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सुरजकुंड मेले की दुर्घटना पर मानव अधिकार आयोग सख्त, सुरक्षा मानकों पर जीरो टॉलरेंस की चेतावनी

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आवश्यक मूल तत्वों से समझौता करने वाला FAIR (मेला) नहीं, UNfair है 

मेला (FAIR) हर दृष्टि से निष्पक्ष (FAIR) ही होना चाहिए

न्यूज़म ब्यूरो

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चंडीगढ़, 19 फरवरी 2026 : हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2026, फरीदाबाद में 7 फरवरी 2026 को घटित झूला दुर्घटना के संबंध में दिनांक 08.02.2026 के एक समाचार रिपोर्ट, शीर्षक “Swing crashes at Surajkund fair, 13 injured; cop dies in rescue bid” प्रकाशित समाचार का स्वतः संज्ञान लिया है। उक्त दुर्घटना में बचाव कार्य के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस निरीक्षक जगदीश प्रसाद की दुखद मृत्यु हो गई तथा कई नागरिक घायल हुए। आयोग ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की हैं। 

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया को मिलाकर बने पूर्ण आयोग का मानना है कि सुरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला एक वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित सांस्कृतिक उत्सव है, जो भारत की समृद्ध विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक कला, संगीत एवं विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का उत्सव मनाता है तथा देश-विदेश के कारीगरों और शिल्पकारों की आजीविका और गरिमा को प्रोत्साहित करता है। यह मेला सांस्कृतिक सहभागिता, समानता, भेदभाव-रहित वातावरण तथा गरिमापूर्ण जीवन के मूल मानवाधिकार मूल्यों को मूर्त रूप देता है। सांस्कृतिक समावेशन, कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के माध्यम से यह मेला मानवाधिकारों की भावना को सुदृढ़ करता है, जहाँ संस्कृति, सृजनशीलता और मानव गरिमा एक न्यायपूर्ण समाज के अभिन्न स्तंभ हैं। 

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, घटना दिनांक 07.02.2026 को सायं लगभग 6:30 बजे हुई, जब “Tsunami Ride” नामक विद्युत संचालित झूला लगभग 26 व्यक्तियों के साथ पूर्ण क्षमता पर संचालित होते हुए अचानक टूट कर गिर गया|  इस दुर्घटना से मेले में भगदड़ मच गई, कई लोग झूले में फंस गए तथा कुछ जमीन पर गिरकर घायल हो गए। कुल 13 व्यक्तियों के घायल होने की
सूचना मिली, जिन्हें सुप्रीम हॉस्पिटल एवं बी.के. सिविल हॉस्पिटल, फरीदाबाद में भर्ती कराया गया। बचाव कार्य के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस निरीक्षक जगदीश प्रसाद पीड़ितों की सहायता हेतु दौड़े, किंतु झूले का एक और भाग गिरने से वे उसके नीचे दब गए और उन्हें बचाव कार्य के दौरान उन्हें घातक चोटें आईं जिससे उनकी मृत्यु हो गई |

 
उक्त दुर्भाग्यपूर्ण दिन आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया एवं रजिस्ट्रार (न्यायिक) संजय कुमार खंडूजा स्वयं भी सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में हरियाणा मानव अधिकार आयोग के  जागरूकता शिविर के संबंध में मेले में उपस्थित थे, जहाँ अनेक सुरक्षा संबंधी घटनाएँ देखी गईं। फूड कोर्ट क्षेत्र के निकट तेज हवाओं के कारण एक अस्थायी प्रवेश द्वार गिर गया, जिससे 2-3 व्यक्ति घायल हुए। यह घटना मेले में स्थापित अस्थायी ढाँचों की असुरक्षित स्थिति को दर्शाती है। उसी समय गेट नंबर 2 के समीप, जो आयोग के जागरूकता शिविर के पास स्थित था, एक अस्थायी गेट असंतुलित होकर पास के स्टॉलों की ओर खतरनाक ढंग से झुक गया था। संभावित दुर्घटना को देखते हुए अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा एवं दोनों सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से पुलिस निरीक्षक जगदीश चंद्र, नंबर IRB 19, द्वितीय IRB टुंडलका, नूंह (मेला ड्यूटी) से संपर्क किया। उनके त्वरित हस्तक्षेप से लगभग आधे घंटे में उक्त गेट हटा दिया गया,
जिससे संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। 

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने मेले में सामने आई व्यवस्थागत खामियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मेले में लगाए गए अधिकांश ढाँचे-जैसे प्रवेश द्वार, स्टॉल और मनोरंजन झूले-अस्थायी एवं कमजोर प्रकृति के थे। इन संरचनाओं की स्थापना के दौरान वायु वेग, संरचनात्मक स्थिरता तथा भार वहन क्षमता जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया, जो योजना निर्माण और नियामक निगरानी में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।अभिलेखों में ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह सिद्ध हो सके कि मेले के उद्घाटन से पूर्व किसी सक्षम एवं योग्य तकनीकी समिति द्वारा इन अस्थायी ढाँचों की संरचनात्मक और विद्युत सुरक्षा की समग्र जांच की गई हो।

