एचएसआईआईडीसी औद्योगिक प्लॉट्स के लिए ‘लैंड ऑन लीज’ नीति लागू करेगी : नायब सिंह सैनी
श्रम विभाग के लिए ₹91.80 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 2 मार्च : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि एचएसआईआईडीसी वर्ष 2026-27 में औद्योगिक प्लॉट्स के लिए ‘लैंड ऑन लीज’ नीति लागू करेगी, जिसके तहत ये प्लॉट दीर्घकालीन लीज पर उपलब्ध कराए जाएँगे और आवश्यकता होने पर इन्हें फ्री-होल्ड में परिवर्तित करने की सुविधा भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा आज हरियाणा विधानसभा में बजट पेश करते हुए की।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की आवंटित राशि को ₹1,327.76 करोड़ को 46.93% से बढ़ाकर वर्ष 2026-27 में ₹1,950.92 करोड़ तथा श्रम विभाग की आवंटित राशि को ₹89.65 करोड़ को 2.39% से बढ़ाकर ₹91.80 करोड़ करने का प्रस्ताव किया गया।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के बजट प्रस्ताव के अनुसार एवं संकल्प पत्र में घोषित 10 नए आईएमटी में से 2 आईएमटी अम्बाला और नारायणगढ़ के लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। तोशाम, जींद, रेवाड़ी, फरीदाबाद एव राई में आईएमटी विकसित करने के लिए ई-भूमि पोर्टल पर किसानों से प्रस्ताव मांग लिए गए है।
पिछले बजट में 12 औद्योगिक नीतियों के नए प्रारूप बनाने की घोषणा की थी। इनके नये प्रारूप तैयार कर लिए गए हैं। साथ ही, एक नई सैमी कंडक्टर नीति, फार्मासुटिकल और मेडिकल डिवाइस नीति और टॉयज एवं स्पोर्टस इंक्पयूमेंट नीति के तथा एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) नीति के प्रारूप भी तैयार कर लिए गए है। इन सभी को वर्ष 2026-27 में लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए उद्योगों की स्थापना और इकाइयों के शीघ्र परिचालन को बढ़ावा देने के लिए, HSIIDC द्वारा राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के साथ तैयार औद्योगिक फैक्ट्रियां और शेड भी विकसित किए जाएंगे।
निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए लैंड फीजिबिलिटी सर्टिफिकेट व्यवस्था शुरू की जाएगी, जिसके तहत निवेशकों को 45 कार्य-दिवसों के भीतर एक डिजिटल प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। इसके आधार पर निवेशक आगे
निर्माण तथा पर्यावरण से संबंधित अनुमतियां आसानी और स्पष्टता के साथ प्राप्त कर सकेंगे।
नायब सिंह सैनी ने बताया कि कोविड के बाद उपजी कठिनाईयों का आज तक सामना कर रहे एचएसआईआईडीसी के 500 से अधिक प्लॉट धारकों पर रिजंपशन की तलवार लटकी हुई है। उन्हें विशेष राहत देते हुए निर्माण की समय सीमा 31 दिसम्बर, 2026 तक बढ़ाई जाएगी।
निवेशकों को विभिन्न विभागों के चक्कर न लगाने पड़े, इसके लिए फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर एवं रेवाड़ी में सभी संबंधित विभागों के Common Industrial Secretariats बनाने का भी प्रस्ताव किया गया।
उन्होंने बताया कि हमने संकल्प लिया था कि महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने हेतु हम उनकी भागीदारी 45% से बढ़ाकर 60% करेंगे। वर्तमान में हम 51% तक पहुँच चुके हैं और तेजी लाने के लिए नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच का हरियाणा चैप्टर शीघ्र शुरू करने का भी प्रस्ताव है। कामकाजी महिलाओं के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में 10 आधुनिक मातृ-शक्ति औद्योगिक क्रेच नेटवर्क शुरू किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थाओं द्वारा समय पर भुगतान न किए जाने की स्थिति में संबंधित पक्ष को 8% की दर से ब्याज का भुगतान करने के हमारे संकल्प को पूरा करते हुए वर्ष 2026-27 से यदि उद्योग विभाग के किसी भी देय भुगतान में 1 अप्रैल, 2026 के बाद विलंब होने पर देय तिथि से 8% वार्षिक ब्याज दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोत्साहन राशि के निपटान में पारदर्शिता, निश्चितता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए इंवेस्ट हरियाणा पोर्टल पर आवेदन जमा होने के बाद, प्रारंभिक जाँच के आधार पर प्रोत्साहन राशि का 50% भाग 7 कार्य-दिवसों में अग्रिम रूप से जारी किया जाएगा। आवेदन की विस्तृत जाँच पूरी होने पर शेष 50% पात्र प्रोत्साहन राशि भी 45 कार्य-दिवसों के भीतर दे दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि निवेशकों की चितांओ के निवारण हेतु एक ‘एडवांस रूलिंग पोर्टल’ बनाया जाएगा, जिसमें हर संबंधित विभाग को 15 दिनों के अंदर निवेशकों के प्रश्नों का समुचित समाधान करना होगा।
उन्होंने आगे बताया कि छोटे व्यापारियों और एमएसएमई इकाइयों की दुर्घटनाओं तथा दूसरे जोखिम से निपटने की सीमित क्षमता को ध्यान में रखते हुए एक समर्पित Small Traders and MSME Insurance Scheme शुरू की जाएगी। यह योजना आग, चोरी तथा प्राकृतिक आपदाओं जैसे जोखिमों के विरुद्ध किफायती बीमा कवरेज प्रदान करेगी। एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए राज्य के प्रत्येक औद्योगिक एस्टेट में एमएसएमई के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किया जाएगा।
