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”इंसानी स्पर्श और सहानुभूति की जगह कोई नहीं ले सकता” : जगत प्रकाश नड्डा

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पीजीआईएमईआर का 39वां दीक्षांत समारोह भव्य रूप से सम्पन्न, चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में उत्कृष्टता का सम्मान
“चिकित्सा का भविष्य तकनीक से आगे बढ़ेगा, पर उसकी आत्मा मानवता व संवेदनशीलता ही रहेगी” : जगत प्रकाश नड्डा
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 30 अप्रैल। पीजीआईएमईआर के 39वें दीक्षांत समारोह में आज विभिन्न चिकित्सा विषयों के 682 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि 95 मेधावी छात्रों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए पदक देकर सम्मानित किया गया। यह समारोह संस्थान की चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा में उत्कृष्ट परंपरा को दर्शाता है।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा उपस्थित रहे। पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि पूर्व नीति आयोग सदस्य विनोद के पॉल ने अतिथि सम्मान के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई। मंच पर पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो विवेक लाल तथा डीन (अकादमिक) आर के राठो भी मौजूद रहे।
नड्डा ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक और संवेदनशीलता का संतुलन बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीमेडिसिन और आधुनिक तकनीक इलाज को बेहतर बना सकती हैं, लेकिन मरीजों के प्रति सहानुभूति और मानवीय व्यवहार सबसे महत्वपूर्ण हैं।”
उन्होंने पीजीआईएमईआर की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा में देश का अग्रणी केंद्र बना हुआ है। उन्होंने बताया कि संस्थान में वर्तमान में 850 से अधिक बाह्य वित्तपोषित और 100 से अधिक आंतरिक शोध परियोजनाएं चल रही हैं।
देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 820 हो गई है। इसी तरह एमबीबीएस सीटें 51 हजार से बढ़कर 1.26 लाख तथा पीजी सीटें 31 हजार से बढ़कर 85 हजार हो गई हैं।
उन्होंने युवा डॉक्टरों को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देते हुए कहा कि “मेडिकल शिक्षा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और देश द्वारा दिया गया अवसर है। हर डॉक्टर को विनम्रता, संवेदनशीलता और सेवा भावना के साथ समाज को लौटाना चाहिए।”
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अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी सफल डॉक्टर के पीछे माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों का त्याग होता है, इसलिए हमेशा जमीन से जुड़े रहना और आभार व्यक्त करना जरूरी है।
समारोह को संबोधित करते हुए निदेशक प्रो. विवेक लाल ने पीजीआईएमईआर की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में शुरू हुई टेलीमेडिसिन सेवा आज देशभर में 40 लाख से अधिक मुफ्त टेली-कंसल्टेशन प्रदान कर चुकी है, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ उपचार आसानी से उपलब्ध हो रहा है।
उन्होंने बताया कि “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान पीजीआईएमईआर ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की त्वरित तैनाती कर राष्ट्रीय दायित्व निभाया, जिससे यह साबित हुआ कि मेडिकल संस्थान केवल इलाज के केंद्र नहीं बल्कि राष्ट्रीय तैयारी के महत्वपूर्ण स्तंभ भी हैं।
आयुष्मान भारत योजना के बारे में जानकारी देते हुए प्रो. लाल ने कहा कि अब तक लगभग 650 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं, जिससे 2.5 लाख से अधिक मरीजों को लाभ मिला है और महंगे इलाज आम लोगों के लिए सुलभ हुए हैं। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमईआर देश में किडनी प्रत्यारोपण में अग्रणी बना हुआ है और साथ ही पैंक्रियास एवं किडनी के संयुक्त प्रत्यारोपण में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
शैक्षणिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए निदेशक ने बताया कि पीजीआईएमईआर देश का एकमात्र संस्थान है जो अपनी सभी अकादमिक गतिविधियों का वैश्विक प्रसारण करता है, जिससे भारत सहित विदेशों के विद्यार्थी और पूर्व छात्र भी लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संस्थान का मूल मंत्र “Patient First, Patient Last” है और हर कार्य मरीजों के हित और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जाता है।
समारोह के दौरान 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस तथा 14 एमडीएस विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इसके अलावा 18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य पदकों सहित कुल 95 पदक वितरित किए गए।
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों ने पारंपरिक शैक्षणिक पोशाक और भारतीय परिधान पहनकर संस्थान की समृद्ध परंपरा और गौरव को प्रदर्शित किया।
इस अवसर पर पूर्व निदेशक, प्रोफेसर एमेरिटस, संकाय सदस्य, विभागाध्यक्ष, रेजिडेंट डॉक्टर, कर्मचारी और विद्यार्थियों के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समारोह का समापन डीन (अकादमिक) प्रो. आर.के. राठो द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
39वें दीक्षांत समारोह का समापन गर्व, प्रेरणा और आशा के माहौल में हुआ, जिसने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, अनुसंधान और मानवता की सेवा के प्रति पीजीआईएमईआर की प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूत किया।
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