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आज का शुभ पंचांग, दैनिक राशिफल, मित्र सप्तमी और पौराणिक महत्व

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आज का शुभ पंचांग, दैनिक राशिफल, मित्र सप्तमी और पौराणिक महत्व

 

दिनांक – 27 नवम्बर 2025

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दिन – गुरुवार

विक्रम संवत् – 2082

अयन – दक्षिणायण

ऋतु – हेमंत

मास – मार्गशीर्ष

पक्ष – शुक्ल

तिथि – सप्तमी रात्रि 12:29 नवम्बर 28 तक तत्पश्चात् अष्टमी

नक्षत्र – धनिष्ठा रात्रि 02:32 नवम्बर 28 तक तत्पश्चात् धनिष्ठा

योग – ध्रुव दोपहर 12:09 तक तत्पश्चात् व्याघात

राहुकाल – दोपहर 01:36 से दोपहर 02:57 तक ( उज्जैन मानक समयानुसार)

सूर्योदय – 06:31

सूर्यास्त – 05:12(सूर्योदय एवं सूर्यास्त बाराबंकी मानक समयानुसार)

दिशा शूल – दक्षिण दिशा में

ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 05:04 से प्रातः 05:56 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:53 से दोपहर 12:36 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

 

निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:49 से रात्रि 12:41 नवम्बर 27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

 

विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है व शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

 

 

शीत ऋतु में विशेष तौर पर होनेवाला कफ रोग

कफ प्रकृति वाले लोगों को मंदाग्नि होने से कफ होता है । आहार में मधुर, नमकीन, चिकनाई युक्त, गुरु व अधिक मात्रा में लिया गया आहार कफ उतपन्न करता है ।

कफ का रोगी तीखा, कड़वा व कसैले रस अधिक लें । मिर्च, काली मिर्च, हींग, लहसुन, तुलसी, पीपरामूल, अदरक, लौंग आदि का सेवन विशेष रूप से कर सकते हैं।

आहार रुक्ष, लघु, अल्प व उष्ण गुणयुक्त लें । जिस में बाजरा, बैगन, सहजन, सुआ की भाजी, मेथी, हल्दी, राई, अजवायन, कुलथी, चने, तिल का तेल, मूँग, विना छिलके के भुने हुए चने का सेवन करें । उबालने पर आधा शेष रहे पानी और अनुकूल पड़े तो सौंठ के टुकड़े डाल कर उबला हुआ पानी पियें । हो सके तो पानी गर्म-गर्म ही पियें । छाती, गले व सिर पर सेंक करें । नींद अधिक न लें ।

औषधि : भोजन के बाद हिंगादी हरड़ चूर्ण या संत कृपा चूर्ण का सेवन करें अथवा संत कृपा चूर्ण दिन में 2 बार शहद के साथ लें । गजकरणी करें । सूर्यभेदी प्राणायाम करें ।

प्रातः गौमूत्र अथवा गौझरण अर्क का सेवन करें ।

 

 

राशिफल : 27 नवम्बर 2025, गुरुवार

 

मेष राशि : आज आप बातचीत में सावधानी रखें। लापरवाही से नुकसान होगा। विरोधी खुलकर विरोध करेंगे। कार्य की शुरुआत में परेशानी आ सकती है। आज आपके भावनाओं में बहने की उम्मीद थोड़ी ज्यादा है। रोमांस के लिए बढ़ाए गए कदम आज असर नहीं दिखाएंगे। आज आपको आर्थिक लाभ होगा लेकिन शारीरिक कठिनाइयां देखने को मिल सकती है।

 

वृषभ राशि : आज मनचाहा जीवनसाथी मिलने से आप प्रसन्न रहेंगे। पुराने वादे पूरे करने का समय है। अपनी निजी जिन्दगी में दूसरों को दखल न दें। निवेश फायदेमंद रहेगा और समृद्धि लेकर आएगा। मानसिक परेशानियों में कुछ कमी आ सकती है तथा आज प्रसन्न रह सकते हैं। विरोधियों का प्रभाव कम हो सकता है। अटके कार्य पूर्ण हो सकते हैं। व्यवसायिक लाभ के भी योग बन रहे हैं।

 

मिथुन राशि : आज भावुकता में कोई भी फैसला लेने से बचें। सुख साधनों पर धन खर्च होगा। व्यापारिक नई योजना आज शुरू हो सकती है। अधिकारियों से संबंध मजबूत होंगे। बहनों से विवाद हो सकता है। सूझबूझ से मामला निपटा लें, संबंध टूट सकते हैं। कामकाज में व्यस्तता के चलते रोमांस को दरकिनार होना पड़ेगा।

