Follow

हरजिंदर सिंह धामी कहते हैं कि उन्हें अकाली दल का सिपाही होने पर गर्व है, जबकि उन्हें गुरु साहिब का सिपाही होना चाहिए : बलतेज पन्नू

Listen to this article

शिरोमणि कमेटी कानून से ऊपर होने का दावा नहीं कर सकती, जब इन्हें सही लगे तो एफआईआर मंजूर हो जाती हैं, लेकिन जवाबदेही के वक्त नहीं : बलतेज पन्नू  

हरजिंदर सिंह धामी बेअदबी और लापता सरूपों से जुड़ी छुपाई गई डायरी का खुलासा करें; सच को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता : बलतेज पन्नू

 बलतेज पन्नू के हरजिंदर सिंह धामी से सवाल

Advertisement

 एस.एस. कोहली को बचाने की कोशिशें क्यों की जा रही हैं और शिरोमणि कमेटी गुरु की गोलक से लिए गए पैसे वापस लेने में क्यों नाकाम रही?

 हरजिंदर सिंह धामी बेअदबी के मामलों और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 लापता सरूपों के विवरण वाली अपनी डायरी क्यों छुपा रहे हैं?

 शिरोमणि कमेटी 328 लापता सरूपों का पता लगाने में क्यों असफल रही और ईशर सिंह रिपोर्ट में स्पष्ट निर्देशों के बावजूद दोषियों के इस्तीफे क्यों स्वीकार किए गए?

 श्री अकाल तख्त साहिब के जथेदार द्वारा आदेश दिए गए शिरोमणि कमेटी के 'फ्री-टू-एयर' गुरबाणी चैनल का क्या हुआ?

 

चंडीगढ़, 4 जनवरी 2025 : आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने रविवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी पर तीखा हमला किया। उन्होंने धामी पर इंसाफ, सच और गुरु साहिब के साथ खड़े होने की बजाय शिरोमणि अकाली दल (बादल) के प्रवक्ता के रूप में काम करने का आरोप लगाया।

एक दिन पहले चंडीगढ़ में हरजिंदर सिंह धामी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का जवाब देते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि धामी ने दावा किया था कि वे मीडिया के जरिए अपना पक्ष लोगों के सामने रखना चाहते हैं। पन्नू ने टिप्पणी की कि धामी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का निमंत्रण एक राजनीतिक पार्टी, शिरोमणि अकाली दल (बादल) की ओर से जारी किया गया था। धामी साहब अक्सर कहते हैं कि उन पर शिरोमणि अकाली दल (बादल) के प्रवक्ता होने के आरोप लगते हैं। कल उन्होंने खुद माना कि उन्हें अकाली दल का सिपाही होने पर गर्व है। अच्छा होता अगर वे गुरु साहिब के सिपाही होते। 

हरजिंदर सिंह धामी के इस दावे पर कड़ा एतराज जताते हुए कि शिरोमणि कमेटी एफआईआर को स्वीकार नहीं करती और उसे पुलिस की जरूरत नहीं है, पन्नू ने कहा कि यह पूरी तरह गुमराह करने वाली बात है। उन्होंने सवाल किया, ” शिरोमणि कमेटी खुद एक एक्ट के तहत बनी है, जो कि एक कानून है। जब भी शिरोमणि कमेटी अमृतसर में अपना जनरल हाउस बुलाती है, तो वह डिप्टी कमिश्नर से इजाजत लेती है। आप कैसे कह सकते हैं कि आप एफआईआर या पुलिस में विश्वास नहीं करते?” 

बलतेज पन्नू ने कई ऐसे मौकों का हवाला दिया जहां शिरोमणि कमेटी ने खुद पुलिस से संपर्क किया था। उन्होंने शिरोमणि कमेटी के पूर्व सचिव द्वारा टेक सिंह धनौला (जो आज जथेदार के रूप में नियुक्त हैं) के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “धारा 420 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी और गिरफ्तारी भी हुई थी। इसलिए जब शिरोमणि कमेटी को जरूरत होती है, तो एफआईआर स्वीकार होती है।  

बेअदबी के मुद्दे पर बलतेज पन्नू ने याद दिलाया कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह ने हाल ही में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव पहले ही पंजाब विधानसभा के सामने आ चुका है। एक कमेटी बनाई गई है, सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें हुई हैं, और एक सख्त राज्य कानून बनाने के लिए सुझाव इकट्ठे किए जा रहे हैं ताकि किसी की ऐसा अपराध करने की हिम्मत न पड़े। 

आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने पुराने आरोपों का हवाला देकर पुलिस पर शक पैदा करने की धामी की कोशिश को भी खारिज कर दिया। पत्रकारिता में अपने दो दशकों के अनुभव का हवाला देते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि अगर हम 1996 में पीछे जाएं, तो प्रकाश सिंह बादल ने बार-बार ट्रुथ कमीशन बनाने की बात की थी। लेकिन जब 1997 से 2002 और फिर 2007 से 2017 तक अकाली सरकारें रहीं, तो उन अफसरों को किसने तरक्की दी जिन पर नौजवानों पर अत्याचार के आरोप थे? सुमेध सैनी को डीजीपी किसने बनाया? मुहम्मद इजहार आलम को किसने प्रोत्साहित किया? उनके परिवार को राजनीति में कौन लाया? धामी साहब शायद यह सब भूल गए हैं। 

उन्होंने कहा कि असली सवाल जिससे हरजिंदर सिंह धामी बच रहे हैं, वह सीधा और अटल है: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 लापता सरूप कहां हैं, जिनका शिरोमणि कमेटी आज तक पता लगाने में असफल रही है।  

ईशर सिंह रिपोर्ट का हवाला देते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था कि दोषियों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि इस्तीफों का इस्तेमाल जिम्मेदारी से बचने और निचले अधिकारियों पर दोष मढ़ने के लिए किया जाएगा। पन्नू ने इशारा किया कि इसके बावजूद धामी साहब ने रूप सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इतना ही नहीं, उनके बकाए निपटा दिए गए और उन्हें विदेश भेज दिया गया। यह सब अपने लोगों को बचाने के लिए किया गया था।  

बलतेज पन्नू ने आगे दावा किया कि जब एस.एस. कोहली का नाम सामने आया, तो हरजिंदर सिंह धामी की पार्टी से जुड़े एक न्यूज चैनल ने खबर को दबा दिया ताकि सच्चाई सामने न आ सके। उन्होंने कहा कि शायद एस.एस. कोहली बड़े रहस्यों पर बैठे हैं। अब SIT उन रहस्यों को बेनकाब करेगी। 

उन्होंने कहा कि ईशर सिंह रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया था कि 75% भुगतान एस.एस. कोहली से वसूला जाना चाहिए, फिर भी पिछले पांच सालों में कुछ नहीं हुआ। पन्नू ने कहा कि आप कहते हैं कि मामला सिख जुडीशियल गुरुद्वारा कमीशन के पास है। उस कमीशन ने पांच सालों में क्या किया है? जवाब स्पष्ट है, क्योंकि आपकी पार्टी के करीबी लोग वहां बैठे हैं। कमीशन का मुखिया आपकी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता के पिता हैं। 

बलतेज पन्नू ने पूछा कि शिरोमणि कमेटी पांच साल तक गुरु की गोलक से लिए गए पैसे वापस लेने में कैसे असफल रही। उन्होंने पूछा कि लगभग 10 करोड़ रुपए कोहली के पास गए, जिसमें से 7.5 करोड़ रुपए वसूल किए जाने थे। यह क्यों नहीं किया गया?  

बलतेज पन्नू ने याद दिलाया कि जब 1 जून 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला में सरूप चोरी हुए थे और जब नवंबर में बेअदबी की घटनाएं हुई थीं, तो शिरोमणि कमेटी प्रभावशाली कार्रवाई करने में असफल रही थी। उन्होंने सवाल किया कि पोस्टर लगाए गए थे, लेकिन क्या ठोस कदम उठाए गए? किस शिरोमणि कमेटी पुलिस' ने दोषियों को गिरफ्तार किया या एफआईआर दर्ज की, जब आप दावा करते हैं कि आपको पुलिस की जरूरत नहीं है?

उन्होंने कोटकपूरा गोलीकांड का भी जिक्र किया, जहां इंसाफ की मांग कर रहे श्रद्धालुओं पर पानी की बौछारें और गोलियां चलाई गईं। पन्नू ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थीं। उन्हें हाई कोर्ट से जमानत लेनी पड़ी थी। कानून से ऊपर होने का दावा करने की यह असलियत है।

 

What are your Feelings
Advertisement
Tap to Refresh