एसईसी से उन उम्मीदवारों को न्याय सुनिश्चित करने की अपील की, जिन्हें मजीठा ईओ द्वारा एनओसी देने से इंकार कर दिया गया
सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने ईओ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और साथ ही मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुम्मण पर नगर परिषद चुनाव प्रक्रिया में दखल अंदाजी करने का आरोप लगाया
मजीठिया ने बताया कि कैसे संजीव अरोड़ा ने अपने परिसर पर भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलों को तबाह करने के लिए सीबीआई के छापे से एक दिन पहले विभाग के अधिकारियों को सुबह 5 बजे कार्यालय बुलाया था
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 16मई। शिरोमणी अकाली दल ने आज राज्य चुनाव आयोग से मजीठा नगरपालिका कमेटी के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने से इंकार कर दिया गया उन उम्मीदवारों को न्याय सुनिश्चित किया जाने का आग्रह किया कहा कि अन्यथा पार्टी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
आज अकाली दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ नेता सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया की अगुवाई में राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चैधरी से मुलाकात की और उन्हें बताया कि आगामी नगर निगम चुनावों में भाग लेने के लिए पार्टी के किसी भी उम्मीदवार को पिछले लगातार 4 दिनों से चुनाव लड़ने के लिए जरूरी एनओसी नही दी गई। सरदार मजीठिया ने कहा कि इसके बाद अकाली दल के सभी उम्मीदवारों ने एक हलफनामे के साथ नामांकन पत्र दाखिल किया, जिसमें घोषणा की कि उन्होने सभी जरूरी बकाया का भुगतान कर दिया है और उनके कागजात सही हैं।
मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुम्मण पर चुनाव प्रक्रिया में सीधे दखलअंदाजी का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा,‘‘ हमें पता चला है कि चुनाव आयोग के प्रमुख रमनदीप वड़ाइच पर हमारे उम्मीदवारों के नामांकन खारिज करने का दबाव डाला जा रहा है ताकि अकाली दल अपना प्रधान बनाने के लिए अयोग्य हो जाए।’’ उन्होने राज्य चुनाव आयुक्त से इस मामले में ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि मजीठा में अकाली दल के उम्मीदवारों के नामांकन पत्र बाहरी कारणों से खारिज नही किए जाने चाहिए।
सरदार मजीठिया ने एसईसी के पास मजीठा के कार्यकारी अधिकारी के कामकाज के खिलाफ कड़ी शिकायत दर्ज कराई। उन्होने कहा कि ईओ रमनदीप वड़ाइच को जून 2025 में लुधियाना केंद्रीय उपचुनाव के दौरान भारत के चुनाव आयोग द्वारा फटकार लगाई गई थी और एक निर्देश जारी किया गया था कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होने कहा कि इसके बावजूद वड़ाइच को मजीठा में कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
यह बताते हुए कि कैसे ई.ओ ने अकाली दल के उम्मीदवारों को एनओसी देने से कैसे इंकार किया, सरदार मजीठिया ने कहा कि 14 मई को चुनाव अधिकारी अपने कार्यालय से भाग गए। उन्होने कहा कि जब अकाली लीडरशीप ने चुनाव रिटर्निंग अफसर एस.डी.एम से संपर्क किया – जिन्होने ई.ओ को 15मई को एक विशेष समय पर अकाली उम्मीदवारो ंको एनओसी जारी करने का निर्देश दिया तो भी वह कार्यालय नही आए। उन्होने कहा,‘‘ यह रिकाॅर्ड की बात है कि ईओ ने निर्वाचन अधिकारी के सामने स्वीकार किया कि उन पर एनओसी जारी न करने का आम आदमी पार्टी सरकार ने दबाव डाला।’’
इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरदार मजीठिया ने खुलासा किया कि कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने उद्योग, बिजली और स्थानीय निकाय विभागों से जुड़े सभी कर्मचारियों को 16 अप्रैल को सुबह पांच बजे कार्यालय आने के लिए बुलाया, जिसके बाद पंजाब में उनके परिसर पर सीबीआई के छापे से पहले ही भ्रष्टाचार से संबंधित फाइलों को गायब कर दिया गया। उन्होने इस मामले की तह तक जाने के लिए स्टाफ से पूछताछ की मांग की।
उन्होने मुख्य सचिव केएपी सिन्हा पर अपने परिवार के मैंबरों और निजी डेवलपर्स को विकास के लिए सस्ते दामों पर जमीन अधिग्रहण की सुविधा प्रदान करने के लिए जमीन उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की अनुमति देने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होने यह भी बताया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित आप पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर नकारात्मक टिप्पणियों को हटाने के लिए 10.59 करोड़ रूपये में एक निजी एजेंसी को काम पर रखा है।
इस अवसर पर सरदार मजीठिया के साथ अकाली दल के मुख्य प्रवक्ता स. अर्शदीप सिंह कलेर भी मौजूद थे।
