नवरात्रि से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्टरों में सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम पैकेज का दावा, सेवाओं और भुगतान को लेकर साइबर जांच की मांग
राहुल गुप्ता
मुंबई, 22 सितंबर।
नवरात्रि से पहले मुंबई में ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ लिखे पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन पोस्टरों में गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने के नाम पर अलग-अलग पैकेज और सेवाओं का जिक्र किया गया है। पोस्टर सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है और कुछ लोगों ने पुलिस से मामले की जांच की मांग की है।
बताया जा रहा है कि ऐसे पोस्टर केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य शहरों में भी सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर इन पोस्टरों के तेजी से प्रसारित होने के बाद मामला साइबर पुलिस की जांच के दायरे में आने की मांग की जा रही है।
मुंबई से बीजेपी नेता संजय उपाध्याय ने मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन विज्ञापनों के पीछे कौन लोग हैं और इनका वास्तविक उद्देश्य क्या है।
वायरल पोस्टरों में तीन तरह के पैकेज
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ पोस्टरों में सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम पैकेज का उल्लेख है। कुछ पोस्ट में सेवाओं की कीमत 1,000 से 2,000 रुपये तक बताई गई है, जबकि एक अन्य वायरल पोस्ट में कीमत 3,000 से बढ़कर 6,500 रुपये तक होने का दावा किया गया है।
पोस्टरों में दो घंटे से लेकर पूरी रात तक गरबा पार्टनर, डांस स्टेप सिखाने, मैचिंग आउटफिट, सेल्फी, इंस्टाग्राम रील्स और फोटो जैसी सेवाओं का जिक्र किया गया है। कुछ पोस्ट में माथे पर किस, देर रात फूड आउटिंग और घर तक छोड़ने जैसी सेवाओं का भी दावा किया गया है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
संजय उपाध्याय ने लोगों से ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट और अकाउंट्स के प्रति सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने आशंका जताई कि बिना सत्यापन किसी सोशल मीडिया अकाउंट पर भरोसा करके पैसे ट्रांसफर करने पर लोग साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं।
उन्होंने जांच एजेंसियों से वायरल पोस्टरों की सत्यता और उनसे जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच करने की मांग की है। साथ ही संदिग्ध पेमेंट लिंक, व्हाट्सऐप चैट या दूसरे प्लेटफॉर्म पर भेजे जाने के जरिए फिशिंग, अकाउंट हैकिंग या वित्तीय धोखाधड़ी की आशंका की भी जांच करने को कहा है।
गरबा पार्टनर के नाम पर गतिविधियों की जांच की मांग
बीजेपी नेता ने दावा किया कि सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरिए इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने की आशंका है। उन्होंने पुलिस से वायरल विज्ञापनों की वास्तविकता, उनके पीछे मौजूद लोगों और आयोजकों की जानकारी जुटाने की मांग की है।
फिलहाल वायरल पोस्टरों के पीछे कौन लोग हैं और उनमें किए गए दावे कितने वास्तविक हैं, यह जांच का विषय है। पुलिस जांच के बाद ही इन विज्ञापनों की वास्तविकता और उनके उद्देश्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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