अनिवार्य निरीक्षण और प्रमाणन की अनुपस्थिति को आयोग ने गंभीर प्रशासनिक चूक और लापरवाही करार दिया है। इसके अतिरिक्त, आयोग के संज्ञान में यह भी आया कि मेले जैसे बड़े
सार्वजनिक आयोजन में अपेक्षित स्तर पर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल, प्रशिक्षित बचावकर्मी तथा समुचित चिकित्सा इकाइयों की स्पष्ट और पर्याप्त तैनाती नहीं थी। भारी भीड़ वाले आयोजनों में आपदा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था का अभाव किसी भी दुर्घटना की स्थिति में नुकसान को और बढ़ा सकता है। मेले परिसर के मार्गों की सतह भी कई स्थानों पर असमान और अव्यवस्थित पाई गई, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और दिव्यांगजनों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। 

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने इसे समावेशन, सुगमता और मानव गरिमा के सिद्धांतों के विपरीत बताया है।जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग का मत है कि उपर्युक्त परिस्थितियाँ भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन, सुरक्षा और मानव गरिमा के मौलिक अधिकार के संभावित उल्लंघन की ओर संकेत करती हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों के आयोजकों और संबंधित प्राधिकरणों का यह संवैधानिक एवं विधिक दायित्व है कि वे सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त न किया जाए। 

आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि किसी भी “मेले” का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब वह हर दृष्टि से निष्पक्ष (फेयर) हो। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि “मेला हर दृष्टिकोण से फेयर होना चाहिए”, अर्थात सांस्कृतिक उत्सव, आर्थिक गतिविधि और मनोरंजन के साथ-साथ सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही, सुगमता और मानव गरिमा को समान महत्व दिया जाना अनिवार्य है। यदि किसी आयोजन में सुरक्षा मानकों की उपेक्षा की जाती है या आगंतुकों के जीवन और स्वास्थ्य को जोखिम में डाला जाता है, तो वह आयोजन अपने उद्देश्य से भटक जाता है और जनसाधारण के प्रति “अनफेयर” सिद्ध होता है। आयोग का मत है कि उत्सव का आनंद तभी सार्थक है, जब वह सुरक्षित वातावरण में हो तथा प्रत्येक व्यक्ति — विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और दिव्यांगजनों — की सुविधा और सम्मान सुनिश्चित हो। 

सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले जैसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग ने राज्य सरकार एवं संबंधित प्राधिकरणों को निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं- 

 सार्वजनिक सुरक्षा पर शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाए।
 किसी भी मेला, उत्सव या बड़े सार्वजनिक आयोजन को बहु-विषयक तकनीकी समिति (संरचनात्मक अभियंता, विद्युत सुरक्षा विशेषज्ञ, अग्निशमन अधिकारी एवं आपदा प्रबंधन अधिकारी) के पूर्व प्रमाणन के बिना प्रारंभ न किया जाए।
 सभी झूलों, गेटों, स्टॉलों एवं अस्थायी संरचनाओं का अनिवार्य तृतीय-पक्ष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।

 आयोजन स्थल पर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल, एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन, प्राथमिक उपचार केंद्र एवं प्रशिक्षित बचावकर्मी पर्याप्त संख्या में तैनात किए जाएँ।
 मौसम संबंधी जोखिम आकलन सुनिश्चित किया जाए तथा तेज हवा या प्रतिकूल परिस्थितियों में संचालन तत्काल स्थगित करने की व्यवस्था हो।
 मेले/आयोजन स्थल के मार्गों को समतल, सुरक्षित एवं दिव्यांग-अनुकूल बनाया जाए।
 सभी निकासी मार्ग (एग्जिट रूट) स्पष्ट रूप से चिह्नित और बाधा-रहित हों।
 सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में आयोजकों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और गंभीर आरोपों को देखते हुए, हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने संबंधित प्राधिकारियों से विस्तृत प्रतिवेदन तलब किए हैं। उपायुक्त, फरीदाबाद को निर्देश दिया गया है कि वे चार सप्ताह के भीतर घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें जांच समिति के निष्कर्ष, दर्ज प्राथमिकी की वर्तमान स्थिति
तथा उत्तरदायी व्यक्तियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का संपूर्ण विवरण शामिल हो। पुलिस महानिदेशक, हरियाणा पुलिस, पंचकूला से पुलिस निरीक्षक जगदीश प्रसाद की मृत्यु की परिस्थितियों, उनके आश्रितों को दी गई अथवा प्रस्तावित क्षतिपूर्ति तथा बड़े सार्वजनिक आयोजनों में तैनात पुलिस कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अपनाए गए उपायों पर रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही,
आयोग ने यह भी कहा है कि जनहित में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले पुलिस निरीक्षक को मरणोपरांत सम्मान प्रदान किए जाने पर विचार किया जाए।

इसके अतिरिक्त, आयुक्त एवं सचिव, हरियाणा सरकार, विरासत एवं पर्यटन विभाग तथा उपाध्यक्ष, सुरजकुंड मेला प्राधिकरण, चंडीगढ़ से मेले एवं मनोरंजन झूलों के लिए वर्तमान सुरक्षा दिशानिर्देशों तथा उनके सुदृढ़ीकरण हेतु प्रस्तावित कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। मुख्य विद्युत निरीक्षक, हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ से संबंधित झूले एवं मेले में विद्युत सुरक्षा अनुपालन की स्थिति पर प्रतिवेदन मांगा गया है। आयोग ने राज्य सरकार को भी व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार अथवा संशोधित करने पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। सभी संबंधित प्राधिकरणों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने प्रतिवेदन अगली सुनवाई की तिथि से कम से कम एक सप्ताह पूर्व प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 07 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

 

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