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IIT बॉम्बे छात्र की मौत पर बोले अभिजीत दीपके, ‘दूरदराज के इलाकों से मुंबई तक फैला है संकट’

सीजेपी नेता ने छात्रों की सुरक्षा और प्राथमिकता को लेकर सवाल उठाए, वहीं IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद 400 से अधिक छात्रों ने प्रदर्शन किया

राहुल गुप्ता
मुंबई, 19 सितंबर।

IIT बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के छात्र की मौत के बाद कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इस मामले पर सीजेपी के अभिजीत दीपके ने छात्रों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दूरदराज के आदिवासी इलाकों से लेकर मुंबई जैसे बड़े शहरों तक छात्र अपनी जान गंवा रहे हैं और यह संकट व्यापक है।

दीपके ने सवाल उठाया कि छात्रों की जिंदगी को प्राथमिकता देने के लिए और कितने छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी। शुक्रवार देर रात IIT बॉम्बे के छात्रों ने भी छात्र की मौत को लेकर प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन में 400 से अधिक छात्र शामिल हुए।

परीक्षा में ChatGPT के इस्तेमाल के बाद छात्र की मौत

IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की शुक्रवार शाम मौत हो गई थी। संस्थान के मुताबिक, परीक्षा के दौरान छात्र को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया था और उसने प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर हासिल करने की कोशिश की थी। संस्थान ने कहा है कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।

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छात्रों ने इस मामले में प्रशासन से जवाब मांगे हैं। प्रदर्शनकारियों की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई के दबाव का दावा किया गया है, जबकि संस्थान ने कहा है कि ऐसी कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। इन अलग-अलग दावों की परिस्थितियों की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं।

अभिजीत दीपके ने छात्रों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने कहा कि छात्रों की मौत का मुद्दा केवल किसी एक संस्थान या शहर तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में भी छात्र प्रभावित हो रहे हैं और मुंबई जैसे महानगर में भी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

उन्होंने छात्रों की जिंदगी और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके लिए और कितने छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी।

यूपीआई शुल्क को लेकर भी सरकार पर निशाना

अभिजीत दीपके ने इससे पहले यूपीआई के 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की और कहा कि नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया था, लेकिन अब डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाया जा रहा है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया एमडीआर टैक्स नहीं है और यह सीधे सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं होगा। 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन इससे प्रभावित नहीं होंगे और 2,000 रुपये तक के भुगतान भी सामान्य तौर पर शुल्क से बाहर रहेंगे।

छोटे कारोबारियों पर असर को लेकर चिंता

यूपीआई एमडीआर को लेकर व्यापारिक संगठनों और कुछ नेताओं ने छोटे कारोबारियों पर संभावित असर की चिंता जताई है। उनका कहना है कि अतिरिक्त शुल्क से छोटे दुकानदारों और अन्य कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।

वहीं, सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेन-देन नए ढांचे से प्रभावित नहीं होंगे। 75,000 रुपये या उससे अधिक के निर्धारित लेन-देन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।

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