न्यूज़म ब्यूरो
झाबुआ। जनजातीय अंचलों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ जिले के थांदला से बड़ी पहल की। स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेशभर के महिला स्व-सहायता समूहों को ₹300 करोड़ के ऋण का अंतरण किया। इसके साथ ही ₹283 करोड़ से अधिक की लागत के 57 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता ही परिवार, समाज और प्रदेश की समृद्धि का सबसे मजबूत आधार है। स्व-सहायता समूह केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन की नई पहचान बन चुके हैं।”

₹300 करोड़ का ऋण, हजारों महिलाओं को मिलेगा कारोबार बढ़ाने का अवसर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों को दिया गया यह ऋण केवल वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि हजारों महिलाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम है। इस राशि से महिलाएं अपने छोटे-छोटे व्यवसायों का विस्तार कर सकेंगी, नए स्वरोजगार शुरू करेंगी और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकेंगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी सोच के साथ स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, बैंक ऋण, बाजार और आधुनिक तकनीक से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

57 विकास कार्यों की सौगात से बदलेगी जनजातीय अंचल की तस्वीर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ₹283 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार 57 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इन परियोजनाओं में सड़क, शिक्षा, पेयजल, ग्रामीण अधोसंरचना और अन्य जनहित से जुड़े कार्य शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास को केवल शहरों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचाना है। बेहतर अधोसंरचना से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।
‘दीदी कैफे’ और आजीविका पुस्तकालय बन रहे आत्मनिर्भरता की पहचान
मुख्यमंत्री ने बताया कि आज मध्यप्रदेश में 196 दीदी कैफे सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जहां स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने उद्यम के माध्यम से आय अर्जित कर रही हैं। इसके अलावा 85 आजीविका पुस्तकालय भी संचालित किए जा रहे हैं, जो महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण, जानकारी और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं हैं। प्रदेश में गैर-कृषि आधारित 150 से अधिक गतिविधियों के माध्यम से वे खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, सिलाई, डेयरी, डिजिटल सेवाओं, लघु उद्योग और अन्य क्षेत्रों में सफलता की नई कहानियां लिख रही हैं।

जनजातीय युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य झाबुआ, धार, अलीराजपुर सहित पूरे जनजातीय अंचल में उद्योग और एमएसएमई को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए अपने घर और गांव छोड़ने की मजबूरी न हो, इसके लिए निवेश, उद्योग और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर जनजातीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा रहा है। इससे महिलाओं और युवाओं दोनों को स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

आत्मनिर्भर महिलाएं, समृद्ध मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मध्यप्रदेश भी इसी दिशा में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और नेतृत्वकारी भूमिका में लाने के लिए लगातार नई पहल कर रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों की महिलाएं आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक प्रगति की मजबूत भागीदार बनेंगी और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कार्यक्रम में मंत्री कुंवर विजय शाह, सांसद निर्मला भूरिया, मंत्री नागरसिंह चौहान, जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य उपस्थित रहीं।

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