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“हजारों एकड़ फसल बर्बाद, तुरंत विशेष गिरदावरी कराए सरकार” : डॉ. सुशील गुप्ता

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“ओलावृष्टि-आंधी और बेमौसमी बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर, भाजपा सरकार अब भी खामोश” : डॉ. सुशील गुप्ता

“हर प्रभावित खेत का सर्वे कर पारदर्शी मुआवजा दे सरकार” : डॉ. सुशील गुप्ता

न्यूज़म ब्यूरो

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चंडीगढ़, 18 मार्च 2026 : आम आदमी पार्टी हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कल हरियाणा में हुई तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को हुए भारी नुकसान पर भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को घेरा है।

उन्होंने कहा कि रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, करनाल, कैथल, यमुनानगर और हिसार समेत कई जिलों में हजारों एकड़ गेहूं और सरसों की फसल बर्बाद हो चुकी है। तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण कई स्थानों पर 70–80% तक फसल गिर गई है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक न कोई ठोस सर्वे शुरू हुआ है और न ही मुआवजे का कोई स्पष्ट ऐलान किया गया है।

डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि किसान कर्ज लेकर बीज, खाद और दवाई डालता है और दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार करता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा के समय सरकार उसे उसके हाल पर छोड़ देती है। यह भाजपा सरकार की किसान-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक भी प्रभावित गांव का दौरा किया या किसी किसान की पीड़ा सुनी?

उन्होंने कहा कि ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार गेहूं की पैदावार में 15–20% तक गिरावट की आशंका है, जबकि सब्जियों और अन्य फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ा है। इसके बावजूद प्रशासनिक मशीनरी निष्क्रिय बनी हुई है और बीमा कंपनियां भी सक्रिय नजर नहीं आ रही हैं।
डॉ. सुशील गुप्ता ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह “डबल इंजन सरकार” नहीं बल्कि “डबल धोखा सरकार” है, जो हर संकट में किसानों से मुंह मोड़ लेती है। यह किसानों के प्रति सरकार के उदासीन रवैये को दर्शाता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि:

पूरे प्रदेश में तुरंत विशेष गिरदावरी शुरू की जाए
हर प्रभावित किसान को पारदर्शी और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए
फसल बीमा की राशि शीघ्र किसानों के खातों में डाली जाए
मुख्यमंत्री स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत पैकेज की घोषणा करें
अंत में उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी हरियाणा के किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके हक की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी। यदि सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो किसानों का गुस्सा सरकार को जवाब देने पर मजबूर कर देगा।

 

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