Haryana Crime Monitoring :
हरियाणा पुलिस ने सक्रिय अपराधियों पर निगरानी बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है
आरजेएसएफ पैटर्न के तहत 45,207 सक्रिय अपराधियों का डेटाबेस तैयार हुआ है
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 14 सितंबर | हरियाणा पुलिस का इंटेलिजेंस आधारित अपराध निगरानी मॉडल अब पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। 1 फरवरी से 25 अगस्त 2026 तक 45,207 सक्रिय अपराधियों का डेटाबेस तैयार किया गया। इनमें 26,026 अपराधियों का सत्यापन पूरा हो चुका है। जांच में 7,425 अपराधी अपने पते पर मिले। वहीं 1,612 अपराधी जेल में पाए गए और 375 की मृत्यु हो चुकी है। पुलिस ने 6,762 अपराधियों का एफआरएस डेटा भी अपलोड किया है। अधिकारियों को रिकॉर्ड लगातार अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य अपराधियों की गतिविधियों और नेटवर्क पर समय रहते कार्रवाई करना है।
हरियाणा पुलिस ने तेज की अपराधियों की निगरानी
हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए आरजेएसएफ पैटर्न को पूरे प्रदेश में मजबूत किया जा रहा है।
इस मॉडल के तहत सक्रिय अपराधियों की पहचान की जा रही है। उनकी वर्तमान स्थिति और आपराधिक रिकॉर्ड का भी सत्यापन हो रहा है।
पुलिस के अनुसार, 1 फरवरी से 25 अगस्त 2026 तक बड़ा डेटाबेस तैयार हुआ है। इसमें कुल 45,207 सक्रिय अपराधियों की जानकारी शामिल है।
इनमें से 26,026 अपराधियों की जांच पूरी हो चुकी है। इस तरह कुल चिन्हित अपराधियों में 57.57 प्रतिशत का सत्यापन पूरा हुआ है।
डीजीपी अजय सिंघल ने दिए डेटा आधारित पुलिसिंग के निर्देश
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने अधिकारियों को अहम निर्देश दिए हैं। उन्होंने अपराध नियंत्रण में डेटा आधारित पुलिसिंग को प्राथमिकता देने को कहा।
उन्होंने कहा कि अपराध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। ऐसे में पुलिसिंग को तकनीक और खुफिया जानकारी से जोड़ना जरूरी है।
अपराधियों की स्थिति और गतिविधियों की जानकारी लगातार अपडेट होनी चाहिए। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीजीपी ने कहा कि अपराधी की सही पहचान पुलिस के लिए जरूरी है। उसकी वर्तमान स्थिति और गतिविधियों की जानकारी भी उपलब्ध होनी चाहिए।
पुलिस का लक्ष्य केवल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपराध को पहले रोकना भी उद्देश्य है।
45,207 अपराधियों में से 26,026 का सत्यापन पूरा
आरजेएसएफ पैटर्न के तहत साप्ताहिक जांच की जा रही है। इसमें सक्रिय अपराधियों की वर्तमान स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है।
अब तक 26,026 अपराधियों की स्थिति सत्यापित हो चुकी है। जांच के दौरान 7,425 अपराधी अपने दर्ज पते पर मिले।
वहीं 1,612 अपराधी जेल में पाए गए। जांच में 375 अपराधियों की मृत्यु की जानकारी सामने आई।
इस प्रक्रिया से पुलिस को अपडेटेड जानकारी मिल रही है। इससे अपराधियों की निगरानी और कार्रवाई ज्यादा प्रभावी हो सकेगी।
अभी 19,137 अपराधियों का सत्यापन बाकी है। इनकी जांच प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
डिजिटल रिकॉर्ड से निगरानी होगी मजबूत
पुलिस अब अपराधियों के डिजिटल रिकॉर्ड को भी मजबूत कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 6,762 अपराधियों का एफआरएस डेटा अपलोड हुआ है।
इससे अपराधियों की पहचान और निगरानी में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा। पुलिस रिकॉर्ड और खुफिया सूचनाओं को भी आपस में जोड़ा जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, इससे फील्ड पुलिसिंग को बेहतर बनाया जा सकेगा। किसी गतिविधि में बदलाव मिलने पर पुलिस जल्दी कार्रवाई कर सकेगी।
चार जिलों से शुरू हुआ था आरजेएसएफ मॉडल
आरजेएसएफ मॉडल की शुरुआत चार संवेदनशील जिलों से हुई थी। इनमें रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद शामिल थे।
इस मॉडल में अपराधियों की प्रोफाइलिंग पर ध्यान दिया गया। उनकी वर्तमान स्थिति और आपराधिक नेटवर्क की भी जांच की गई।
फील्ड स्तर पर निगरानी को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया। इसके परिणामों के बाद मॉडल को दूसरे जिलों तक बढ़ाया गया।
अब प्रदेशभर में डेटा आधारित अपराध निगरानी को मजबूत किया जा रहा है।
कई जिलों में 90 प्रतिशत से ज्यादा जांच पूरी
रोहतक, झज्जर और फरीदाबाद में 100 प्रतिशत जांच पूरी हो चुकी है। हिसार में 99.11 प्रतिशत जांच पूरी होने की जानकारी है।
सोनीपत में 93.13 प्रतिशत अपराधियों का सत्यापन पूरा हुआ है। सिरसा में यह आंकड़ा 81.97 प्रतिशत है।
कैथल में 68.43 प्रतिशत जांच पूरी हुई है। जींद में 62.82 प्रतिशत अपराधियों का सत्यापन हो चुका है।
फतेहाबाद में 57.49 प्रतिशत जांच पूरी होने की जानकारी दी गई है। पुलिस बाकी मामलों में भी सत्यापन प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
अपराध से पहले कार्रवाई पर जोर
हरियाणा पुलिस अब अपराध के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती। संभावित अपराध की परिस्थितियों की पहले पहचान पर जोर है।
नियमित जांच से सक्रिय अपराधियों की पहचान आसान होगी। इससे जेल में बंद अपराधियों की स्थिति भी स्पष्ट रहेगी।
फरार अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। आपराधिक नेटवर्क और नए संपर्कों की पहचान भी की जाएगी।
जिलों के बीच डेटा साझा करने पर जोर
पुलिस डेटाबेस से जिलों के बीच सूचना साझा करना आसान होगा। अपराधियों की गतिविधियां एक जिले तक सीमित नहीं रहतीं।
इसलिए एक जिले की जानकारी दूसरे जिले के लिए भी उपयोगी हो सकती है। आरजेएसएफ पैटर्न इस समन्वय को मजबूत करने में मदद करेगा।
इससे अंतर-जिला निगरानी और त्वरित कार्रवाई बेहतर होने की उम्मीद है। पुलिस का फोकस अब तकनीक, खुफिया जानकारी और डेटा पर है।
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