विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भारत के इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी को स्मरण करने और उससे सीख लेने का दिन है: नायब सिंह सैनी
देश का विभाजन सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि दिलों को चीर देने वाला दर्दनाक अध्याय था: नायब सैनी
*कांग्रेस शासन में छात्र कठिनाईयों का सामना करते हुए परीक्षा केंद्र पर पहुंचते थे तब पता चलता था कि पेपर पहले ही लीक हो चुका है*
विभाजन स्मृति दिवस कांग्रेस के विभाजनकारी चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने का दिन है: डा. अर्चना गुप्ता
गुरुग्राम स्थित भाजपा कार्यालय गुरूकमल में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की तैयारियों को लेकर हुई बैठक
न्यूज़म ब्यूरो
गुरुग्राम, 4 अगस्त। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को प्रदेश स्तर पर मनाने के लिए भाजपा की गुरुग्राम स्थित भाजपा कार्यालय गुरुकमल में प्रदेश स्तरीय बैठक हुई। बैठक में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता, प्रदेश संगठन मंत्री फणीन्द्रनाथ सहित वरिष्ठ नेताओं ने 14 अगस्त को गुरुग्राम में होने वाले प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ज्ञात-अज्ञात विभाजन पीड़ितों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है, वहीं प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के विभाजनकारी चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने और युवाओं को इतिहास के सही तथ्यों से अवगत कराने का आह्वान किया। बैठक से पहले भाजपा जिला अध्यक्ष सर्वाेप्रिय त्यागी ने मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं का कार्यालय पहुंचने पर स्वागत किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भारत के इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी को स्मरण करने और उससे सीख लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में देश के विभाजन ने करोड़ों लोगों का जीवन एक ही रात में बदल दिया था। लाखों परिवार उजड़ गए, अनगिनत लोगों को अपना घर, जमीन-जायदाद और अपनों को छोड़ना पड़ा। यह दिन उस असहनीय पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इतिहास के बारे में पता होना चाहिए। अगर हम इतिहास से प्रेरणा लेते हें तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहता है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आने वाली युवा पीढ़ी को देश के इतिहास की सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। यदि हम इतिहास से प्रेरणा लेते हैं तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहता है, लेकिन यदि इतिहास को भुला दिया जाए तो वही भयावह परिस्थितियां दोबारा सामने खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढी को समझना और बताना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी समय भारत का विभाजन हुआ। यह केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि दिलों को चीर देने वाला दर्दनाक अध्याय था। लाखों लोगों को अपने घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। जिन लोगों ने अपनी आंखों से वह मंजर देखा, वे आज बुजुर्ग हो चुके हैं। उस समय कई लोग छोटे बच्चे थे, जो अपनी मां की गोद में सफर कर रहे थे। उन पर क्या बीती होगी, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि विभाजन के समय माताएं अपने बच्चों से बिछड़ गईं, बच्चे भीड़ में खो गए, परिवार बिखर गए और लाखों लोग हिंसा की चपेट में आए। यह केवल जमीन का विभाजन नहीं था, बल्कि मानवता के भीतर गहरे घाव छोड़ने वाली त्रासदी थी।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि भागदौड़ की जिंदगी में जब इंसान को थोड़ा सुख मिलता है तो वह दुखों को भूल जाता है, हमें उन दुखों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी को कौन नहीं जानता। जब ट्रेनें चलती थी तो उसमें मातम अधिक होता था, कई बार तो ट्रेन अपनी मंजिल तक पहुंचती ही नहीं थी वे अपने साथ दर्द का सन्नाटा छोड़ जाती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के माध्यम से देश को ऐसा मंच दिया है, जहां उस इतिहास को निरंतर याद किया जा सके और नई पीढ़ी को उससे परिचित कराया जा सके। उन्होंने कहा कि देश का यह विभाजन केवल जमीन का विभाजन नहीं था। यह विभाजन मानवता के भीतर गहरे घाव छोड़कर गया है। लोगों ने विस्थापित होकर कष्टों के बीच अपना जीवन जीया है। विभाजन त्रासदी की इस आग ने रिश्तों को जला दिया। सदियों की सांझी विरासत को पलभर में बिखरने का काम किया।
नायब सिंह सैनी ने हाल में हुए आंदोलन पर बोलते हुए कहा कि जिस विषय को लेकर आंदोलन खड़ा किया गया, वहां पेपर लीक का विषय था ही नहीं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने यह आंदोलन खड़ा किया, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। कांग्रेस के शासनकाल में कितने पेपर लीक हुए, इसका हिसाब देश जानता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं और 12 वर्षों में एक पूरी पीढ़ी बदल जाती है। आज के युवाओं को यह पता ही नहीं है कि कांग्रेस शासन के दौरान परीक्षाओं और व्यवस्थाओं की क्या स्थिति थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब छात्र परीक्षा देने के लिए निकलते थे तो उन्हें यह भी भरोसा नहीं होता था कि परीक्षा होगी या नहीं। बसों की हालत खराब होती थी, बच्चे बसों और ट्रेनों की छतों पर बैठकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचते थे। कई बार परीक्षा केंद्र पहुंचने पर पता चलता था कि पेपर पहले ही लीक हो चुका है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि जैसे ही पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्काल सख्त जांच के आदेश दिए और स्पष्ट कर दिया कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है। अब यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार के अपराध में शामिल पाया जाता है तो उसे 10 वर्ष तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने लगेगा। यह कानून इसलिए बनाया गया है ताकि देश के युवाओं के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न कर सके।
