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बाणगंगा तालाब में अचानक क्यों मरने लगीं हजारों मछलियां? वजह पर बढ़ी चिंता

मालाबार हिल के ऐतिहासिक तालाब में बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिलीं, बदबू से परेशान स्थानीय लोग; पानी की गुणवत्ता और ऑक्सीजन पर सवाल

राहुल गुप्ता

मुंबई, 5 अक्टूबर। दक्षिण मुंबई के मालाबार हिल स्थित ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब में हजारों मछलियां मृत मिलने से हड़कंप मच गया है। मरी हुई मछलियों से आसपास बदबू फैल रही है और तालाब के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। फिलहाल मछलियों की मौत की पक्की वजह सामने नहीं आई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाणगंगा तालाब में ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार मछलियां पितृ पक्ष शुरू होने के करीब 10 दिन के भीतर ही बड़ी संख्या में मृत मिली हैं। इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हुई थी।

पिंडदान की सामग्री से प्रदूषण की आशंका

स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि पिंडदान के दौरान इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री या अन्य चीजों के पानी में जाने से प्रदूषण बढ़ सकता है। इससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने और मछलियों की मौत की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी इसे मौत की तय वजह नहीं माना गया है।

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कुछ स्थानीय लोगों और पुजारियों ने गर्मी को भी संभावित कारण बताया है। यानी फिलहाल पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन की कमी, गर्मी और प्रदूषण जैसी कई संभावित वजहों पर चर्चा हो रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

पुजारी ने पानी में सामग्री डालने से किया इनकार

बाणगंगा में लंबे समय से पूजा कराने वाले पुजारी सेवालाल तिवारी ने पिंडदान की सामग्री पानी में डालने की बात से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि पूजा के दौरान पानी को तीन बार स्पर्श कराया जाता है और इसके बाद पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को बाहर रखे ड्रम में डाल दिया जाता है।

हालांकि, तिवारी के मुताबिक कुछ लोग अपनी तरफ से पिंडदान करते हैं और ऐसे मामलों में कभी-कभी पूजा की सामग्री पानी में डाल दी जाती है। इसी पहलू को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा हो रही है।

इस बार पहले ही दिखा मछलियों की मौत का असर

स्थानीय निवासी भरत गुरव ने बताया कि बाणगंगा तालाब में मछलियों के मरने की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। हालांकि, इस बार बड़ी संख्या में मछलियां अपेक्षाकृत जल्दी मृत मिली हैं। वह मृत मछलियों को हटाने के काम में भी मदद कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले पितृ पक्ष के आखिरी दिनों में ऐसी घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती थीं, लेकिन इस बार करीब 10 दिन के भीतर ही बड़ी संख्या में मछलियां मर गईं।

BMC ने बुलाई बैठक

मामले को लेकर BMC ने स्थानीय लोगों और पुजारियों के साथ बैठक बुलाई है। इसमें मछलियों की मौत के कारणों और तालाब को आगे होने वाले नुकसान से बचाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

बाणगंगा तालाब धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान किया जाता है। तालाब से जुड़ी मान्यता रामायण काल से भी जोड़ी जाती है। मान्यता के अनुसार, भगवान राम के लंका जाते समय प्यास लगने पर लक्ष्मण ने इसी स्थान पर बाण चलाया था, जिसके बाद भूमिगत गंगा का पानी यहां आया और तालाब का निर्माण हुआ। इसी वजह से इसका नाम बाणगंगा पड़ा। इस स्थान का संबंध भगवान परशुराम से भी जोड़ा जाता है।

फिलहाल हजारों मछलियों की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं है। पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन की कमी, गर्मी या किसी अन्य वजह का कितना असर रहा, यह आगे की जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।

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