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चंडीगढ़। चंडीगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत (कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण), पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री शील नागू तथा माननीय न्यायमूर्ति श्री दीपक सिब्बल (कार्यकारी अध्यक्ष, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़) के संरक्षण में “डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest)” धोखाधड़ी के संबंध में एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान आरंभ किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य आम जनता, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनभोगियों को उभरते ऑनलाइन ठगी के तरीकों से जागरूक करना है, जिनमें साइबर अपराधी स्वयं को कानून प्रवर्तन या सरकारी अधिकारी बताकर भय, छल और दबाव के माध्यम से लोगों से धन की वसूली करते हैं। जागरूकता सामग्री में इन धोखाधड़ियों की कार्यप्रणाली, उनसे बचाव के उपायों और प्रभावित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध विधिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
इस अभियान के अंतर्गत जानकारीपूर्ण पंपलेट्स और पोस्टर्स को उन स्थानों पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा जहाँ आम जनता की अधिक या मध्यम आवाजाही रहती है — जैसे कि बैंक, अस्पताल, सरकारी कार्यालय, डाकघर, न्यायालय परिसर और अन्य सार्वजनिक संस्थान जिन्हें वरिष्ठ नागरिक, पेंशनभोगी तथा आम लोग अक्सर उपयोग करते हैं। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि साइबर सुरक्षा और विधिक सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी अधिकतम नागरिकों तक पहुँचे।
“Law Doesn’t Arrest Online : Protect Yourself and Your Loved Ones” विषय पर आधारित इस पंपलेट में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है कि कोई भी वास्तविक कानून प्रवर्तन एजेंसी या सरकारी विभाग कभी भी फोन कॉल, वीडियो कॉल या ऑनलाइन माध्यम से धन, व्यक्तिगत जानकारी या अनुपालन की मांग नहीं करता। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे शांत रहें, घबराएँ नहीं, और ऐसी किसी भी धोखाधड़ी की तुरंत शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या ऑनलाइन पोर्टल cybercrime.gov.in पर दर्ज करें।
इसके अतिरिक्त, पंपलेट में नि:शुल्क विधिक सहायता और सलाह की सुविधा के बारे में भी जानकारी दी गई है, जो NALSA हेल्पलाइन नंबर 15100 पर उपलब्ध है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से कॉल करने वाले को निःशुल्क कानूनी सलाह दी जाएगी और उन्हें निकटतम फ्रंट ऑफिस — जहाँ टालुका, जिला या उच्च न्यायालयों के रिटेनर लॉयर्स तैनात हैं — तक मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। यह सुविधा पूरे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से उपलब्ध है। जो व्यक्ति विधिक सहायता के मानदंडों के अंतर्गत आते हैं, उन्हें अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए नि:शुल्क विधिक सहायता (Free Legal Aid) भी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, पीड़ितों की शिकायतों को साइबर अपराध प्राधिकरणों के साथ समन्वय करके आगे बढ़ाने में भी सहायता दी जाएगी।
यह पहल चंडीगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की नागरिकों को जागरूकता, विधिक साक्षरता और न्याय तक पहुँच के माध्यम से सशक्त बनाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस प्रयास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिक विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक जागरूक, सतर्क और ऐसे साइबर अपराधों से सुरक्षित रहें।
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