श्रमिकों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए हाईवे के पास स्थित प्रत्येक आईएमटी में आने जाने के लिए फुट ओवर ब्रिज का निर्माण करने का भी निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पानीपत में स्थित टेक्सटाइल इंडस्ट्री की लंबे समय से मांग रही है कि वहां केंद्रीय स्तर का एक ट्रेनिंग हैंडलूम इंस्टीट्यूट स्थापित किया जाए। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैंडलूम टेक्नोलॉजी (IIHT) के लिए एचएसआईआईडीसी द्वारा 10 एकड़ भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में रोजगार व व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए राई में देश का सबसे बड़ा होलसेल मार्केट कॉम्प्लेक्स तथा उत्तर भारत का सबसे बड़ा मार्बल मार्केट क्लस्टर विकसित किया जाएगा।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Wed in India की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए गुरुग्राम एवं खरखौदा में HSIIDC द्वारा तथा पिंजौर में पर्यटन विभाग द्वारा एक-एक Wedding City स्थापित किया जाएगा। ये सगाई से विदाई तक के कॉन्सेप्ट पर कार्य करेंगी तथा इससे वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के अनेक नए अवसर उत्पन्न होंगे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में एचएसआईआईडीसी द्वारा एससी श्रेणी के प्लॉट धारकों को परियोजना पूर्ण होने के उपरांत प्लॉट लागत में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है। आगामी वित्त वर्ष से इसी तर्ज पर ओबीसी श्रेणी के प्लॉट धारकों को भी प्लॉट लागत में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में राज्य से मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट केवल ₹32,086 करोड़ था। आज, सरकार की दूरदर्शी नीतियों, उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तथा मजबूत आधारभूत ढांचे के परिणामस्वरूप वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर ₹1,61,707 करोड़ के अभूतपूर्व स्तर तक पहुँच गया है। अर्थात् पिछले एक दशक में राज्य के निर्यात में लगभग 395% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राज्य आज केवल उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार मानचित्र पर एक सशक्त निर्यात हब के रूप में उभर रहा है। निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए हमेशा तैयार रखने हेतु जो औद्योगिक इकाइयां अपने उत्पाद का 80% से अधिक निर्यात करती हैं, उन्हें राज्य सरकार द्वारा विशेष मान्यता दी जाएगी। निर्यातकों को Export Boosters प्रदान किए जाएंगे। Export Freight Subsidy Support की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख प्रति यूनिट प्रति वर्ष की जायेगी। प्रत्येक जिले में MSME एवं Export Facilitation Desks बनाए जाएंगे ताकि एमएसएमई इकाइयों और निर्यातकों को बाज़ार तक पहुँच के लिए एक ही स्थान पर single-point, end-to-end सुविधा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एमएसएमई उद्यमों को वैश्विक कंपनियों से जोड़ने हेतु एक MSME-Global Industry Matchmaking Programme शुरू किया जाएगा।
प्रदेश के इतिहास में पहली बार केवल MSME के लिए Reverse Buyer-Seller Meet का आयोजन किया जाएगा जिसमें वैश्विक खरीदारों और OEM कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे हमारी एमएसएमई इकाइयों से सीधे संवाद कर सके।
उन्होंने बताया कि हरियाणा की MSME और स्टार्टअप्स की सुविधा हेतु प्रत्येक जिले में कम से कम दो Plug and Play क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे।
श्रम विभाग के लिए खास तोहफ़े
मुख्यमंत्री ने बताया कि सभी दुकानों एवं वाणिज्यिक संस्थानों का स्वतः पंजीकरण आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से किया जाएगा। केंद्र सरकार की 4 श्रम संहिताओं (मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता-2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 एवं व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य और कार्य शर्ते संहिता-2020) के लिए नियम बनाकर लागू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि गांव हरसरू, कादीपुर, वजीराबाद, शाहबाद मारकण्डा व फतेहाबाद में पांच नई ईएसआई डिस्पैसरी खोली जाएगी। वर्तमान में मानेसर में संचालित 100 बिस्तर वाले ईएसआईसी अस्पताल को 200 बिस्तर में अपग्रेड करके यहां एक नया मैडिकल कॉलेज बनाया जाएगा।
श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किया जाएगा। यह विद्यालय कक्षा 6 से 12 तक संचालित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक शैडों पर लगने वाले निर्माण उपकर (Cess) मानक लागत मूल्यांकन पर आधारित है। यह मानक मूल्याकंन उच्च दर के होने के कारण अधिक Building Cess देना पड़ता है। सभी मानक मूल्यांकनों की समीक्षा उपरांत Building Cess को कम किया जाएगा।
औद्योगिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक समेकित Surakshit Shramik Swasthya System (4S) की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके अंतर्गत राज्य के सभी औद्योगिक श्रमिकों को प्रत्येक साल निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था होगी।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को भी व्यापक स्वास्थ्य सेवायें निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी जिसमें OPD, IPD व दवाईयां एवं Occupational Health Checkup शामिल रहेंगे।