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आरएसएस से राष्ट्रनायक तक : संगठननिष्ठा, गठबंधन-साधना और अटल बिहारी वाजपेयी का स्वर्णिम नेतृत्व

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भारतीय जनता पार्टी का एक सक्रिय एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता होने के नाते, मैंने अपने लगभग तीन दशक लंबे राजनीतिक सफर को सत्ता की सीढ़ी नहीं, बल्कि संगठन, विचार और राष्ट्रसेवा की साधना के रूप में जिया है। इस साधना का सर्वोच्च आदर्श श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी हैं। वे केवल प्रधानमंत्री या जनप्रिय नेता नहीं थे, बल्कि संगठननिष्ठा, वैचारिक स्पष्टता और राष्ट्रीय सहमति से शासन चलाने वाले युगद्रष्टा राजनेता थे।
 
संगठन के प्रति आजीवन समर्पण : सत्ता से ऊपर संगठन
अटल जी के जीवन का मूल मंत्र था—
“व्यक्ति नहीं, संगठन बड़ा होता है।”
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी—तीनों में संगठनात्मक अनुशासन, मर्यादा और समर्पण को सर्वोच्च स्थान दिया। सत्ता में रहते हुए भी उनका सीधा संवाद कार्यकर्ता, मंडल, जिला और प्रदेश संगठन से बना रहा। यही कारण था कि उनके नेतृत्व में संगठन कभी सत्ता से अलग नहीं हुआ।
 
जनसंघ से भाजपा तक : संगठन को विचारधारा से जोड़ना
अटल जी ने संगठन को केवल चुनाव जीतने की मशीन नहीं बनने दिया।
राम मंदिर, धारा 370 की समाप्ति, समान आचार संहिता, राष्ट्र की अखंडता और सांस्कृतिक चेतना—इन मुद्दों को उन्होंने संगठन के प्रत्येक कार्यकर्ता के अंतर्मन में वैचारिक प्रतिबद्धता के रूप में स्थापित किया। यही वैचारिक नींव आगे चलकर भाजपा की पहचान बनी।
 
कवि-हृदय नेता : विचारों की कविता, राजनीति की मर्यादा
अटल बिहारी वाजपेयी केवल राजनेता नहीं, बल्कि संवेदनशील कवि और विचारशील दार्शनिक भी थे। राजनीति की कठोरता के बीच उनकी कविता मानवीय चेतना की आवाज थी। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ—
“हार नहीं मानूंगा,
रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पर
लिखता-मिटाता हूँ,
गीत नया गाता हूँ।”
यह कविता केवल साहित्य नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक जीवन का संकल्प-पत्र थी—संघर्ष में धैर्य, असफलता में आशा और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा।
 
गठबंधन राजनीति में अटल जी की अद्वितीय भूमिका
अटल बिहारी वाजपेयी जी भारतीय राजनीति के सबसे सफल गठबंधन नेतृत्वकर्ता रहे।
उन्होंने 26 दलों को साथ लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का नेतृत्व किया। यह उपलब्धि केवल राजनीतिक गणित से नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद, सम्मान और समन्वय से संभव हुई।
 
26 दलों का विश्वास : अटल जी की सर्वस्वीकार्यता
भिन्न विचारधाराओं, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और सामाजिक पृष्ठभूमियों वाले 26 दलों को एक सूत्र में पिरोना असाधारण नेतृत्व क्षमता का प्रमाण था।
अटल जी न किसी पर हावी हुए, न किसी की उपेक्षा की। यही कारण था कि एनडीए सरकार स्थिर भी रही और प्रभावी भी।
 
गठबंधन में भी निर्णायक शासन : भ्रांति का अंत
अटल जी ने यह मिथक तोड़ा कि गठबंधन सरकार निर्णय नहीं ले सकती।
उनके नेतृत्व में—
पोखरण परमाणु परीक्षण
स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना
ग्रामीण सड़क योजना
दूरसंचार क्रांति
आर्थिक सुधार
जैसे साहसिक और दूरदर्शी निर्णय लिए गए, जिन्होंने भारत के भविष्य की दिशा तय की।
 
