CM के CBCID जांच के आदेश को भी निगल गया था अधिकारी
इस विभाग में दूसरे विभाग के अधिकारी किए जा रहे है तैनात
एस पी अरोरा
देहरादून, 19 अगस्त। अल्पसंख्यक कल्याण सोने का अंडा देने वाली मशीन बन गई है। इस विभाग में अन्य विभागों से आने के लिए कई अधिकारी लाइन में लगे हुए हैं, जबकि दो अधिकारी इस विभाग में तैनाती पा चुके हैं। यह सब कार्य इस विभाग के मुखिया के द्वारा किया जा रहा है, जो अधिकारी इस विभाग में आए हैं, वह उनके विश्वास पात्र हैं।
अल्पसंख्यक कल्याण के मुखिया द्वारा अपने विभाग में एक ऐसे अधिकारी को तैनात कराया गया है, जिसकी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा एसआईटी जांच की घोषणा की गई थी। लेकिन इस अधिकारी ने अपने रसूख से सीएम के द्वारा गठित की गई एसआईटी जांच को विभागीय जांच में तब्दील करवा लिया था और विभाग की जांच में इस अधिकारी पर किसी तरह का कोई आरोप साबित नहीं हुआ, जिसका फायदा इस अधिकारी ने उठाया और यह अधिकारी सीएम के आदेश से भी ऊपर होकर अपनी जांच को प्रभावित करके अपने पक्ष में करके ले गया था।
शिक्षा विभाग में उपसचिव के पद पर तैनात रहे विभूति के कर्म की शिकायत वर्ष 2025 में प्रदेश का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास पहुंची थी। सीएम पुष्कर धामी ने इस शिकायत पर सीबीसीआईडी की जांच करने के आदेश दिए थे, लेकिन अधिकारी ने अपने रसूख का उपयोग किया और पहले तो सीबीसीआईडी जांच को SIT जांच में तब्दील कराया और उसके बाद इसी जांच को विभागीय जांच में बदलवा दिया। कुल मिलाकर उपसचिव को इन जांच में करीब करीब क्लीन चिट जैसी मिल गई और उनके कारनामे फाइलों में दफन होकर रह गए।
शासन ने अल्पसंख्यक कल्याण के निदेशक के पद पर लगभग पिछले दो महीने पहले एक अधिकारी को तैनात किया था। इसके बाद इस अधिकारी ने अपने चहेतों को लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी और इसी क्रम में शिक्षा विभाग से उपसचिव के तैनात अधिकारी को अल्पसंख्यक विभाग में लाया गया। इसके अलावा एक अन्य अधिकारी को अन्य विभाग से लाया जा चुका है, जबकि महिला सशक्तिकरण विभाग से एक अन्य अधिकारी को लाने की तैयारी की जा रही है। अल्पसंख्यक विभाग में क्षेत्र अधिकारियों को तैनात कर करके मोटा माल निगलने की कूट रचना शुरू कर दी गई है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के द्वारा एक पांच दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित की गई थी। इस प्रदर्शनी के आयोजन में भी करोड़ों का हेर फेर होने की संभावना बढ़ रही है, क्योंकि इस प्रदर्शनी में जिन ठेकेदार के द्वारा काम किया गया था, उनके अब भुगतान करने का समय आ गया है। कुल मिलाकर अल्पसंख्यक विभाग में जिस तरीके से तैनाती अन्य विभागों से लाकर अधिकारियों की तैनाती की जा रही है, जिसके कारण भ्रष्टाचार की बू आनी शुरू हो गई है।
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