नायब सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार विकसित भारत-2047 का विजन सामने रख रहे हैं, क्योंकि उन्होंने विश्वास है कि आज की युवा पीढ़ी ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बनेगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान कुछ युवाओं ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अनुचित बातें भी कहीं, लेकिन प्रधानमंत्री ने उन्हें क्षमा करते हुए उनके भविष्य को प्राथमिकता दी। अब हमारा दायित्व है कि अधिक से अधिक युवाओं को राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने उपस्थित भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि जहां भी संगठन की ओर से उनकी ड्यूटी लगाई जाए, उसे पूरी कर्मठता और निष्ठा के साथ निभाएं। भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता स्वयं में एक संस्था है और उसकी जिम्मेदारी केवल संगठन तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता अधिक से अधिक युवाओं को अपने साथ जोड़े, उन्हें प्रेरित करे और देश के इतिहास से परिचित कराए। युवाओं को यह अवश्य बताया जाए कि हमारे पूर्वजों ने किन परिस्थितियों में संघर्ष किया, किस प्रकार अपने घर-परिवार छोड़े और राष्ट्र के लिए पीड़ा को झेला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने का संकल्प लेने का अवसर भी है। इतिहास से सीख लेकर ही राष्ट्र मजबूत बनता है। इसलिए विभाजन की उस पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को हमेशा स्मरण रखना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां उस त्रासदी का सामना ना करना पड़े।
कार्यकर्ता कांग्रेस के चरित्र का पर्दाफार्श करें : डा. अर्चना गुप्ता
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारत के इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक था। उस समय असंख्य लोगों ने मातृभूमि के लिए अपने प्राण गंवा दिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के साथ हुए विभाजन में लाखों परिवार उजड़ गए, मातृशक्ति पर अत्याचार हुए, परिवारों के सामने बच्चों की हत्या कर दी गई और रक्तरंजित लाशों से भरी ट्रेनें भारत पहुंचीं। उस पीड़ा को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को उस त्रासदी और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों की सही जानकारी देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस के सत्ता के प्रति मोह के कारण देश को विभाजन की विभीषिका झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद की चाहत में देश का बंटवारा हुआ और लोगों का नरसंहार हुआ। इस इतिहास से युवाओं को अवगत कराना प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है।
प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता ने कहा कि हर स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग सेंटर तक पहुंचकर 1947 की घटनाओं और कांग्रेस के उस समय के चरित्र का पर्दाफार्श करना हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है ताकि नई पीढ़ी इतिहास के तथ्यों को समझ सके। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच निरंतर संवाद और जनजागरण से ही विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य पूरा होगा।
प्रदेश अध्यक्ष डा. गुप्ता ने हाल ही में हुए आंदोलनों पर चर्चा करते हुए कहा कि आंदोलन में क्या हुआ पूरा देश जानता है। आंदोलन के दौरान अभद्र भाषा, पत्थरबाजी, महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार और अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में ऐसा नेतृत्व मिला है, जो दिन-रात विकसित भारत, युवाओं के भविष्य और रोजगार की चिंता करता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना सहित कठोर कानून बनाने का काम किया। डा. अर्चना गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंदोलन में अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले युवाओं को भी माफ कर लोकतांत्रिक परंपराओं का परिचय दिया।
प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि अधिक से अधिक युवाओं से संवाद करें और उन्हें विभाजन की विभीषिका और कांग्रेस के चरित्र तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता के महत्व से अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि 6 अगस्त को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं एक लाख युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत के युवाओं को इतिहास के सही तथ्यों से जागृत किया जाए और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ाया जाए।
राष्ट्र की एकता और अखंडता ही विभाजन की त्रासदी का सबसे बड़ा जवाब : संजय भाटिया
राज्यसभा सांसद संजय भाटिया ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि देश की एकता और अखंडता के प्रति अपने संकल्प को दोहराने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों परिवारों ने असहनीय पीड़ा, विस्थापन और अपनों के बिछड़ने का दर्द सहा, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
संजय भाटिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विभाजन की त्रासदी को स्मरण कर उन सभी पीड़ित परिवारों और बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमें इतिहास से सीख लेकर समाज में भाईचारा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूत करना होगा। संजय भाटिया ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण का संकल्प तभी साकार होगा, जब पूरा समाज राष्ट्रहित को सर्वाेपरि मानते हुए एकजुट होकर आगे बढ़े।
विभाजन की पीड़ा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व: बोधराज सीकरी
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम के संयोजक बोधराज सीकरी ने कहा कि वर्ष 1947 का भारत विभाजन इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक था। लाखों लोगों को अपना घर-बार, जमीन-जायदाद और अपनों को खोना पड़ा, जबकि असंख्य परिवारों ने अमानवीय यातनाएं झेलीं। उन्होंने कहा कि विभाजन की यह पीड़ा केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी सीख है।
उन्होंने कहा कि हमें उन लाखों ज्ञात-अज्ञात लोगों के बलिदान और संघर्ष को सदैव स्मरण रखना चाहिए, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि विभाजन की त्रासदी को याद रखते हुए समाज में एकता, सद्भाव और राष्ट्र प्रथम की भावना को मजबूत करें तथा भारत की अखंडता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए संकल्पित होकर कार्य करें।
बैठक में महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव, विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण लाल मिढ़ा, सह संयोजक विधायक निखिल मदान, सचिव जगदीश चौपड़ा, विधायक विनोद भयाना, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, पूर्व मंत्री सुभाष सुधा, जिला अध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी भी मौजूद रहे।
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