Follow

किलो के भाव से किताबों की बिक्री पर विवाद, भाजपा नेता ने जताई नाराजगी

सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार को पत्र लिखकर की कार्रवाई की मांग, कहा- साहित्य और महान लेखकों की कृतियों का हो रहा अपमान

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 07 नवंबर। किताबों को किलो के भाव से बेचने के विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मुंबई के पूर्व नगरसेवक प्रवीण छेड़ा ने इस तरीके पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार को पत्र लिखा है। उन्होंने व्यावसायिक लाभ के लिए पुस्तकों और महान लेखकों की साहित्यिक कृतियों को वजन के आधार पर बेचने की प्रथा को महाराष्ट्र की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा का अपमान बताया है। साथ ही आयोजकों के खिलाफ उचित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है।

अखबार के विज्ञापन पर जताई आपत्ति

प्रवीण छेड़ा ने अपने पत्र में बताया कि हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार में ‘स्वदेशी आर्ट एंड क्राफ्ट सिल्क एंड कॉटन एक्सपो’ का विज्ञापन प्रकाशित हुआ है। इस प्रदर्शनी में बुक फेयर का भी आयोजन किया गया है, जिसके प्रचार में ‘BOOKS BUY KILO’ यानी किलो के भाव से किताबें खरीदने का उल्लेख किया गया है। छेड़ा ने कहा कि एक जागरूक पाठक और नागरिक के रूप में इस तरह का विज्ञापन देखकर उन्हें गहरा आघात पहुंचा है।

Advertisement

साहित्य का मूल्य वजन से तय करना अनुचित

छेड़ा के अनुसार, पुस्तकें, उत्कृष्ट साहित्य और महान कवियों एवं लेखकों की रचनाएं महाराष्ट्र तथा देश की सांस्कृतिक विरासत का अनमोल हिस्सा हैं। साहित्य केवल बिक्री की वस्तु नहीं, बल्कि ज्ञान, विचार और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। ऐसे में पुस्तकों की तुलना कबाड़ या रद्दी से करते हुए उन्हें किलो के भाव से बेचना साहित्य के सम्मान को ठेस पहुंचाता है।

नई पीढ़ी पर पड़ सकता है असर

उन्होंने चिंता जताई कि इस तरह की व्यावसायिक प्रचार पद्धति से नई पीढ़ी में पुस्तकों और साहित्य के प्रति सम्मान एवं उनके वास्तविक मूल्य की भावना कमजोर हो सकती है। साहित्यिक कृतियों का महत्व उनके वजन से नहीं, बल्कि उनमें निहित ज्ञान, विचार और रचनात्मकता से निर्धारित होता है।

आयोजकों पर कार्रवाई और नियमावली बनाने की मांग

सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार से छेड़ा ने आग्रह किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित आयोजकों और इस प्रकार की बिक्री पद्धति के खिलाफ उचित कानूनी अथवा प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने सरकार से साहित्य का सम्मान बनाए रखने के लिए उचित नियमावली तैयार करने की भी मांग की है।

छेड़ा ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

पढ़ने के लिए धन्यवाद

आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।

Advertisement
↑
Tap to Refresh