15 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी देकर साइबर ठगों ने बुजुर्ग को चार बैंक खातों में रकम जमा कराई।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 6 नवंबर। साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर 79 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। कथित पुलिस पूछताछ के नाम पर उन्हें वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क में रखा गया और इस दौरान उनसे 1 करोड़ 10 लाख 50 हजार रुपये ठग लिए गए। मामले में उत्तर विभागीय साइबर पुलिस ने उस कंपनी के निदेशक को गिरफ्तार किया है, जिसके बैंक खाते में ठगी की रकम के 71 लाख रुपये जमा हुए थे।
फ्रॉड का शिकार हुए हरिवंदन दह्याभाई टेलर अंधेरी के आजाद नगर इलाके में रहते हैं। पुलिस के अनुसार, यह मामला 25 सितंबर से शुरू हुआ, जब एक अनजान व्यक्ति ने उन्हें फोन किया।
15 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी
फोन करने वाले ने खुद को नासिक के पंचवटी पुलिस थाने का अधिकारी बताया। उसने बुजुर्ग से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नासिक में एक बैंक खाता खोला गया है। इस खाते का संबंध 15 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले से है।
आरोप लगाया गया कि इस लेन-देन के बदले उन्हें 2 करोड़ रुपये कमीशन मिला है और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों ने जांच में सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी की धमकी दी।
इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए पुलिस पूछताछ का नाटक किया गया। ठगों ने बुजुर्ग को लगातार कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया। उन्हें यह भी धमकी दी गई कि यदि उन्होंने इस मामले की जानकारी परिवार के सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति को दी तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस डर से उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया।
चार बैंक खातों में जमा कराए 1.10 करोड़ रुपये
कुछ समय बाद आरोपियों ने बुजुर्ग से उनके बैंक खातों, निवेश और संपत्ति की जानकारी ली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद उनकी रकम वापस कर दी जाएगी। इसके लिए उन्हें चार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करने को कहा गया।
बुजुर्ग ने आरोपियों के निर्देश पर पहले 29 लाख रुपये, फिर 42 लाख रुपये, इसके बाद 9 लाख 50 हजार रुपये और अंत में 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इस तरह कुल 1 करोड़ 10 लाख 50 हजार रुपये उनके खातों से निकल गए।
वीडियो कॉल पर कथित पूछताछ खत्म होने के बाद भी जब रकम वापस नहीं मिली तो उन्हें संदेह हुआ। उन्होंने अपनी आवासीय सोसायटी के एक पदाधिकारी को पूरी बात बताई। इसके बाद ठगी का पता चला और उन्होंने उत्तर विभागीय साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
कंपनी के निदेशक को किया गिरफ्तार
पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी संबंधी धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बैंक लेन-देन की पड़ताल में पता चला कि ठगी की रकम में से 71 लाख रुपये वृषिका एग्री एंड डेयरीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में जमा हुए थे।
इसके बाद पुलिस ने कंपनी के निदेशक वृषभनाथ धनपाल तारडाळे को गिरफ्तार किया। वह मूल रूप से कर्नाटक का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया था। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
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