 

कर्क राशि : आज आपको कोई अप्रत्याशित खुशखबरी मिलेगी। यह आपके करियर या निजी जीवन से जुडी हो सकती है। लेकिन इससे आपको वित्तीय लाभ भी होंगे। इससे आपको भविष्य में भी इसी प्रकार के लाभ उठाने का रास्ता दिखाई देगा। आज का दिन आपके लिए सुगम रह सकता है। व्यस्तता के बावजूद प्रसन्न रहेंगे। पार्टनर से नोंकझोंक संभव है।

 

सिंह राशि : अपने व्यवहार से परिजनों का दिल जीत लेंगे। परिवार में तनाव की स्थिति निर्मित होगी। प्रेम के नजरिए से आज का दिन आपके लिए खुशियों से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी उन्नति कुछ बाधाओं के चलते अटक सकती है। अगर आज आप किसी सामाजिक समारोह में जाने की सोच रहे हैं तो अवश्य जाएं और इसका फायदा अपने आप को खुश रखने में उठाएं।

 

कन्या राशि : आज आप बड़े निर्णय को सोच-समझकर लें। स्वास्थ्य में सुधार होगा। व्यवसाय में हानि होने की संभावना है, इसलिए सतर्क रहें। अगर आप अपना नजरिया आस-पास के ऐसे लोगों को बताएँ जो महत्वपूर्ण निर्णय लेते हों, तो आपको लाभ होगा। साथ ही आपको काम के प्रति अपने समर्पण और निष्ठा के लिए शाबाशी भी मिलने की संभावना है।

 

तुला राशि : प्रशासनिक अधिकारी आज सम्मान प्राप्त कर सकते हैं। विवाह कार्यों में शामिल होंगे। समय रहते अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करें। आज का दिन आपके लिए अनुकूल रह सकता है। आज आपका स्वार्थी स्वभाव देखने को मिलेगा। अटके हुए कार्य बन सकते हैं। वित्तीय स्थिति में सुधार भी संभव है। निजी संबंध सहायक रह सकते हैं। दिन प्रसन्नता पूर्वक बीतेगा।*

 

वृश्चिक राशि : कीर्ति यश में वृद्धि होगी। नए मित्र बनेंगे। मौज मस्ती में समय व्यतीत होगा। आज का दिन आपके लिए विशेष रूप से अच्छा है। आप अपना कुछ नया शुरू कर सकते हैं ,काफी समय लेने वाला अपना कोई अधूरा काम पूरा कर सकते हैं यात्रा के योग हैं। अगर कोई नया कार्य शुरू करना चाहते हैं आज का दिन बहुत अच्छा है। आज आपके कार्य में उन्नति होगी।

 

धनु राशि : आज आप व्यापार में मंदी से परेशान रहेंगे। पुराने पैसों का लेनदेन आज भी लंबित रहेगा। अपना ही आपके साथ विश्वासघात कर सकता है। जिन क्षेत्रों में प्रयास करेंगे उसमें पूर्ण सफलता मिल सकती है। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिल सकती है। आज आपका दिन अच्छा रहेगा। व्यवसाय में लाभ हो सकता है तथा नौकरी में उन्नति भी संभव है।

 

मकर राशि : आज का दिन कुछ अनिश्चित सा है ,आपको संवेदनशील लोगो से बात करते हुए अधिक सावधान रहना होगा । खर्च पर नियंत्रण रखें। किसी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। धन लाभ के योग बन रहे हैं। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। रोजगार के अवसर विकसित होंगे। साझेदारी में लाभ होगा। मेहमानों आएंगे। सामाजिक कार्यों में सहभागिता हो सकती है।

 

कुम्भ राशि : दूसरों के निजी मामलों में दखल न दें। अपने क्रोध पर अंकुश रखें। आपकी अपने पिछले समय में से किसी पुराने व्यक्ति से मिलने की सम्भावना है और यह व्यक्ति आपके भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राजनैतिक क्षेत्र में आपका प्रभाव बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में अनुकूलता बनी रहेगी, अधिकारी पक्ष से सहयोग मिल सकता है।

 

मीन राशि : आज आप किसी खास व्यक्ति से मिल सकते हैं। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। बहुत से अच्छे मौके आपका इन्तजार कर रहे हैं लेकिन आपको उनके लिए पूरे तौर पर समर्पित कोशिशें करनी होंगी,जोकि इस समय आपके लिए कुछ मुश्किल लग रहा है। सहकर्मियों से बातों में नर्मी लाएं। आज का दिन आपके लिए प्रगतिशील रह सकता है।

