
कॉन्क्लेव के प्रमुख सत्रों में से एक ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष प्रस्तुति रही। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कुमार साहनी ने इस मिशन की वैज्ञानिक एवं रणनीतिक तैयारियों का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर नौ महत्त्वपूर्ण लक्ष्यों की पहचान की गई और कैसे स्वदेशी तकनीकों तथा एआई-सक्षम विश्लेषण प्रणालियों का उपयोग करते हुए इस मिशन को उच्च स्तर की सटीकता के साथ कार्यान्वित किया गया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक क्षमताओं का प्रतीक है, जो राष्ट्रीय रक्षा तैयारी को मजबूती प्रदान करती है।


कार्यक्रम में आयोजित विज्ञान चौपाल सत्र में ग्रामीण, आदिवासी और सामुदायिक स्तर पर विज्ञान संचार को मजबूत बनाने की जरूरत पर विशेष ध्यान दिया गया। इस सत्र की अध्यक्षता और संचालन प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार, विभागाध्यक्ष, स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन, भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली ने किया। वक्ताओं ने स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों में आधारित संचार मॉडल विकसित करने, वैज्ञानिक जानकारी को सहज रूप में प्रस्तुत करने और समाज के सभी वर्गों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जमीनी स्तर पर विज्ञान संचार को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है।
साइंस एंड टेक्नोलॉजी मीडिया एंड कम्युनिकेटर्स कॉन्क्लेव 2025 ने वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित, नैतिक और सर्वसमावेशी विज्ञान संचार के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। कल कॉन्क्लेव के अंतर्गत स्वतंत्रता पूर्व भारत के प्रख्यात विज्ञान संचारक प्रो. रुचि राम साहनी को समर्पित एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें उनके विशिष्ट योगदान और भारत में विज्ञान संचार को आकार देने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला जाएगा।