फर्जी पहचान पत्रों के जरिए सरकारी वेतन के करोड़ों रुपये हड़पने के मामले की अब सीआईडी की निगरानी में जांच, 12 स्थानों पर पड़ताल जारी।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 11 अक्टूबर। महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग में फर्जी शालार्थ पहचान पत्र बनाकर सरकारी वेतन के करोड़ों रुपये हड़पने के मामले में राज्य सरकार ने जांच तेज करने का फैसला किया है। नासिक से सामने आए इस घोटाले की कड़ियां राज्य के कई जिलों तक पहुंचने के बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया था। लेकिन बार-बार समयसीमा बढ़ाने के बावजूद जांच में अपेक्षित तेजी नहीं आने पर अब राज्य अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की निगरानी में पड़ताल की जा रही है। पुणे में तैनात सीआईडी के विशेष पुलिस महानिरीक्षक सुधीर हिरेमठ के नेतृत्व में राज्य के 12 स्थानों पर चल रही जांच को दिशा दी जा रही है।
एसआईटी की जांच धीमी पड़ने के बाद फैसला
राज्यभर में घोटाले की व्यापकता सामने आने के बाद सरकार ने 7 अगस्त 2025 को राज्यस्तरीय एसआईटी का गठन किया था। तत्कालीन पुणे संभागीय आयुक्त चंद्रकांत पुलकुंडवार के नेतृत्व में पुलिस महानिरीक्षक मनोज शर्मा और शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक हारून अत्तार ने जांच की जिम्मेदारी संभाली थी।
कुछ दिन पहले पुलकुंडवार का पुणे से मंत्रालय में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव पद पर तबादला हो गया। इसके बाद एसआईटी की जांच की रफ्तार फिर धीमी पड़ गई और दल के नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हुई। विभाग ने दो महीने में जांच पूरी करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण अब सीआईडी की निगरानी में जांच आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
डिजिटल सबूत जुटाने पर जोर
जांच में सामने आया कि ऑनलाइन शालार्थ प्रणाली में कथित तौर पर अपात्र शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए। उनके नाम पर फर्जी शालार्थ पहचान पत्र तैयार कर सरकारी खजाने से वेतन निकालने का आरोप है।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ऑनलाइन जमा किए गए दस्तावेज किन उपयोगकर्ता खातों से भेजे गए और इसके लिए किन आईपी पतों का इस्तेमाल हुआ। इसके लिए डिजिटल और तकनीकी फॉरेंसिक सबूत जुटाए जा रहे हैं।
फिलहाल नासिक जिले में दो, पुणे जिले में दो, ग्रामीण क्षेत्रों में छह, जबकि जलगांव और नवी मुंबई में एक-एक स्थान पर जांच चल रही है। इस तरह कुल 12 स्थानों पर पड़ताल की जा रही है।
8 मामलों में आरोपपत्र दाखिल
राज्य में चल रहे 12 मामलों में से आठ में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। नागपुर जिले के मामले में अपराध शाखा के साइबर सेल ने अब तक एक मुख्य और दो पूरक आरोपपत्र पेश किए हैं।
वहीं, नासिक की जांच टीम ने नासिक, जलगांव, धुले और नंदुरबार जिलों के 229 स्कूलों के रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। इसके अलावा 179 प्रधानाध्यापकों से पूछताछ की गई है।
इस घोटाले में अब तक 55 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से अधिकांश आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं। वहीं, अन्य 610 शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की आशंका बनी हुई है।
12 जांच दलों के बीच समन्वय की तैयारी
सीआईडी ने राज्य के 12 जांच दलों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए चार अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। ये अधिकारी घोटाले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत एकत्र कर रहे हैं। इन सबूतों की समीक्षा और ऑडिट के बाद राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
सीआईडी के विशेष पुलिस महानिरीक्षक सुधीर हिरेमठ के अनुसार, जांच में एकरूपता लाने और विभिन्न जिलों में चल रही पड़ताल को दिशा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
क्या है शालार्थ घोटाला?
महाराष्ट्र में शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए शालार्थ ऑनलाइन प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। आरोप है कि इस प्रणाली में अपात्र कर्मचारियों के नाम जोड़कर उनके फर्जी पहचान पत्र बनाए गए और इनके जरिए सरकारी धन का भुगतान कराया गया।
नासिक से सामने आए इस मामले की जांच के दौरान नागपुर, जलगांव, नंदुरबार, बीड, लातूर और मुंबई सहित कई जिलों तक इसकी कड़ियां सामने आने की बात कही गई थी। मामले की जांच अभी जारी है और घोटाले में शामिल लोगों तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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