दुबई से सोना लाने के मामले की जांच के बाद कस्टम्स ने अभिनेत्री समेत चार आरोपियों पर कुल 244 करोड़ रुपये से अधिक की पेनल्टी लगाई है।
राहुल गुप्ता
बेंगलुरु, 3 अक्टूबर। अभिनेत्री रान्या राव पर कस्टम्स विभाग ने दुबई से भारत में सोने की कथित तस्करी से जुड़े मामले में 89 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कस्टम्स ने कथित तस्करी नेटवर्क की जांच के बाद रान्या राव समेत चार आरोपियों पर कुल 244 करोड़ रुपये से अधिक की पेनल्टी लगाई है।
कस्टम्स के ज्वाइंट डायरेक्टर संदीप की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, विभाग की जांच में रान्या राव और तीन अन्य लोगों से जुड़े कथित तस्करी नेटवर्क की जानकारी सामने आई थी। इसी जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
किस आरोपी पर कितनी पेनल्टी?
रान्या राव पर 89 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं तरुण कोंडुरु राजू पर 49.51 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई। साहिल जैन और भरत कुमार जैन पर 53.06-53.06 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
यह मामला 3 मार्च 2025 को सामने आया था। उस समय राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों ने दुबई से केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचने पर रान्या राव को रोका था। अधिकारियों ने उनके पास से करीब 12.56 करोड़ रुपये मूल्य का 14.213 किलोग्राम विदेशी सोना बरामद किया था। आरोप था कि सोने को छिपाकर भारत लाया गया था।
घर से मिला था करोड़ों का कैश और सोना
मामले की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रान्या राव के घर की तलाशी ली थी। इस दौरान 2.67 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी और करीब 2.06 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के गहने जब्त किए गए थे।
जांच में 7 मार्च 2024 से 18 फरवरी 2025 के बीच कथित तस्करी गतिविधियों की भी पड़ताल की गई। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इस अवधि में रान्या राव और उनके साथियों ने दुबई से भारत में करीब 113 किलोग्राम सोने की तस्करी की।
मार्च 2025 में हुई थी गिरफ्तारी
कस्टम्स की मौजूदा कार्रवाई डीआरआई की पिछली कार्रवाई के बाद हुई है। सितंबर 2025 में रान्या राव और अन्य आरोपियों को जुर्माना भरने के नोटिस जारी किए गए थे। उस समय डीआरआई ने कथित तस्करी गतिविधियों के मामले में रान्या राव पर 102 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने की मांग की थी।
रान्या राव को 3 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें कस्टम्स से जुड़े मामले में कानूनी जमानत मिली, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से उन्हें प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखने के लिए 1974 के कंजर्वेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज एंड प्रिवेंशन ऑफ स्मगलिंग एक्टिविटीज एक्ट (कोफेपोसा) के तहत कार्रवाई किए जाने के बाद वह हिरासत में रहीं।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।
