सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार को महान बताने वलों पर बरसे दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा SIT गठित कर न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को रोजगार देने तक हमारी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है
न्यूज़म ब्यूरो
नई दिल्ली, 23 अगस्त। 1984 के सिख विरोधी दंगों का दर्द आज भी सिख समाज की कई पीढ़ियां झेल रही हैं। हजारों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और न्याय के लिए दशकों तक संघर्ष किया। ऐसे में 1984 के दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के प्रति कांग्रेस नेताओं की प्रशंसात्मक टिप्पणियां सिख समाज की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाती हैं। सज्जन कुमार को लेकर कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा की टिप्पणी के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे कुलदीप शर्मा द्वारा कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर आपत्ति जताना भी इस संवेदनशील विषय की गंभीरता को दर्शाता है। कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर आपत्ति जताना यह दिखाता है कि कांग्रेस के भीतर भी इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर गंभीर असहमति है। कांग्रेस बार-बार ऐसे बयान देकर सिख समाज के पुराने जख्म क्यों कुरेदती है? आखिर सिख समाज के प्रति कांग्रेस की इतनी संवेदनहीनता क्यों है?
इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 1984 के मामलों में न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। बंद किए जा चुके गंभीर मामलों की दोबारा जांच की गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर मुकदमे आगे बढ़ाए गए। इसी प्रक्रिया के बाद कई मामलों में दोषियों को सजा मिली, जिनमें सज्जन कुमार की 2018 की सजा भी शामिल है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने न्याय की इस लड़ाई को जमीन से लेकर अदालत तक लड़ा
दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा 1984 के पीड़ित सिख परिवारों के न्याय, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई लंबे समय से लड़ते रहे हैं। उन्होंने न केवल सड़कों और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे को मजबूती से उठाया, बल्कि अदालतों में भी पीड़ितों की आवाज को मजबूती से रखने और न्याय की प्रक्रिया में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने का काम किया है। 1984 के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने के संघर्ष में उनका योगदान लगातार महत्वपूर्ण रहा है। सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा जी ने इस लड़ाई को लंबे समय तक सड़क से अदालत तक लड़ा है और आज सरकार में रहते हुए भी पीड़ित परिवारों के अधिकारों के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रहे हैं।
आज दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार उसी संघर्ष को आगे बढ़ा रही है। सरकार ने 1984 के दंगा पीड़ित परिवारों के लंबित रोजगार मामलों को निपटाने के लिए विशेष नीति बनाई है, ताकि जिन मूल आश्रितों की उम्र अधिक हो चुकी है, वे अपने परिवार की अगली पीढ़ी के सदस्य को भी नौकरी के लिए नामित कर सकें। दिल्ली सरकार ने पीड़ित परिवारों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया तेज करते हुए परिवारों को सरकारी नौकरी देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया है। मई 2025 में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा की मौजूदगी में पीड़ित परिवारों के सदस्यों को नियुक्ति पत्र दिए गए और कुल 125 परिवारों के सदस्यों को रोजगार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। दिसंबर 2025 में भी 36 आश्रितों को नियुक्ति पत्र दिए गए। आने वाले दिनों में भी सैकड़ो परिवारों को एक बार फिर से नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगेI
यह केवल नौकरी देने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि चार दशक से न्याय और सम्मान की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों को अपने पैरों पर खड़ा करने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है।
कांग्रेस को सिख समाज से माफी मांगनी चाहिए, एक तरफ कांग्रेस के नेता 1984 से जुड़े दोषी व्यक्ति की प्रशंसा करते हैं और दूसरी तरफ भाजपा सरकारें पीड़ित परिवारों को न्याय, रोजगार और सम्मान देने के लिए लगातार काम कर रही हैं। यह अंतर अपने आप में बहुत कुछ कहता है।
कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह 1984 के पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है या उन नेताओं की राजनीतिक विरासत के साथ, जिन पर सिख विरोधी हिंसा से जुड़े गंभीर मामले रहे हैं।
सिख समाज को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, न्याय, सम्मान और अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा SIT गठित कर न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को रोजगार देने तक, भाजपा सरकारें इस दिशा में लगातार काम कर रही हैं।
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