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खेतों में काम कर रहे किसानों पर झपटे बाघ, तीन हमलों ने बढ़ाई दहशत; दो की मौत

एक ही दिन में तीन अलग-अलग इलाकों में हमले हुए। एक चरवाहा गंभीर रूप से घायल है, जबकि आठ दिनों में एक क्षेत्र में तीन लोगों की जान जा चुकी है।

चंद्रपुर। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए खेती करना और मवेशियों को चराने ले जाना अब जोखिम भरा होता जा रहा है। शुक्रवार को बाघों के हमले की तीन अलग-अलग घटनाओं में दो किसानों की मौत हो गई, जबकि एक चरवाहा गंभीर रूप से घायल हो गया। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में डर का माहौल है।

तीनों घटनाएं चिमूर, सिंदेवाही और पोंभूर्णा तहसील में हुईं। सबसे ज्यादा चिंता सिंदेवाही क्षेत्र को लेकर है, जहां पिछले आठ दिनों में बाघ के हमलों में तीन लोगों की मौत होने की बात सामने आई है।

कपास चुनते समय किसान पर हमला

पहली घटना चिमूर तहसील के गरडापार गांव की है। यहां 50 वर्षीय किसान सदाशिव खडसंग शुक्रवार को अपने खेत में पत्नी और एक अन्य महिला मजदूर के साथ कपास चुन रहे थे। दोपहर करीब एक बजे अचानक बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में सदाशिव की मौके पर ही मौत हो गई।

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खेत में मिली चप्पल और चश्मा, आधा किलोमीटर दूर मिला शव

दूसरी घटना सिंदेवाही तहसील के धुमनखेड़ा इलाके की है। यहां 60 वर्षीय किसान पत्रू रामा मेश्राम खेत पर गए थे, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटे। परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की और ग्रामीण भी खोजबीन में जुट गए।

तलाशी के दौरान खेत में उनकी चप्पल और चश्मा मिला। बाद में घटनास्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर उनका शव बरामद हुआ। इसी इलाके में दोपहर के समय एक पट्टेदार बाघ घूमता दिखाई दिया था। आशंका जताई जा रही है कि किसान पर हमला इसी बाघ ने किया।

सिंदेवाही क्षेत्र में आठ दिनों के भीतर बाघ के हमलों में तीन लोगों की मौत की बात सामने आने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।

मवेशी चराने गए चरवाहे पर भी हमला

तीसरी घटना पोंभूर्णा तहसील के सातारा तुकूम इलाके की है। यहां 60 वर्षीय चरवाहे राजेश्वर बिजा सिडाम अपने मवेशियों को चराने गए थे। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।

खेती और पशुपालन के लिए घर से निकलना भी जोखिम भरा

जंगल से सटे गांवों के लोगों की आजीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर है। किसानों को खेतों में जाना पड़ता है, जबकि चरवाहों को मवेशियों के लिए जंगल के आसपास के इलाकों में जाना होता है। ऐसे में बाघों की लगातार मौजूदगी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

शुक्रवार की तीन घटनाओं ने ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों को अब खेतों में काम करने और मवेशियों को चराने ले जाने के दौरान भी हमले का डर सता रहा है।

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