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पंजाब लोक भवन कर्मचारियों के मेधावी बच्चों को राज्यपाल ने किया सम्मानित

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न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने अपनी धर्मपत्नी अनीता कटारिया के साथ पंजाब लोक भवन के गुरु नानक ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में पंजाब लोक भवन कर्मचारियों के मेधावी बच्चों को शिक्षा, खेल तथा अन्य क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और उनकी मेहनत को मान्यता देने के लिए राज्यपाल के विवेकाधीन कोष से उपलब्धि प्रमाण-पत्र एवं नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार का सम्मान बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाता है और उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और खेल दोनों ही युवाओं के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल गतिविधियाँ युवाओं को नशे से दूर रखने में सहायक होती हैं।
इस पहल के तहत 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले कक्षा 10 के 11 विद्यार्थियों को ₹11,000-₹11,000 तथा कक्षा 12 के 3 विद्यार्थियों को ₹21,000-₹21,000 की राशि प्रदान की गई। नीट/जेईई की तैयारी कर रहे 6 विद्यार्थियों को कोचिंग फीस का 30 प्रतिशत अनुदान दिया गया, जिसकी कुल राशि ₹1,63,200 रही। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत 21 विद्यार्थियों को उनकी वार्षिक फीस का 30 प्रतिशत सहायता प्रदान की गई, जिसकी कुल राशि ₹6,25,900 रही। उच्च शिक्षा के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे एक विद्यार्थी को ₹10,900 की सहायता भी दी गई।
खेल श्रेणी में 7 विद्यार्थियों को कुल ₹41,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई, जबकि राज्य स्तर पर चयनित विद्यार्थियों, स्कूल स्तर पर पदक विजेताओं तथा ग्रुप-ए अधिकारियों के दो बच्चों को उनके उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए अतिरिक्त प्रमाण-पत्र दिए गए। कुल मिलाकर ₹10.25 लाख की वित्तीय सहायता के साथ 25 प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
पिछले वर्ष (2024-25) भी इसी प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी। उस दौरान कक्षा 10 और 12 के 16 मेधावी विद्यार्थियों को क्रमशः ₹11,000 और ₹21,000 की राशि दी गई थी। इसके अतिरिक्त नीट/जेईई अभ्यर्थियों, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को भी सहायता प्रदान की गई थी, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और परिवारों पर वित्तीय बोझ कम करना था।
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