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किसानों के मार्च से पीछे हटी सरकार या मिला भरोसा? फडणवीस से बैठक के बाद आंदोलन वापस

कर्ज चुकाने वाले किसानों की प्रोत्साहन सब्सिडी बढ़ाने पर विचार, सूखा प्रभावित किसानों को अतिरिक्त मदद और महिलाओं का रुका लाभ जारी करने का आश्वासन

राहुल गुप्ता

मुंबई, 28 अक्टूबर। महाराष्ट्र में किसानों, खेतिहर मजदूरों, आदिवासियों, महिलाओं और श्रमिकों की मांगों को लेकर निकाला गया किसान मार्च मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक के बाद वापस ले लिया गया। 26 अक्टूबर को अहिल्यानगर जिले से शुरू हुआ यह मार्च इगतपुरी और कसारा घाट से होते हुए ठाणे जिले की शहापुर तहसील पहुंचा था। यहां से सैकड़ों किसानों को मुंबई की ओर बढ़ना था, लेकिन मंगलवार शाम मुख्यमंत्री के साथ करीब दो घंटे चली बैठक के बाद किसान नेताओं ने मार्च वापस लेने का फैसला किया।

मुंबई के सह्याद्रि गेस्ट हाउस में हुई बैठक में विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई। सरकार ने कई मांगों पर सकारात्मक निर्णय और आश्वासन दिए। इन फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए 4 नवंबर को अगली बैठक तय की गई है।

सूखा प्रभावित किसानों को अतिरिक्त सहायता का आश्वासन

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सरकार ने आश्वासन दिया कि सूखा प्रभावित किसानों को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के दिशा-निर्देशों के तहत मिलने वाली सहायता से अधिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा, ‘नमो शेतकरी महासम्मान निधि’ योजना की दो बकाया किस्तें जारी करने का भी भरोसा दिया गया।

नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को मिलने वाली 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन सब्सिडी बढ़ाने की मांग पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि कर्जमाफी से जुड़ी उप-समिति के साथ विचार-विमर्श के बाद इस पर सकारात्मक फैसला लिया जाएगा। अगले साल की फसल बीमा योजना में ‘ट्रिगर’ तंत्र दोबारा लागू करने पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया।

जमीन और आदिवासी अधिकारों पर चर्चा

बैठक में वन भूमि, वरकस भूमि, गैरान भूमि, मंदिर के स्वामित्व वाली जमीन, आवासीय निर्माण वाली भूमि और सीमित अधिकार वाली क्लास-2 जमीन से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। इन मुद्दों के समाधान के लिए आवश्यक कानून बनाने और सरकारी निर्देश जारी करने पर सहमति बनी।

‘बाल हिरडा’ की सरकारी खरीद की निगरानी के लिए अध्ययन समूह गठित करने का आश्वासन दिया गया। इसमें किसान सभा के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। भंडारदरा बांध से आदिवासी समुदायों को पानी उपलब्ध कराने और इको-सेंसिटिव जोन का दर्जा रद्द करने की मांगों पर भी चर्चा हुई।

81 लाख महिलाओं को योजनाओं में शामिल करने का भरोसा

सरकार ने KYC पूरा नहीं होने के कारण योजनाओं से बाहर हुईं 81 लाख महिलाओं को दोबारा शामिल करने और KYC प्रक्रिया जारी रखने का आश्वासन दिया। जिन लाभार्थियों ने KYC पूरा कर लिया है, लेकिन उन्हें अभी तक मानदेय नहीं मिला है, उनका भुगतान जल्द शुरू करने की बात भी कही गई।

स्कूल पोषण कार्यकर्ताओं के मासिक वेतन में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की गई। भविष्य में वेतन में और वृद्धि करने पर भी विचार किया जाएगा। निर्माण श्रमिकों के लिए मेडिक्लेम योजना दोबारा शुरू करने और कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरू करने का भी आश्वासन दिया गया।

बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की सहायता बढ़ाने पर विचार

सरकार ने निराश्रितों, बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के मानदेय में बढ़ोतरी पर गंभीरता से विचार करने की बात कही। उन्हें ‘लाडकी बहिन’ योजना की तर्ज पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अनुसूचित क्षेत्रों में PESA के तहत काम करने वाले मोबिलाइजर्स का वेतन स्वयं सहायता समूहों के बजाय सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाए। मानदेय के बकाया भुगतान जल्द जारी करने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में पार्ट-टाइम अटेंडेंट, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्राम स्तर पर काम करने वाले रोजगार कर्मचारियों की मांगों पर भी चर्चा हुई। अब 4 नवंबर की बैठक में यह समीक्षा होगी कि सरकार ने जिन मांगों पर आश्वासन दिया है, उन पर आगे कितना अमल हुआ है।

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