वीबी-जी राम जी का मतलब काम की कोई गारंटी नहीं, राज्यों पर पड़ेगा बड़ा वित्तीय बोझ : नील गर्ग
हमारे पास पश्चिम बंगाल की मिसाल है, केंद्र अपने मनरेगा फंड जारी नहीं कर रहा, पंजाब सालों से अपने आरडीएफ का इंतजार कर रहा है, भाजपा 'वीबी-जी राम जी' में भी ऐसा ही करेगी : गर्ग
किसानों की पीठ में कई बार छुरा घोंपने के बाद, अब मजदूरों को निशाना बना रही मोदी सरकार : गर्ग
चंडीगढ़, 16 दिसंबर : आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा) को खत्म करने और इसकी जगह तथाकथित विकसित भारत गारंटी फॉर एंप्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) लाने के केंद्र सरकार के कदम की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे देशभर के ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों, सम्मान और रोजी-रोटी की सुरक्षा को कमजोर करने के इरादे से उठाया गया “सोचा-समझा कदम” बताया है। 'आप' पंजाब के प्रवक्ता नील गर्ग ने पार्टी नेता सफल हरप्रीत सिंह के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार लगातार खोखले नारों और सियासी नाटकों पर निर्भर रही है। अब यह सरकार समाज के सबसे गरीब वर्गों के लिए बनाई गई कल्याणकारी गारंटियों को योजनाबद्ध तरीके से खत्म कर रही है।
गर्ग ने कहा कि यह सिर्फ नाम बदलने या महात्मा गांधी का नाम हटाने का मामला नहीं है। असली मुद्दा यह है कि केंद्र ने दरअसल मनरेगा के खात्मे का ऐलान कर दिया है और टीवी बहसों व ध्यान भटकाने वाली चीजों की आड़ में अपना मजदूर विरोधी एजेंडा छुपाने की कोशिश कर रहा है।
गर्ग ने चेतावनी दी कि 12 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण मजदूर, जिनके पास फिलहाल मनरेगा जॉब कार्ड हैं, इस नए बिल से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। भले ही सरकार काम के गारंटीशुदा दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने का दावा कर रही है, लेकिन प्रस्तावित कानून की बारीकियां एक खतरनाक हकीकत को उजागर करती हैं।
गर्ग ने कहा कि नए बिल की धारा 68 काम की गारंटी नहीं देती, बल्कि इसमें काम देने से इनकार करने की बात शामिल है। उन्होंने बताया कि इसमें कहा गया है कि खेती के सीजन के 60 दिनों के दौरान रोजगार देने की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। सवाल यह है कि यह कौन तय करेगा कि किसी मजदूर को खेती में काम मिला या नहीं? उसका परिवार उन 60 दिनों में कैसे गुजारा करेगा?
मनरेगा के तहत रोजगार की मांग का आकलन जमीनी स्तर पर होता था, जिसमें मजदूर सीधे पंचायत या सरपंच के पास पहुंचते थे। गर्ग ने सवाल किया कि अब ग्रामीण मजदूर रोजगार कैसे हासिल करेंगे?
क्या एक गरीब मजदूर को अब काम के लिए प्रधानमंत्री के पास पहुंचना पड़ेगा? उनका तो सरपंच तक पहुंचना भी मुश्किल था। यह नीति रोजगार को जमीनी स्तर से पूरी तरह काट देती है और सारी शक्ति दिल्ली में केंद्रित कर देती है।
गर्ग ने चेतावनी दी कि रोजगार गारंटी को कमजोर करने से लेबर मार्केट में बाढ़ आ जाएगी, जिससे ग्रामीण मजदूरों का शोषण बढ़ेगा। मनरेगा ने यह सुनिश्चित किया था कि एक मजदूर ईमानदारी से रोजी-रोटी कमा सके और घर का चूल्हा जलता रखे। यह नई योजना उस बुनियादी सम्मान पर सवाल खड़ा करती है।
'आप' प्रवक्ता ने उजागर किया कि नया बिल संघीय सिद्धांतों को बुरी तरह कमजोर करता है। पहले केंद्र 90% खर्च उठाता था, जबकि राज्य 10% का योगदान देते थे। नई योजना के तहत यह बोझ 60:40 के अनुपात में बदल जाएगा, जिससे पहले से वित्तीय संकट झेल रहे राज्य और गहरे संकट में धंस जाएंगे।
अब केंद्र तय करेगा कि किस राज्य को कितना काम और फंडिंग मिलेगी। पिछले 12 सालों से देखा गया है कि मोदी सरकार विपक्ष शासित राज्यों के साथ कैसे भेदभाव करती आ रही है। पंजाब खुद इससे पीड़ित है, क्योंकि उसके आरडीएफ जैसे फंड अभी भी रोके हुए हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राज्यों को केंद्र द्वारा तय फंड से ज्यादा रोजगार की जरूरत पड़ती है, तो उन्हें 100% खर्च खुद उठाना होगा, जिससे बड़े पैमाने पर ग्रामीण रोजगार असंभव हो जाएगा।
गर्ग ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया, जहां केंद्र द्वारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में केस हारने के बावजूद मनरेगा फंड सालों तक रोके गए थे। अगर मनरेगा के कानून द्वारा सुरक्षित होने के बावजूद यह हालत थी, तो सोचिए क्या होगा जब वह कानूनी सुरक्षा भी हटा दी जाएगी। मजदूरों के पास अदालतों तक पहुंचने का भी कोई सहारा नहीं होगा।
गर्ग ने कहा कि पिछले आठ सालों में न्यूनतम मजदूरी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि केंद्र लगातार किसान विरोधी और मजदूर विरोधी नीतियां जारी रखे हुए है। एक ऐसे देश में जहां 80 करोड़ लोग मुफ्त राशन पर गुजारा करते हैं, रोजगार सुरक्षा खत्म करने से भारत भुखमरी और गहरी गरीबी की ओर धकेला जाएगा।
नील गर्ग ने ऐलान किया कि 'आप' के सांसद लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल का कड़ा विरोध करेंगे। पंजाब सरकार भी इस मजदूर विरोधी कदम का विरोध करेगी। यह योजना मजदूर विरोधी, संघ विरोधी और भारत विरोधी है। 'आप' केंद्र को धोखे से ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी तबाह करने की इजाजत नहीं देगी। उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों और मजदूर यूनियनों से अपील की कि वे पार्टी स्तर की राजनीति से ऊपर उठकर मजदूरों के हकों की रक्षा के लिए एकजुट हों।
गर्ग ने कहा कि यह पार्टी का मुद्दा नहीं है, यह लाखों भारतीयों के भविष्य की लड़ाई है। अगर मनरेगा को खत्म किया गया तो लाखों घरों में अंधेरा छा जाएगा। आम आदमी पार्टी और पूरी लीडरशिप हर मंच पर यह लड़ाई लड़ेगी और केंद्र की साजिशों को कभी कामयाब नहीं होने देगी।