पोखरण के बाद अटल जी का स्पष्ट संदेश : भारत सम्पूर्ण राष्ट्र है
पोखरण परमाणु परीक्षण के पश्चात प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अमेरिका और यूरोपीय देशों को दो-टूक शब्दों में कहा—
भारत सम्पूर्ण, स्वाभिमानी और संप्रभु राष्ट्र है।
भारत की अस्मिता और प्रभुसत्ता में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा। राष्ट्रहित में लिए गए निर्णयों पर कोई बाहरी दबाव मंजूर नहीं।
 
शक्ति और शांति का संतुलन : अटल नेतृत्व की विशिष्टता
एक ओर भारत को परमाणु शक्ति बनाना, दूसरी ओर लाहौर बस यात्रा—
यह संतुलन केवल अटल जी जैसा दूरदर्शी और संवेदनशील नेता ही साध सकता था। उन्होंने शक्ति को अहंकार नहीं बनने दिया और शांति को कमजोरी नहीं।
 
संगठन, सरकार और सहयोगी दलों के बीच संतुलन
अटल जी की सबसे बड़ी विशेषता थी—संतुलन।
संगठन की अपेक्षाएँ
सहयोगी दलों की संवेदनाएँ
और राष्ट्रहित
इन तीनों को साधकर उन्होंने सरकार चलाई। यही कारण है कि एनडीए सरकार ने अपना कार्यकाल पूरी गरिमा और स्थिरता के साथ पूरा किया।
 
भारत : भूगोल नहीं, जीवंत राष्ट्र-चेतना
अटल जी का स्पष्ट विचार था—
“भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण राष्ट्र है।”
उनके अनुसार भारत संस्कृति, संस्कार और चेतना की सतत धारा है। विविधता हमारी शक्ति है और राष्ट्रीय एकता हमारा संकल्प। भारत की आत्मा उसकी लोकतांत्रिक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा में बसती है।
 
शालीनता और सहमति की राजनीति
आज जब राजनीति में कटुता बढ़ी है, अटल जी की शैली और अधिक प्रासंगिक हो जाती है।
विरोधियों का सम्मान, सहयोगियों की प्रतिष्ठा और संसद की मर्यादा—यही अटल जी की पहचान थी।
 
अटल जी की उपलब्धियाँ : मोदी युग के भारत की नींव
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जो सशक्त, आत्मनिर्भर और निर्णायक भारत आज दिखाई देता है, उसकी बुनियाद अटल बिहारी वाजपेयी जी ने रखी थी।
अटल जी ने रास्ते बनाए, मोदी जी ने गति दी—यही भाजपा की वैचारिक निरंतरता है।
 
अटल जयंती को सुशासन दिवस के रूप मनाना
भारत में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस 2014 में मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया, ताकि अटल जी के सुशासन, पारदर्शिता और जनकेंद्रित शासन के सिद्धांतों को याद किया जाए तथा नागरिकों में सरकार की जवाबदेही के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
 
वरिष्ठ कार्यकर्ता का अनुभव और संकल्प
एक वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता के रूप में मैं विश्वासपूर्वक कह सकता हूँ कि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने संगठन को सर्वोपरि रखा, गठबंधन को शक्ति बनाया और शासन को जनसेवा का प्रभावी माध्यम सिद्ध किया।
अटल जी—एक युग,एक संस्कार
श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन आरएसएस की साधना, जनसंघ के संघर्ष, भाजपा की सफलता और एनडीए की उपलब्धियों की त्रिवेणी है।
26 दलों को साथ लेकर सफल कार्यकाल पूरा करना, संगठननिष्ठा और राष्ट्रहित में ऐतिहासिक निर्णय—यही उन्हें भारत के महानतम राजनेताओं की श्रेणी में स्थापित करता है।
 
25 दिसंबर हमारे लिए केवल जन्मदिवस नहीं, बल्कि संकल्प दिवस है—
अटल जी के विचारों को आगे बढ़ाने, संगठन को मजबूत करने और राष्ट्र प्रथम की राजनीति को निरंतर आगे ले जाने का।

 
 
लेखक : शमशेर सिंह खरक
मीडिया सह-प्रभारी,
भारतीय जनता पार्टी, हरियाणा

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