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हिसार विश्वविद्यालय के कमरे में डॉक्टर युवती को जलाने के आरोपों पर आयोग का कड़ा रुख , SIT प्रभारी मूल रिकॉर्ड सहित तलब

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जांच पर आयोग की पैनी नजर : आरोपी को राहत, पीड़िता को न्याय कब ?

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़ 14 फरवरी 2026 : हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने हिसार के विश्वविद्यालय के कमरे में युवती को आग लगाने के गंभीर आरोपों से जुड़े प्रकरण में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि न्याय प्रक्रिया से किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

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मृतका की माँ श्रीमती गायत्री यादव द्वारा हरियाणा मानव अधिकार आयोग को दी गई शिकायत के अनुसार, दिनांक 24.04.2025 को उन्हें सूचना मिली कि उदेश कुमार नामक व्यक्ति ने उनकी पुत्री को विश्वविद्यालय के अपने कमरे में आग लगा दी। इस संबंध में एफआईआर संख्या 127/2025 दर्ज की गई, किंतु मृतका की माँ ने शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने आरोपी से मिलीभगत कर उसे रिहा कर दिया तथा अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। गायत्री यादव ने आयोग से न्याय की गुहार लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में भी ताजा स्थिति रिपोर्ट तलब की थी। भाटिया के आदेश के  अनुपालन में ही यह प्रकरण राज्य अपराध शाखा, भोंडसी, गुरुग्राम को सौंपा गया। जांच के दौरान 12.12.2025 को संबंधित पक्षों से पूछताछ कर 29.12.2025 को प्रकरण की फाइल राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण, पंचकूला के समक्ष प्रस्तुत की गई तथा 12.01.2026 को घटनास्थल का निरीक्षण भी किया गया।

हालांकि, आदेश में यह ने स्पष्ट किया है कि केवल औपचारिक कार्यवाहियों से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ.  पुनीत अरोड़ा ने बताया कि मामले की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रगति का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने विशेष जांच दल (SIT) के प्रभारी अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने तथा जांच से संबंधित समस्त मूल अभिलेख, दस्तावेज एवं भौतिक साक्ष्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 06.04.2026 को कैंप कोर्ट, न्यू पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, बी एंड आर, गुरुग्राम में होगी।

सदस्य दीप भाटिया ने अपने में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, पक्षपात या जानबूझकर की गई ढिलाई पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मानव जीवन की गरिमा और विधिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सर्वोपरि है, और आयोग इस सिद्धांत की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

 

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