 

 

…मित्र सप्तमी आज

मित्र सप्तमी का पर्व हर वर्ष मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन का व्रत और पूजा विशेष रूप से संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य, और समाज में मित्रवत संबंध स्थापित करने के लिए किया जाता है।

 

…मित्र सप्तमी की तिथि और मुहूर्त

मित्र सप्तमी 2025 की तारीख गुरुवार, 27 नवंबर 2025

 

सप्तमी तिथि का आरंभ- 26 नवंबर 2025, देर रात 12 बजकर 01 मिनट पर

 

सप्तमी तिथि का समापन- 27 नवंबर 2025, देर रात 12 बजकर 29 मिनट पर

 

चूंकि सप्तमी तिथि 27 नवंबर को उदया तिथि में व्याप्त है, इसलिए मित्र सप्तमी का पर्व 27 नवंबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा।

 

 

…मित्र सप्तमी पौराणिक महत्व 

सूर्य देव को महर्षि कश्यप और अदिति का पुत्र कहा गया है। इनके जन्म के विषय में कहा जाता है कि एक समय दैत्यों का प्रभुत्व खूब बढ़ने के कारण स्वर्ग पर दैत्यों का अधिपत्य स्थापित हो जाता है। देवों के दुर्दशा देखकर देव-माता अदिति भगवान सूर्य की उपासना करती हैं। आदिति की तपस्या से प्रसन्न हो भगवान सूर्य उन्हें वरदान देते हैं कि वह उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे तथा उनके देवों की रक्षा करेंगे। इस प्रकार भगवान के कथन अनुसार कुछ देवी अदिति के गर्भ से भगवान सूर्य का जन्म होता है। वह देवताओं के नायक बनते हैं और असुरों को परास्त कर देवों का प्रभुत्व कायम करते हैं। नारद जी के कथन अनुसार जो व्यक्ति मित्र सप्तमी का व्रत करता है तथा अपने पापों की क्षमा मांगता है सूर्य भगवान उससे प्रसन्न हो उसे पुन: नेत्र ज्योति प्रदान करते हैं। इस प्रकार यह मित्र सप्तमी पर्व सभी सुखों को प्रदान करने वाला व्रत है।

 

…मित्र सप्तमी पूजन 

मित्र सप्तमी व्रत भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है। सप्तमी के दिन इस पर्व का आयोजन मार्गशीर्ष माह के आरंभ के साथ ही शुरू हो जाता है इस पर्व के उपलक्ष में भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व होता है। मित्र सप्तमी व्रत में भगवान सूर्य की पूजा उपासना की जाती है, इस दिन व्रती अपने सभी कार्यों को पूर्ण कर भगवान आदित्य का पूजन करता है व उन्हें जल द्वरा अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य भगवान का षोडशोपचार पजन करते हैं। पूजा में फल, विभिन्न प्रकार के पकवान एवं मिष्ठान को शामिल किया जाता है। सप्तमी को फलाहार करके अष्टमी को मिष्ठान ग्रहण करते हुए व्रत पारण करें। इस व्रत को करने से आरोग्य व आयु की प्राप्ति होती है। इस दिन सूर्य की किरणों को अवश्य ग्रहण करना चाहिए। पूजन और अर्घ्य देने के समय सूर्य की किरणें अवश्य देखनी चाहिए।

 

किसी भी पारंपरिक शादी विवाह में कुँवर कलेवा एक महत्वपूर्ण और बहुत खूबसूरत रीति या परंपरा हुआ करती थी, अब भी इसे कहीं कहीं बहुत छोटे रूप में शादी विवाह में देखा जाता है ।

 

पहले शादियों में बारात कई कई दिन तक कन्या पक्ष के यहाँ रुका करती थी तब ये सभी रीतियाँ और परम्पराएँ, विधि विधान और हर्षोल्लास से मनाई जातीं थीं । बारात आने के दूसरे दिन सबसे अच्छा खाना कन्या पक्ष की ओर से बनवाया जाता था और शाम के समय का भोजन जब परोसा जाता था तो बाकी बारात तब तक खाना नहीं प्रारम्भ करती थी जब तक कुँवर मतलब दुल्हा खाना प्रारम्भ नहीं करता था ।बारात के खाने की व्यवस्था बाहर और दूल्हे और उसके साथ छोटे बच्चों की खाने की व्यवस्था घर के अंदर हुआ करती थी।

