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केंद्र से संसद में संविधान (131) विधेयक पेश न करने की अपील की : स. सुखबीर सिंह बादल

चंडीगढ़, 22नवंबर। शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज केंद्र सरकार से संसद के आगामी शीतकालीन सेशन में संविधान (131) विधेयक पेश न करने की अपील की। उन्होने कहा कि ऐसा करना देश के लिए सबसे अधिक बलिदान देने वाले बहादुर पंजाबियों के साथ विश्वासघात और भेदभाव करना होगा एवं चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने के लिए किए गए सभी वादों से मुकरना होगा।
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कहा कि ऐसा करने से उन पंजाबियों के साथ धोखा और भेदभाव होगा, जिन्होने देश के लिए सबसे अधिक बलिदान दिया हे और साथ ही चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने के वादे से पीछे हटना होगा

चंडीगढ़, 22नवंबर। शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज केंद्र सरकार से संसद के आगामी शीतकालीन सेशन में संविधान (131) विधेयक पेश न करने की अपील की। उन्होने कहा कि ऐसा करना देश के लिए सबसे अधिक बलिदान देने वाले बहादुर पंजाबियों के साथ विश्वासघात और भेदभाव करना होगा एवं चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने के लिए किए गए सभी वादों से मुकरना होगा।

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यहां एक प्रेस बयान में अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक केंद्र शासित प्रदेश को पंजाब के प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण से स्थायी रूप से बाहर करने की कोशिश है। उन्होने कहा,‘‘  इसे लागू करना चंडीगढ़ पर पंजाब की राजनीति होने के दावे को समाप्त करने का प्रयास है।’’

प्रस्तावित विधेयक को पंजाब के अधिकारों पर हमला करार देते हुए सरदार सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह संघवाद की भावना के भी खिलाफ है और पंजाबियों के साथ भेदभाव है, जो आजादी के संग्राम में हमेशा आगे खड़े रहे हैं और देश की सीमाओं की रक्षा करने के अलावा हरित क्रांति की शुरूआत करने में भी आगे रहे हैं , जिससे देश के अनाज की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।’’

इस प्रस्तावित विधेयक के बारे जारे देते हुए सरदार बादल ने कहा कि यह चंडीगढ़ को पंजाब को वापिस करने के केंद्र द्वारा किए गए सभी वादों के खिलाफ होगा। उन्होने कहा,‘‘ केंद्र सरकार ने 1970 में चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया था।’’ उन्होने कहा कि बाद में राजीव-लोंगोवाल समझौते में चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने की समय-सीमा जनवरी,1986 तय की गई थी।  उन्होने कहा,‘‘ इस समझौते को संसद ने भी मंजूरी दी थी, लेकिन यह लागू नही हो सका।’’

सरदार बदल ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में केंद्र ने केंद्र शासित प्रदेश में अनुपात में पंजाब और हरियाणा से कर्मचारियों की तैनाती , चंडीगढ़ में यूटी (एजीएमयूटी) कैडर के अधिकारियों को तैनात करने और पंजाब यूनिवर्सिटी पर पंजाब के नियंत्रण को कमजोर करने सहित 60ः40  अनुपात के फार्मुले का पालन न करके चंडीगढ़ पर पंजाब के दावे को कमजोर किया है।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि पंजाबी इन कदमों से ठगा हुआ सा महूसस कर रहा है। उन्होने कहा,‘‘ पंजाबी इस बात से नाराज हैं कि केंद्र सरकार ने अपनी राजधानी पर पंजाब के अधिकार को नजरअंदाज कर ऐसी व्यवस्था लाने की कोशिश कर रही है, जिससे केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन पूरी तरह से केंद्र सरकार के हाथों में आ जाएगा।

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