₹22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ ₹6.5 करोड़ का भुगतान
न्यूज़म ब्यूरो
नई दिल्ली। मीडिया कारोबारी और जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के फैसले को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। NCLT ने करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत दावों के मुकाबले महज ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली योजना को मंजूरी दी है। यानी कर्जदाताओं को उनके दावों का करीब 0.03 प्रतिशत ही वापस मिलेगा और लगभग 99.97 प्रतिशत की ‘हेयरकट’ स्वीकार करनी होगी।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने NCLT को तंज कसते हुए ‘Neta-Company Loot Tribunal’ करार दिया और आरोप लगाया कि देश में आम लोगों और बड़े कारोबारियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाई जा रही है।

रिपोर्टों के मुताबिक, भुगतान योजना को कर्जदाताओं के 80.81 प्रतिशत वोटिंग समर्थन के बाद मंजूरी मिली, हालांकि कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने बेहद कम वसूली पर आपत्ति जताई थी। NCLT के तीसरे सदस्य ने इन आपत्तियों के बावजूद योजना को मंजूरी दी।
कांग्रेस ने फैसले को लेकर सरकार और दिवाला समाधान व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि हजारों करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले इतनी कम राशि की वसूली से बैंकिंग व्यवस्था और आम जमाकर्ताओं के हितों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। वहीं, इस फैसले को चुनौती देने के लिए कुछ वित्तीय संस्थान कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं।
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