परमार जयंती पर जयराम ठाकुर ने अर्पित किए श्रद्धा सुमन, बोले—परमार जी का योगदान बहुत बड़ा, इसलिए सम्मान में कार्यक्रम भी बड़े होने चाहिए
न्यूज़म ब्यूरो
शिमला, 4 अगस्त। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधानसभा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर हिमाचल निर्माता यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने पहाड़ जैसी चुनौतियों को पार करते हुए आज यह मुकाम हासिल किया है। प्रदेश की विकास यात्रा आगे भी जारी रहेगी, लेकिन आज हिमाचल जहां खड़ा है, वहां तक पहुंचने के लिए प्रदेश ने एक लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा तय की है। हिमाचल के गठन से लेकर पूर्ण राज्य बनने और विकास की गाथा लिखने में सबसे अहम भूमिका हिमाचल निर्माता यशवंत सिंह परमार की थी। उन्होंने जो सपने देखे, उनके द्वारा बनाई गई नीतियां और योजनाएं हिमाचल के विकास में मील का पत्थर साबित हुईं।
जयराम ठाकुर ने कार्यक्रम में हिमाचल की विकास यात्रा पर दिखाई गई डॉक्यूमेंट्री पर कहा कि सरकार ने हिमाचल की विकास यात्रा में परमार जी के योगदान के बाद अब सुक्खू सरकार के योगदान का जिक्र करना शुरू कर दिया है। जबकि परमार जी के कार्यकाल के बाद भी लगभग 50 वर्षों का कालखंड बीता है, जिसमें कई नेताओं ने हिमाचल के विकास में अपना योगदान दिया। सुखविंदर सिंह सुक्खू से पहले भी कई मुख्यमंत्री रहे, जिनमें से ज्यादातर कांग्रेस के ही थे, लेकिन उनके योगदान के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला गया। उन्हें अपने गुणगान के बजाय बाकी नेताओं के योगदान को भी रेखांकित करना चाहिए। जबकि पूर्व सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में सभी मुख्यमंत्रियों के योगदान को रेखांकित किया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री अपने योगदान के प्रचार में जुटे रहे, जबकि पूरा प्रदेश जानता है कि उनका क्या योगदान है। सरकारी कार्यक्रमों को इस तरह का राजनीतिक रंग देना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय यह कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित किए जाते थे, लेकिन व्यवस्था परिवर्तन की सरकार ने इन्हें अब फिर से सीमित कर दिया है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिमाचल की आर्थिकी से लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए परमार जी ने जो कार्य किए, हिमाचल का वर्तमान परिदृश्य उसी का प्रतिफल है। आज हिमाचल बागवानी और कृषि उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बना है, तो उसमें परमार जी की नीतियों और दूरदृष्टि का बड़ा योगदान है। जब हिमाचल का गठन हुआ, तब प्रदेश का कुल बजट लगभग 26 करोड़ रुपये था। उन्होंने हिमाचल में सड़कों का जाल बिछाने की दिशा में काम किया और प्रदेश के कुल बजट का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सड़क निर्माण पर खर्च किया, ताकि हिमाचल में सड़कों का व्यापक नेटवर्क तैयार हो सके। 18 वर्ष 83 दिन के अपने कार्यकाल में उन्होंने हिमाचल के विकास का जो पथ प्रशस्त किया, उस पर प्रदेश की विकास यात्रा अनवरत जारी रहेगी।
जयराम ठाकुर ने कहा कि 1948 में हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय मात्र ₹240 थी, जो अब बढ़कर ₹2.83 लाख हो गई है। प्रदेश की जीडीपी लगभग ₹27 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹2.64 लाख करोड़ हो गया है। साक्षरता दर 4.8 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 99.3 प्रतिशत हो गई है। प्रदेश में उस समय मात्र 228 किलोमीटर सड़कें थीं, जो अब बढ़कर 45,000 किलोमीटर से अधिक हो गई हैं। कृषि उत्पादन 954 मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 1,600 मीट्रिक टन हो गया है। खाद्यान्न उत्पादन 1.99 लाख मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 16 लाख मीट्रिक टन हो गया है। उस समय केवल 6 गांव विद्युतीकृत थे, जबकि आज प्रदेश का हर गांव विद्युतीकृत है। उस समय 331 गांवों में पेयजल सुविधा उपलब्ध थी, जबकि आज हर घर नल से जल पहुंचाने की दिशा में प्रदेश ने व्यापक प्रगति की है। प्रदेश में कुल 350 सरकारी और निजी शिक्षण संस्थान थे, जबकि आज लगभग 17,800 स्कूल हैं। ये उपलब्धियां हिमाचल प्रदेश के उत्तरोत्तर विकास की कहानी कहती हैं।
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