 

उसी समय दुल्हा रूठा करता था और दुल्हन की सहेलियाँ,नाते रिश्ते दार महिलाएं उसे तरह तरह से मना मना के खिलाने का प्रयास करती थीं और कभी कभी कभी यह रूठना मनाना लंबा चलता था,पूरी बारात तब तक सामने परोसा हुआ खाना खा नहीं सकती थी,दूल्हे को मनाने की प्रक्रिया चालू रहती थी और बारात इस इंतिज़ार में रहती थी कब दुल्हा खाये तो वह भी अपने व्यंजनों का आनंद लें।

 

आज के लेख के प्रसंग में यह सब बताना इसलिए आवश्यक था क्योंकि इसके बिना आप श्री राम विवाह के समय तुलसी दास द्वारा लिखी गई राम कलेवा की चौपाई का रस नहीं ले पाते,आप में से अधिकांश पाठकों ने इन परम्पराओं के बारे में कम ही सुना होगा।

 

रामचरित मानस के मूल पाठ के साथ की क्षेपक भी लिखे गए हैं। कुछ लोगों का मत है कि इन क्षेपकों को बाद में जोड़ा गया है। सम्भवतः ये गोस्वामी जी द्वारा न रचित हों। लेकिन ऐसा लगता नहीं, क्योंकि इन क्षेपकों में भी भाव इतनी दक्षता से भरे गए हैं कि वह सामर्थ्य तुलसी बाबा के अतिरिक्त और किसी में हो ही नहीं सकता। ऐसा एक क्षेपक है ' राम कलेवा' जिसे पढ़कर पाठक का मन उस रसानंद के अतिरिक्त कुछ भी नहीं चाहता और उसमें डूबता है तो डूबा ही रहना चाहता है।

 

हमारे हिन्दू विवाह परम्परा में पवित्र फेरों के पश्चात सुबह में वर अपने भाई बन्धु के साथ कलेवा (अल्पाहार) के लिए मंडप में आता है। यहां मंडप में वर की सालियां एवं सलहजें, वर व उसके साथ आए मित्रों से हास परिहास करती हैं जो कि उभय पक्ष को आनंद प्रदान करता है। मंडप में भोजन करते समय, वर की मां बहन को लेकर गाली भी गाई जाती है। एक मात्र यही एक अवसर है जहां मां बहन की गाली सुनकर भी प्रसन्नता प्राप्त होती है क्योंकि ये गाली, दी नहीं जाती बल्कि गाई जाती है। जो गाली गाई जाती है , उससे क्रोध नहीं अनुराग बढ़ता है।आइये अब हम श्री राम विवाह प्रसंग की ओर बढ़ते हैं और राम कलेवा चौपाई का रस लेते हैं।

 

राज जनक के पुत्र लक्ष्मिनिधि राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को जनवासे से कलेवा करने के लिए अपने महल में लाते हैं। वहां उनकी पत्नी सिद्धि कुंवरि राम की बांह पकड़ कर अपने महल में लाती है क्योंकि सास सुनयना के समक्ष सहजता से हास परिहास नहीं किया जा सकता था। सिद्धि के महल में वह तथा उसकी सखियां चारों भाइयों को बड़े ही प्यार से कलेवा कराती हैं और उनसे हास परिहास का आनंद भी प्राप्त कर रही हैं।

 

सिद्धि कुंवरि राम से कहती है- “हे, रघुनंदन! सुनिए आप मेरे नंदोई हैं। हमसे कुछ छुपाइएगा मत, सांची सांची बताइएगा। हमने सुना है कि आप की बहन श्रृंगी ऋषि से व्याही हैं। लेकिन, लालन! विवाह तो अपनी ही जाति में न होता है। ये विवाह कैसे हो गया? ऋषि आपकी बहन को भगा ले गए थे? या आप की बहन ही उनके पीछे लग गई थी? हे, बेदाग रघुवंशी लालन! बस इतनी सी बात बता दीजिए।”

 

बोली सिद्धि सुनहु रघुनंदन तुम हमार ननदोई। एक बात तुमसो हम पूछ लाल न राखहु गोई। होत ब्याह संबंध सबनको अपने जातिहि माहीं। निजबहिनी श्रृंगी ऋषिकोतुम कैसे दियो बिवाही। की उनको मुनीश ले भाग्यों की बोई संग लागी। एती बात बतावहु लालन तुम रघुवंश अदागी।

 

इस पर लखन लाल जी कहते हैं- हे, लाड़िली!

