आरटीआई में खुलासा: 1.16 लाख शिकायतें डुप्लीकेट बताकर हटाईं, कई विभागों में कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 6 नवंबर। मुंबई में अवैध निर्माणों के खिलाफ बीएमसी की कार्रवाई की वास्तविक स्थिति आरटीआई से सामने आई है। मनपा की ऑनलाइन शिकायत प्रणाली पर पिछले 10 वर्षों में अवैध निर्माणों से संबंधित 2,14,917 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन इनमें से केवल 13,211 मामलों में ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी हो सकी। यानी कुल शिकायतों के मुकाबले महज 6.15 प्रतिशत मामलों में तोड़क कार्रवाई हुई। इन आंकड़ों ने अवैध निर्माणों पर नियंत्रण और मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
10 साल में दर्ज हुईं 2.14 लाख शिकायतें
बीएमसी ने नागरिकों को अवैध निर्माणों की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देने के लिए 1 मार्च 2016 को आरईटीएमएस ऑनलाइन प्रणाली शुरू की थी। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने मनपा के पूर्वी उपनगर स्थित अतिक्रमण एवं निष्कासन विभाग से इस संबंध में जानकारी मांगी थी।
26 अक्टूबर 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, कुल 2,14,917 शिकायतों में से 1,16,228 शिकायतों को डुप्लीकेट घोषित किया गया। इसके बाद वास्तविक शिकायतों की संख्या 98,689 रह गई। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों को डुप्लीकेट घोषित किए जाने के आधार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हजारों मामलों में कार्रवाई अब भी लंबित
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, बीएमसी ने 60,332 नोटिस तैयार किए, जिनमें से 57,521 नोटिस जारी किए गए। वहीं, 31,486 मामलों में कारण बताओ आदेश जारी हुए और 29,916 मामलों में ध्वस्तीकरण आवश्यक पाया गया। इसके बावजूद केवल 13,211 मामलों में ही तोड़क कार्रवाई पूरी हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, 15,318 मामलों में ध्वस्तीकरण की व्यवस्था करना बाकी है, जबकि 13,734 शिकायतें अब भी बंद होने की प्रतीक्षा में हैं। इससे स्पष्ट है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद बड़ी संख्या में मामले कार्रवाई की प्रक्रिया में अटके हुए हैं।
एल विभाग में सबसे ज्यादा शिकायतें
विभागवार आंकड़ों में एल विभाग सबसे आगे रहा। यहां 30,935 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन केवल 637 मामलों में तोड़क कार्रवाई की गई। इसी तरह के/पूर्व विभाग में 24,064 शिकायतों पर 1,325, एम/पूर्व विभाग में 14,510 शिकायतों पर महज 159 मामलों में कार्रवाई हुई।
पी/दक्षिण विभाग में 14,424 शिकायतों के मुकाबले 1,932 और के/पश्चिम विभाग में 11,433 शिकायतों के मुकाबले 1,683 मामलों में ध्वस्तीकरण किया गया।
आरटीआई कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देते। उन्होंने सवाल उठाया कि 1.16 लाख से अधिक शिकायतों को डुप्लीकेट घोषित करने के लिए आखिर कौन-से मानदंड अपनाए गए।
उन्होंने बोरीवली पूर्व स्थित बेस्ट बस डिपो के लिए आरक्षित भूखंड पर अवैध निर्माणों का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद ही प्रशासन ने कार्रवाई की। उन्होंने मनपा प्रशासन से शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता लाने और लंबित मामलों पर समयबद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।
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