदार इकबाल सिंह लालपुरा, हरियाणा विधानसभा के पूर्व स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता, भाजपा चंडीगढ़ के अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा, डीजीपी चंडीगढ़ सागरप्रीत हुड्डा तथा क्षेत्र के अन्य प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक व्यक्तित्व भी शामिल रहे।
राज्यपाल ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “सरबत दा भला” और “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत” जैसे संदेश एकात्म मानववाद के मूल सिद्धांतों को ही प्रतिध्वनित करते हैं।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवाओं और बुद्धिजीवियों से आह्वान किया कि वे इस दर्शन को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने जीवन और व्यवहार में अपनाएं, ताकि एक समृद्ध, संतुलित और संवेदनशील “विकसित भारत” का निर्माण किया जा सके। उन्होंने “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के शांति मंत्र के साथ अपने विचारों का समापन किया।
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