पुणे शिक्षक सीट पर कौस्तुभ गावडे की जीत, लेकिन स्नातक सीट पर महाविकास आघाड़ी की सफलता से उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति पर चर्चा तेज
राहुल गुप्ता
पुणे, 28 अक्टूबर। महाराष्ट्र विधान परिषद के पुणे विभाग की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों ने भाजपा, कांग्रेस और महाविकास आघाड़ी के सामने अलग-अलग राजनीतिक चुनौतियां रखी हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावडे ने जीत दर्ज की, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में महाविकास आघाड़ी की हर्षदा देशमुख-जाधव की जीत ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, शिक्षक सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर की हार पार्टी के लिए झटका मानी जा रही है।
शिक्षक सीट पर गावडे ने दर्ज की जीत
पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे को 23,200 वोट मिले, जबकि शिवसेना समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को 17,000 वोट प्राप्त हुए। दोनों के बीच करीब 6,200 मतों का अंतर रहा।
पहली पसंद के मतों से जीत का आवश्यक कोटा पूरा नहीं होने के कारण बाद के चरणों में प्राथमिकता क्रम के अनुसार मतों की गिनती और हस्तांतरण किया गया। इसके बाद गावडे की जीत घोषित हुई। इस चुनाव में पहली पसंद के साथ अगली पसंद के मतों का हस्तांतरण भी निर्णायक रहा।
भाजपा और शिवसेना के बीच मुकाबला
सत्तारूढ़ महायुति में शामिल भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच इस सीट पर मुकाबले की स्थिति बनी। भाजपा ने कौस्तुभ गावडे को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। वहीं, शिवसेना ने पहले मंगेश चिवटे को उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन बाद में उन्होंने नाम वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन दिया।
इस घटनाक्रम के बाद महायुति के दोनों दलों के बीच समन्वय को लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, सानप को मिले वोटों के आधार पर शिवसेना के स्वतंत्र राजनीतिक प्रभाव का आकलन करने के लिए अन्य चुनावी आंकड़ों को देखना भी जरूरी है।
पूर्व विधायक दत्तात्रय सावंत को भी 10 हजार से अधिक वोट मिले। उनकी उम्मीदवारी से मतों के विभाजन की चर्चा हुई, लेकिन प्राथमिकता के अनुसार मतों के हस्तांतरण का पूरा ब्योरा सामने आए बिना यह तय करना मुश्किल है कि इसका किस उम्मीदवार को कितना लाभ मिला।
जयंत आसगावकर की हार से कांग्रेस को झटका
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर की हार पार्टी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। राजनीतिक हलकों में चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, हार के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
स्नातक सीट पर भाजपा का चुनावी गणित बिगड़ा
शिक्षक सीट पर जीत के बावजूद भाजपा को स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। महाविकास आघाड़ी की हर्षदा देशमुख-जाधव की जीत के बाद भाजपा के उम्मीदवार चयन, मतदाता पंजीकरण और प्रचार अभियान पर चर्चा तेज हो गई है।
चुनाव से पहले राजेश पांडे और शरद लाड की उम्मीदवारी को लेकर भी चर्चाएं हुई थीं। पूर्व विधायक अरुण लाड के बेटे शरद लाड के भाजपा में शामिल होने के बाद इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की चर्चा थी। हालांकि, पार्टी ने अंततः डॉ. स्मिता जाधव को मौका दिया। संभावित दावेदारों की नाराजगी का चुनावी अभियान पर कोई असर पड़ा या नहीं, इस बारे में फिलहाल अटकलें ही सामने आई हैं।
महायुति ने जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं को दिया
राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता रोहन सुरवसे पाटिल ने कौस्तुभ गावडे की जीत पर बधाई देते हुए इसे महायुति के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन तथा कार्यकर्ताओं की मेहनत से यह सफलता मिली।
दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे बताते हैं कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच चुनावी समीकरण अलग-अलग रहे। भाजपा के लिए शिक्षक सीट की जीत राहत लेकर आई, लेकिन स्नातक सीट की हार ने उम्मीदवार चयन और चुनावी प्रबंधन की समीक्षा की जरूरत पर चर्चा बढ़ा दी है।
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