2011 के चर्चित दोहरे हत्याकांड में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपीलों पर फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी की हत्या की सजा बरकरार रखते हुए उसे उम्रकैद से घटाकर 20 साल किया गया, जबकि दो अन्य आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 5 नवंबर। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2011 के केनन-रूबेन हत्याकांड में गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने मुख्य आरोपी जितेंद्र फकीरचंद राणा की हत्या के मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन उसकी उम्र और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सजा को 20 साल के कठोर कारावास में बदल दिया। वहीं, मामले के दो अन्य आरोपियों सुनील ओमप्रकाश बोथ उर्फ छोटा और दीपक ईश्वर ओमप्रकाश पिवाल को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों की ओर से मई 2016 में सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। सत्र अदालत ने तीनों को हत्या के मामले में दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
मुख्य आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार
हाईकोर्ट ने जितेंद्र फकीरचंद राणा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी मानने का फैसला बरकरार रखा। हालांकि अदालत ने उसकी उम्र और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए सजा में बदलाव किया। अब उसे बिना वैधानिक छूट के 20 साल का कठोर कारावास भुगतना होगा।
दूसरी ओर, सुनील बोथ और दीपक पिवाल को हत्या के आरोप से राहत दी गई। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ हत्या के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं मिली। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है। हत्या के अलावा अन्य आरोपों में उनकी दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी गई है।
क्या हुआ था अक्टूबर 2011 में
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, अक्टूबर 2011 में केनन सैंटोस, रूबेन फर्नांडिस और उनके कुछ दोस्त अंधेरी के अंबोली इलाके में एक रेस्तरां से बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद चार लोगों ने उनके साथ गई एक युवती पर अश्लील टिप्पणियां कीं और कथित तौर पर उसके साथ अनुचित व्यवहार किया।
इस पर केनन ने विरोध किया और मुख्य आरोपी जितेंद्र राणा को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि चारों आरोपी वहां से चले गए, लेकिन कुछ देर बाद लौटकर उन्होंने केनन और रूबेन के समूह पर हमला कर दिया।
हमले में दोनों युवकों की हुई थी मौत
अभियोजन के अनुसार, आरोपी चाकू, क्रिकेट स्टंप और बांस की छड़ी लेकर लौटे थे। हमले में केनन सैंटोस के पेट में चाकू लगा और उसी रात उसकी मौत हो गई। रूबेन फर्नांडिस गंभीर रूप से घायल हुए और 31 अक्टूबर 2011 को उनकी भी मौत हो गई।
इस मामले में डीएन नगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। मई 2016 में सत्र अदालत ने चार आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराया था। अपील लंबित रहने के दौरान चौथे आरोपी सतीश नाफेसिंग दुलगज की मौत हो गई थी। हाईकोर्ट के गुरुवार के फैसले ने इस लंबे समय से चल रहे मामले में आरोपियों की सजा और दोषसिद्धि की स्थिति बदल दी है।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।
