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हरियाणा में एचपीवी टीकाकरण अभियान तेज, 13500 से अधिक किशोरियों का टीकाकरण

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सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में बड़ा कदम 

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 23 अप्रैल। हरियाणा सरकार ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आज यहां राज्य स्तरीय संचालन समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए टीकाकरण अभियान के विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में 14-15 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 2.26 लाख किशोरियों को कवर करने के लिए 2.28 लाख वैक्सीन डोज की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि गत 22 अप्रैल तक राज्य में 13,500 से अधिक किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन दी जा चुकी है, जिनमें से 561 को अभियान के पहले दिन ही टीका लगाया गया।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि हरियाणा की सिंगल-डोज टीकाकरण रणनीति भविष्य में इस बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया, रेडियो, प्रिंट मीडिया और सामुदायिक मंचों के माध्यम से जागरूकता अभियान बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि वैक्सीन के बारे में किसी भी प्रकार की भ्रांतियों को दूर कर लोगों का विश्वास बढ़ाया जा सके।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हुए उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे वरिष्ठ डॉक्टरों, समुदाय के मौजिज लोगों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को चाहिए कि वह स्कूल प्राचार्यों के साथ समन्वय स्थापित कर अभिभावकों को प्रेरित करे और टीकाकरण के लिए छात्राओं को निकटतम स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचाने की व्यवस्था भी करे।

गौरतलब है कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) एक सामान्य संक्रमण है, जो महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के निचले हिस्से का कैंसर) के लगभग 99.7 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। एचपीवी वैक्सीन इस संक्रमण से बचाव करती है और भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम करती है। भारत में महिलाओं में यह दूसरा सबसे आम कैंसर है और टीकाकरण इसके खिलाफ एक प्रभावी रोकथाम उपाय माना जाता है। यह वैक्सीन सुरक्षित व प्रभावी है और केन्द्र सरकार द्वारा वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद अनुमोदित की गई है। विश्व के 160 से अधिक देशों में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों के तहत यह वैक्सीन लगाई जा रही है।

प्रदेश में टीकाकरण प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा चिकित्सकीय निगरानी में किया जा रहा है। वैक्सीन के दुष्प्रभाव सामान्यतः बहुत मामूली होते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, बुखार या शरीर में दर्द। इन प्रभावों को डॉक्टर की सलाह अनुसार पैरासिटामोल से आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। टीकाकरण के बाद किशोरियों का ध्यान रखने के लिए राज्य स्तरीय एडवर्स इवेंट्स फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) कमेटी को सक्रिय किया गया है, जो किसी भी प्रतिकूल घटना की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगी।

बैठक में बताया गया कि यह टीकाकरण अभियान डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। लाभार्थियों का पंजीकरण यू-विन प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है, जो स्वतः टीकाकरण प्रमाणपत्र भी जारी करता है। जिला एवं ब्लॉक स्तर पर चिकित्सा अधिकारियों, वैक्सीनेटरों और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण और अन्त्योदय (सेवा) विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जी. अनुपमा, विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, श्रम तथा युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ रिपुदमन सिंह ढिल्लों, सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक वर्षा खांगवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजदू रहे। जिलों से उपायुक्त, सिविल सर्जन, जिला शिक्षा अधिकारी तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) और फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (एफओजीएसआई) के प्रतिनिधि वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

 

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