मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 67,559 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 334 शोधार्थियों को पीएचडी प्रदान की गई।
राहुल गुप्ता
छत्रपति संभाजीनगर, 5 नवंबर। महाराष्ट्र के राज्यपाल और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि डिग्री विद्यार्थियों के लिए अवसरों के दरवाजे खोलती है, लेकिन अपनी क्षमता उन्हें खुद साबित करनी होती है। विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों की वास्तविक क्षमताओं को विकसित करने और उन्हें रोजगार के लिए तैयार करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
राज्यपाल बुधवार को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के 67वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। सूखे की स्थिति को देखते हुए समारोह सादगी से आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के नाट्यगृह में सुबह करीब 11:30 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ। इस अवसर पर कुल 67,559 विद्यार्थियों को डिग्री और 334 शोधार्थियों को पीएचडी प्रदान की गई।
डिग्री के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के जीवन के सबसे प्रतिष्ठित अवसरों में से एक है। यहां से डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी केवल ज्ञान के वाहक नहीं, बल्कि मूल्यों के उत्तराधिकारी और भविष्य के निर्माण में भागीदार नागरिक भी हैं।
उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम से जुड़े इस विश्वविद्यालय की डिग्री केवल शैक्षणिक योग्यता नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। विद्यार्थियों को सोचने, सवाल पूछने, लगातार सीखने, मानवीय गरिमा का सम्मान करने और समाज तथा राष्ट्र के विकास में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए।
डिग्री से आगे बढ़कर क्षमता विकास पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि योग्यता यह बताती है कि किसी व्यक्ति ने क्या पूरा किया है, जबकि शिक्षा यह बताती है कि वह क्या करने में सक्षम हुआ है। इसलिए विश्वविद्यालयों को डिग्री-केंद्रित व्यवस्था से आगे बढ़कर क्षमता-केंद्रित शिक्षा की ओर जाना होगा। कौशल आधारित शिक्षा को उच्च शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में विश्वविद्यालयों को बहुविषयक शिक्षा, नवाचार, कौशल विकास और शोध को बढ़ावा देना होगा। आज मानवता के सामने मौजूद चुनौतियां किसी एक विषय तक सीमित नहीं हैं। अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद और सहयोग से ही नए ज्ञान का निर्माण संभव है।
क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान पर हो शोध
राज्यपाल ने मराठवाड़ा को शोध और नवाचार की व्यापक संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का शोध तभी सामाजिक रूप से उपयोगी माना जाएगा, जब वह प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों की सीमाओं से बाहर निकलकर समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में योगदान देगा।
40 कंपनियों के साथ समझौते, 2,760 विद्यार्थियों को रोजगार
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय फुलारी ने कहा कि संस्थान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और सामाजिक प्रतिबद्धता की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। विश्वविद्यालय शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच साझेदारी मजबूत कर रहा है।
उन्होंने बताया कि मराठवाड़ा इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर चैंबर के सहयोग से 40 कंपनियों के साथ समझौते किए गए हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और उद्योग आधारित शिक्षा के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।
पिछले ढाई वर्षों में विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट सेल ने तीन बड़े रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रमों का आयोजन किया। इनमें कुल 130 कंपनियों ने हिस्सा लिया। 6,440 विद्यार्थियों ने साक्षात्कार दिए, जिनमें से 2,760 विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर मिले।
विद्यार्थी नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें
समारोह के मुख्य अतिथि मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी के कुलपति प्रो. अनिरुद्ध पंडित ने विद्यार्थियों को रोजगार के लिए जरूरी कौशल हासिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने का लक्ष्य नहीं रखना चाहिए, बल्कि नए विचारों के साथ उद्योग स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला भी बनना चाहिए।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालित तकनीक के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदल रहा है। विद्यार्थियों को इन तकनीकों को समझकर इनके साथ आगे बढ़ना चाहिए।
प्रो. पंडित ने विद्यार्थियों से असफलताओं से नहीं घबराने और उन्हें सीखने का अवसर मानने की अपील की। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और मुश्किलों का सामना करने की क्षमता जरूरी है। बदलते भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसलिए उन्हें अपने हर फैसले में ईमानदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता को महत्व देना चाहिए।
334 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि
इस वर्ष दीक्षांत समारोह में कुल 334 शोधार्थियों को पीएचडी प्रदान की गई। इनमें मानविकी संकाय के 131, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के 124, वाणिज्य एवं प्रबंधन के 31 और अंतरविषयक अध्ययन के 48 शोधार्थी शामिल हैं।
इसके अलावा अक्टूबर-नवंबर 2025 की परीक्षा के 10,331 और मार्च-अप्रैल 2026 की परीक्षा के 55,255 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। विश्वविद्यालय परिसर के 1,639 विद्यार्थियों को भी उपाधियां प्रदान की गईं। इस तरह कुल 67,559 विद्यार्थी दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वालों में शामिल रहे।
समारोह में राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, कुलपति डॉ. विजय फुलारी, प्र-कुलपति डॉ. प्रवीण वक्ते, कुलसचिव डॉ. संजय कावड़े, परीक्षा एवं मूल्यांकन मंडल के संचालक डॉ. बी.एन. डोले सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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