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Punjab Drug Crisis : ‘चिट्टा’ शब्द को लेकर हरपाल चीमा ने उठाए सवाल

Harpal Cheema addresses the media on the Punjab Drug Crisis and the ‘Chitta’ issue Harpal Cheema addresses the media on the Punjab Drug Crisis and the ‘Chitta’ issue
Harpal Cheema addresses the media on the Punjab Drug Crisis and the ‘Chitta’ issue

Punjab Drug Crisis को लेकर हरपाल सिंह चीमा ने 2007 से 2017 के अकाली-भाजपा शासन पर सवाल उठाए

उन्होंने ‘चिट्टा’, नशा तस्करी और सीमा पार से आने वाले नशे का मुद्दा उठाया

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 16 सितंबर | Punjab Drug Crisis पर हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र और पिछली सरकारों की भूमिका पर सवाल किए। उन्होंने पाकिस्तान सीमा, गुजरात और राजस्थान से जुड़े नशा तस्करी के मामलों का भी जिक्र किया।

Cabinet Minister Harpal Cheema
Cabinet Minister Harpal Cheema

Punjab Drug Crisis पर 2007-2017 का जिक्र

हरपाल चीमा ने 2007 से 2017 के बीच की सरकार का जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि इस दौरान ‘चिट्टा’ शब्द आम चर्चा का हिस्सा बना।
उनके मुताबिक, नशे की समस्या को लेकर पंजाब में चिंता बढ़ी थी।

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चीमा ने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर दबाव था।
उन्होंने एक जांच अधिकारी के तबादले का भी जिक्र किया।
हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध बयान से नहीं होती।

इससे पहले भी चीमा ने 2007-2017 के अकाली-भाजपा शासन को नशे से जोड़ा है।
फरवरी 2026 में उन्होंने इसी अवधि में नशे के फैलाव का आरोप लगाया था।

‘चिट्टा’ को लेकर पंजाब की सियासत

पंजाब में ‘चिट्टा’ और नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है।
विभिन्न दलों ने अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल पर नशे को लेकर आरोप लगाए हैं।
हाल के दिनों में यह मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है।

सितंबर 2026 में संगरूर के गुलजार सिंह की मौत के बाद विवाद बढ़ा।
गुलजार सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में नशे की उपलब्धता का मुद्दा उठाया था।
इसके बाद उनकी मौत को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए।

चीमा ने गुलजार सिंह की मौत से किसी संबंध से इनकार किया है।
मामले की जांच जारी है और इससे जुड़ी अलग-अलग राजनीतिक दलीलें सामने आई हैं।

Punjab Drug Crisis पर केंद्र से भी सवाल

Punjab Drug Crisis: Questions Also Raised with the Centre
Punjab Drug Crisis: Questions Also Raised with the Centre

चीमा ने नशा तस्करी के मुद्दे पर केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने पाकिस्तान सीमा के जरिए होने वाली तस्करी का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि सीमा पार से आने वाले नशे को रोकना जरूरी है।

पंजाब पुलिस ने सीमा क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी बढ़ाई है।
सितंबर में पुलिस ने नए ड्रोन पहचान उपकरण भी तैनात किए हैं।
पुलिस के अनुसार, सीमा पार से आने वाली हेरोइन की उपलब्धता में कमी आई है।
इसके साथ फार्मास्यूटिकल नशे नई चुनौती के रूप में सामने आए हैं।

गुजरात और राजस्थान का भी उठाया मुद्दा

चीमा ने गुजरात और राजस्थान का जिक्र करते हुए भी सवाल उठाए।
उन्होंने इन राज्यों से जुड़ी नशा तस्करी की घटनाओं का संदर्भ दिया।

हालिया रिपोर्टों में राजस्थान सीमा के पास ड्रोन के जरिए नशा पहुंचाने का मामला सामने आया।
श्रीगंगानगर में पुलिस ने हेरोइन और अफीम की खेप बरामद की थी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी सितंबर में गुजरात से जुड़े नशा मामलों का उल्लेख किया था।
उन्होंने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर हुई बड़ी हेरोइन बरामदगी का संदर्भ दिया।

नशे के खिलाफ अभियान पर भी चर्चा

पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान चलाया है।
सरकार के अनुसार, इस अभियान के तहत बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए हैं।
सरकार ने सीमा क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी और पुलिस कार्रवाई बढ़ाने की बात कही है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, हेरोइन की आपूर्ति में बदलाव देखा गया है।
पंजाब पुलिस अब फार्मास्यूटिकल नशों को नई चुनौती मान रही है।

वहीं विपक्षी दल पंजाब सरकार की नशा नीति पर सवाल उठाते रहे हैं।
भाजपा ने भी हाल में सरकार पर नशे को रोकने में विफल रहने के आरोप लगाए।

इस तरह Punjab Drug Crisis को लेकर पंजाब में राजनीतिक बहस जारी है।
सत्तापक्ष और विपक्ष नशा तस्करी को लेकर अलग-अलग दावे सामने रख रहे हैं।
इस बीच पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई भी लगातार जारी है।

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