‘नक्सल मुक्त भारत’ पुस्तक का किया विमोचन
तृप्ति भटनागर
भोपाल। नक्सलवाद को खत्म करने की लड़ाई केवल सुरक्षा अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे की विचारधारा, सामाजिक प्रभाव और उन परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है, जिनसे यह समस्या लंबे समय तक जनजातीय और पिछड़े क्षेत्रों के विकास में बाधा बनी रही। इसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा को आगे बढ़ाने वाली पुस्तक ‘नक्सल मुक्त भारत’ का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित अपने निवास पर विमोचन किया।
लेखक तुहिन ए. सिन्हा और सह-लेखक डॉ. आलोक कुमार द्विवेदी द्वारा लिखी गई यह पुस्तक नक्सलवाद की विचारधारा, उसके विस्तार, समाज और विकास पर पड़े प्रभाव तथा भविष्य में इस चुनौती को दोबारा उभरने से रोकने के संभावित उपायों पर केंद्रित है।

नक्सलवाद के पीछे की कहानी समझने की कोशिश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नक्सलवाद ने दशकों तक देश के कई जनजातीय क्षेत्रों में विकास की रफ्तार को प्रभावित किया। जिन इलाकों में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होना था, वहां हिंसा और अस्थिरता ने विकास की राह को मुश्किल बनाया।
ऐसे में नक्सलवाद को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में देखने के बजाय उसके सामाजिक और वैचारिक पक्ष को समझना भी जरूरी है। पुस्तक इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ इस चुनौती पर विमर्श प्रस्तुत करती है।
क्या नक्सलवाद दोबारा पनप सकता है?
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि नक्सलवाद के प्रभाव को खत्म करने के बाद भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों, इसके लिए किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है। इसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, जनभागीदारी, शिक्षा, रोजगार और जागरूकता को महत्वपूर्ण माध्यमों के रूप में देखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र को स्थायी रूप से मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वहां के लोगों का विश्वास जीतना और उन्हें विकास के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। जब युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बेहतर विकल्प मिलेंगे तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा, तो अलगाव और हिंसा की जमीन कमजोर होगी।
विकास के साथ जागरूकता भी जरूरी
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा के साथ-साथ विकास और जागरूकता की भी बड़ी भूमिका है। जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इन इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘नक्सल मुक्त भारत’ पुस्तक इस विषय पर समाज में गंभीर चर्चा को बढ़ावा देगी और विशेष रूप से युवाओं को नक्सलवाद की विचारधारा तथा उसके दुष्परिणामों को समझने में मदद करेगी।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर इसके लेखक तुहिन ए. सिन्हा और सह-लेखक डॉ. आलोक कुमार द्विवेदी मौजूद रहे। पुस्तक का विमोचन ऐसे समय में हुआ है जब नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और स्थायी शांति स्थापित करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
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