 

ब्रह्मा ने जो सम्बन्ध लिख दिया है , सभी का विवाह उसी के अनुसार होता है। लेकिन यहां एक बड़ा आश्चर्य यह है कि आप सिद्धि और वे लक्ष्मी निधि, फिर नारी का विवाह नारी से कैसे हो गया। आप बता सकती हैं।

 

लखन कहयो सुनहु लाडिली,

जेहि विधि जहं लिखि दीना।

तह संयोग होत है ताको,

ब्याह तो कर्म अधीना।।

 

अजरज एक हम माने प्यारी,

जाको लखै न काहू।

तुम सिद्धि वे लक्ष्मी निधि,

नारि नारि भो ब्याहू।

 

इस पर सिद्धि कुंवरि निरुत्तर हो गई। तब एक दूसरी सखि कहती है कि लाल जी आप से कौन जीत सकता है? लेकिन आपके परिवार की एक यह रीति विश्व विख्यात है कि अवधपुरी की नारियां खीर खाकर ही पुत्र पैदा कर देती हैं, वहां पति का कोई काम ही नहीं है।

 

एक सखी कह सुनहु लालजी

तुमहि सकहि कोई जीती।

जाहिर अहे सकल जग माहीं

तुमरे घर की रीति ।।

 

अति उदार करतूति दार सब

अवधपुरी की बामा।

खीर खाय पैदा सुत करती

पति कर कछु नहीं कामा।।

 

सखि के ऐसे वचन सुनकर रघुनंदन मुस्कराकर बोले- हे, प्यारी! तुम अपनी चाल छिपाकर औरों की बातें करती हो। बिना माता पिता के कौई नहीं पैदा होता है, यह सिद्धांत की बात है लेकिन यहां तो लोग धरती से उत्पन्न हो जाते हैं, ऐसी हमारे यहां की रीति नहीं है।

 

सखी वचन सुन तब रघुनन्दन

बोले मृदु मुसकाते ।

अपन चाल छिपावहु प्यारी

कहुहु आनकी बातें।

 

कोई नहिं जन्मे माता पिता बिन

बंधी वेद की नीति।

तुमरे तो महि तैं सब उपजै

अस हमरे नहीं रीति ।

 

उस सखी के निरुत्तर होने पर दूसरी सखी बोली- हे, लालन! बचपन से आप लोग तो तपस्वियों के साथ ही रहे हैं। आपने यह चालाकी कहां से सीखी। आप ये सब क्या मुनियों की पत्नियों से सिखा है या आप की बहनों ने आपको सिखाया है। क्योंकि मीठ मीठा स्वाद बिना चखे ज्ञात नहीं होता है, लाल जी!

 

लरिकाई तो रहयो लाल जी

तुम तपस्विन संग माहीं।

ये छल छंद-फंद कहँ पाए

सत्य कहो हम ताहीं।

 

कि मुनि नारिन के संग सीखे

कि निज भगिनी पासै।

मीठो-सीठो स्वाद लाल जी

बिन चाखे नहीं भासै ।।

 

एक अन्य सखी इस सखी का साथ देती हुई बोली- “अरे! सब मिलकर सुनो। मैं इनकी एक और बड़ाई जानती हूं, जब ये विश्वामित्र की यज्ञ रक्षा के लिए गए थे। इनकी सुन्दरता देख, कामवश ताड़का इनके पास आई। इनसे कुछ बना नहीं तो क्रोधित हो कर उसकी हत्या कर दिए।”

एक सखी कहै सुनहु सबै मिलि

इनकी एक बड़ाई।

ऋषि मख राखन गए कुँवर ये

तँह हम अस सुधि पाई।

 

इनको सुन्दर देख कामवश

तिया ताड़का आई।

सो करतूति न भई लालसों

मारेहू तेहि खिसि आई ।

 

राम, लक्ष्मण के पुरुषत्व पर आंच आता देख शत्रुघ्न बोले-” हे, भामिनियों! उन्हें नाहक दोष मत दीजिए। जो बात उनसे नहीं हो पायी वह हमसे पूरी कर लीजिए।

 

बोले रिपुहन सुनहु भामिनी

नाहक दोष न दीजै।

जो करतूत बनी नहीं उनसे

सो हमसे भरि लीजै।

इस तरह कलेवा भी होता रहा और हास परिहास भी चलता रहा।

 

जय जय श्रीसीताराम

जय जय श्रीराधेश्याम

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