नई दिल्ली, 2 दिसम्बर 2025 : राज्यसभा में आज शून्यकाल के दौरान माननीय सांसद श्री कार्तिकेय शर्मा ने देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में संरचित निजी भागीदारी को सक्षम बनाने का समय आ गया है।
श्री शर्मा ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक यात्रा, जिसका आरंभ डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. होमी भाभा जैसे महान वैज्ञानिकों के संकल्प से हुआ, आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी, जो केवल सरकारी संसाधनों से पूरा होना संभव नहीं है। इसलिए निजी नवाचार और निजी पूंजी को इस क्षेत्र में शामिल करना अनिवार्य है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को खोलने के निर्णय ने भारत में 200 से अधिक स्पेस-टेक स्टार्टअप्स का सशक्त इकोसिस्टम तैयार किया और वैश्विक निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। इसी तरह, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी एक संरचित, सुरक्षित और सुव्यवस्थित निजी भागीदारी, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को नई गति देगी।
श्री शर्मा ने इस महत्वपूर्ण तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि वर्तमान में भारत के कुल R&D व्यय में निजी क्षेत्र की भागीदारी मात्र 36 प्रतिशत है, जबकि अग्रणी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में यह दोगुने से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, तकनीकी विकास और रिएक्टर तैनाती में उद्योग की भागीदारी को सक्षम बनाकर भारत उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सही नीतिगत निर्णयों के साथ भारत के सामने एक परमाणु पुनर्जागरण का अवसर मौजूद है। उन्होंने हाल ही में घोषित न्यूक्लियर एनर्जी मिशन का उल्लेख करते हुए सरकार से अनुरोध किया कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी हेतु उसी तरह खोला जाए, जिस प्रकार अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल की गई थी।